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Wednesday, January 2, 2019

नयन

नयन नयन में डूबते,
नयन चले भव पार !
प्रेम सुधा रस पी रहे,
नयन नयन हो चार !!

नयन नयन में डूबकर
नयन नयन से बात !
प्रेम सुधा रस पी रहे,
नयन नयन में घात !!

प्रेम सुधा रस पी रहे
नयन नयन से रात
नयन नयन में डूब कर
 नयन नयन से घात

विगत वर्ष में पा लिया,सुंदरतम उपहार!

विगत वर्ष में पा लिया,सुंदरतम उपहार!
सपन सलोने सज गये,इन नयनों के द्वार!!
इन नयनों के द्वार,आस निधि मन महकाये
तोरण मनहर हार,सृष्टि सुंदर मधुमाये
बजे नगाड़े धूम,चहुँ दिश आगत वर्ष में
मनवा गाये झूम ,जो मिला विगत वर्ष में

मेरा इस शहर में कोई अपना नहीं है!

मेरा इस शहर में कोई अपना नहीं है!
आँखों में मेरे कोई सपना नहीं है !!

सोकर आराम है उठूँगा आराम से!
जिंदगी यूँ मुझे कोई खपना नहीं है!!

देख लो सारे जोगी ये भोगी हुए हैं!
देव अपना मुझे कोई जपना नहीं है!!

तपिश की कसर थोड़ी बाकी रही न रहेगी!
के जला अंगार हूँ कोई तपना नहीं है!!

पलकों से पल पल मैंने काँटे चुने हैं!
"तनु," यूँ ही पलक कोई झपना नहीं है!!

Wednesday, March 28, 2018

पोलो भीतर ढोल का, गावै पड़ता मार 
बोल सुहाणा दूर का, दीखै भारी भार !!
दीखै भारी भार,    मंगल वाद्य हमारो,
ले डुग्गी मिरदंग,  हरमुनिया एकतारो  , ,,
संग झाल खड़ताल,  शंख डम डमरू बोलो!
सुषिर मधुर झंकार ,  पखावज ढोलक पोलो!!... ''तनु''

Wednesday, May 21, 2014

नींद देवी का आवाहन है नयन मूंदते आती है !
शुद्ध भाव सरल ह्रदय हो बिना बुलाये आती है !!
सुखद नींद में सृजन सुखद मातृ वंदना गाता हूँ !
मैं उसके भी गीत गाता हूँ जो भोर जगाने आती है !!तनुजा ''तनु ''

सूरज संग माँ अन्नपूर्णा हैं ,
निशा तो  देवी  मधुपर्णा हैं !
अमृत घट रस चन्द्र भरा है , 
सितारे उडगन तव शरणा है !!तनुजा ''तनु ''

 जान गया काया झूठी ,
 जान गया माया झूठी ,

जीवन बीता सिकुड़ा तन 
नहीं माता ना भाई है 
तेरे सोचे कुछ नाहीं है !!
बीते को विसरना जाने है ??
छोड़ काया आत्मा उठी
...  जान गया माया झूठी ,


क्या ?  रसातल तू जाने है ?

तू तो तल भी ना जाने है ,
हद सरहद में भूतल है !!
मुक्ता माणिक क्या जाने है ??  
कौन समझ सका गुत्थी .
... . जान गया माया झूठी ,


भटक जीव हद सरहद तोड़े ,
त्रिशंकु आत्मा जीव न छोड़े, 
शिव कंठ हलाहल है !!
रसना रसिक क्या जाने है ??
 भव भटकन बंधी फूंदी 
..... जान गया माया झूठी ,


जो पीव मिले सो जीव खिले ,
जग तोड़ के बंधन शिव मिले, 
हद सरहद के पार आत्मा !!
अनहद मस्ती क्या जाने है ??  
आया ये  बांधे मुट्ठी 
..... जान गया माया झूठी.... तनुजा ''तनु ''













रजनी कितनी ही काली हो छाती अरुणिम लाली ,
निशिगंधा जब खिली न देखा रात कितनी काली !
संघर्षों में जो वीर सच्चा आगे बढ़ता जाता है ,
शमशीर कहती शौर्य गाथा  बहते शोणित वाली !!तनुजा ''तनु ''

Tuesday, May 20, 2014

आओ अनुज हम तुम्हे करें कवि बना मंचासीन,
कोई कवि ठहरे नहीं जब तुम हो जाओ आसीन !
हो जाओ आसीन बहाओ कविता की अविरल धारा ,
ज्यों बही शीश चंद्रशेखर अविरल जटाशंकरी धारा !! 
नामचीन  हो नाम नरेंद्र हो बोलो अब क्या है कमी ,
ढेरों कविताएं लिख दी अब बन गयी है  निर्झरिणी !! ''तनु ''
आओ मिलने  मिलाने की बात हो जाए ,
गिले शिकवे दूर करने की बात हो जाए !
जिंदगी दो दिनों की है जालिम ,,,,,,
दूर तक संग संग चलने की बात हो जाए !!!!तनुजा ''तनु ''
अब न करें  बीते ज़माने की वो बात ,
गैर से मिला हाथ वो खंज़र की बात !
नई सुबह है ये नई बात करो ,
भूल जाओ वो इरादे वो घात की बात !!''तनु ''


 आज अपने नहीं ............. गैर मिलते हैं !

