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Wednesday, January 22, 2014

गणतंत्र के लिये.........

मंगल कामना गणतंत्र के लिये.........

 अबके गणतंत्र इस देश में, 
बड़ा बदलाव लायेगा  ...........
"आप" आये हैं आपके साथ 
बहुत कुछ बदल जायेगा ...........अबके गणतंत्र
निष्पक्ष शासन हो जायेगा, 
होंगी नीतियाँ सरल. 
सामूहिक नेतृत्व आयेगा, 
बहुत कुछ बदल जायेगा ......अबके गणतंत्र 
भ्रष्ट ओ अपराधी, 
न खा पायेंगे मेवा. 
जन जन भागीदारी से, 
जनता से संवाद बढ़ जायेगा... अबके गणतंत्र 
जो जन  आयेंगे आगे,  
होंगे निर्मल छबि वाले.
जाति ओ वंशवाद का,
नामो निशा न रह पायेगा.....अबके गणतंत्र
खास अब सुनने लगे,
 हैं आम की आवाज़.
खास को अब आम की,
 है  शक्ति का आभास .
लोकतंत्र ही लोकतंत्र छा जायेगा.
अबके गणतंत्र इस देश में बड़ा बदलाव लायेगा........... तनुजा 'तनु'    

Monday, January 20, 2014

सुविचार ................

सुविचार ................

नव प्रभात स्वर्णिम सबेरा, 
खिली हुई है कली कली.. 
नेक काम बनाये किस्मत, 
नीयत रहे भली भली.. 
पुण्य काम माँ बाप की सेवा, 
मथुरा काशी गली गली .. ..तनुजा ''तनु''

Thursday, January 16, 2014

संदेश

 कभी कभी अम्बर में ,
  दिवाकर और सुधाकर.. 
   ये संदेश देते हैं.. 
   इधर माँ का है नरम आँचल,
   उधर पथ के कांटे पिता बुहार देते है.. 
    सूर्य पिता है चन्द्र माँ है ,
   जब दोनों का हो साथ ,
    उत्साहित क्यों न  हो जीवन.. 
   ये बिरली सौगात ईश्वर,
    हमको यूं ही बांट देते हैं ..
    कामना में उठ रहे है हाथ 
      दुआओं के
   जिंदगी में जिंदगी भर
   रहे माता पिता का साथ  तनुजा ...'तनु''17 01 2014 

Saturday, January 11, 2014

बेदर्द ........

बेदर्द ........

न जाना पास उनके अपनी तकलीफें ले ले के,  
अनजाने दिखावे में अपना वो कुर्ता फाड़ लेते हैं. 
करते हैं  किनारा आपसे दुख और मुफलिसी में, 
बात और बेबात अपना वो पल्