 बन के बैरी गले................  बैर मिलते है 

 गए दिन.......... नज़रों से सलाम भेजने के !

 आएं ? न आएं.??…करके देर मिलते हैं !! तनुजा ''तनु ''






  सवालों की दुनिया में घिरा हूँ निकालो मुझको ,

  आज अपने नहीं सब ............. गैर मिलते हैं !!

  क्यों इंतज़ार है … किसका है   इंतज़ार मुझको ,

  आएं ? न आएं.?? …करके देर मिलते हैं !! 

  एक वही है....  जिसका विश्वास  है मुझको ,

  फ़क्त साया ही है जिससे मेरे पैर मिलते हैं  !!

  आस  .... … रिश्तों की सलामती की मुझको ,

  क्या करूँ ....   बैरी गले बन के बैर मिलते हैं !!

  सांस में सांस है जीने की आस है  मुझको ,

  दोज़ख की बात न कर  मदीना की सैर मिलते हैं !! 

  आ ही जाएगा वो इक दिन ये मालूम है मुझको ,

  सफर आखिरी सलाम आखिरी करके सैर मिलते हैं !! …तनुजा  ''तनु'' 
   







हियरा हमरा भर भर आये ,
तोहरी पीर सही न जाये !
जब पीड़ा अंतस न समाये ,
नयनन से वह बह बह जाए !!

Monday, May 19, 2014

गुम हुई - सिट्टी पिट्टी,
पानी मिट्टी - पानी मिट्टी, 
ऊपरवाला - बने सनम,
क्यों फिर  - आँखें नम ,
थूको बातें - कड़वी खट्टी ,
अपनी तो  - मिट्ठी मिट्ठी ! तनुजा ''तनु ''
आज अपने नहीं ............. गैर मिलते हैं !
आज हाथ..…………   नहीं पैर मिलते हैं !!
गए दिन.......... नज़रों से सलाम भेजने के !
आएं न आएं.………करके देर मिलते हैं !!तनुजा ''तनु ''
संध्या बोली ; ऊषा से ,
 सखी  दादुर मोर क्यों बोले ?
ऊषा बोली संध्या से 
जब सूरज देखे धरा को ओ धरा बादल को तोले ,
पवन मीठे गीत सुनाये बादल मदिरा छलकाए , 
श्रावण स्वागत गीत सुनाये,
सखी दादुर मोर यों बोले !!  तनुजा ''तनु ''
संध्या बोली ऊषा से सखी  दादुर मोर क्यों बोले ?
जब सूरज देखे धरा को ओ धरा बादल को तोले ,
पवन मीठे गीत सुनाये बादल मदिरा छलकाए , 
श्रावण स्वागत गीत सुनाये दादुर मोर यों बोले !!  तनुजा ''तनु ''

निशिनाथ बिन बैठी रजनी कैसे करे श्रृंगार ,
बादल बीच चपला चपल प्रकट करे उदगार !!
मेघ गर्जना शम्पा संग  पवन करे आघात !
निद्रामग्न निशिनाथ हैं   रहे गगन आगार !!तनुजा ''तनु ''
फिर सुधियों के  बादल संध्या के मन पर छाए !
खड़ी खड़ी  सोचे  नादान नयनन  जल बरसाए !!
रजनी आई  निशिनाथ बिन मन बोझिल हो जाए !
यादों का अमृत कलश छल छल छलकत जाए !!तनुजा ''तनु ''

मन बड़ा बावरा भटके दौड़े उलटे पाँव
मॉल में  माल है कर खरीदी छाँव छाँव

परमारथ क्यों करना स्वारथ मीठे ढोल
पीट पीट बजाइयो स्वारथ है अनमोल

मानुस ऐसा मरखना मच्छर मार टपकाए
मच्छर बेचारा उसको  डंक मार रह जाए

बुराइयों से जो पेट भरे उसको न रोटी भाये
अगर बुराई ना करे मरखना बैल बन जाए

आज यहाँ और कल वहां दौड़े खातिर पेट
लालच की आंधी चली करगयी मटियामेट

चबाये बोटी बेचे बेटियां बेच दिया ईमान
बद से बदतर हो गया आज का इंसान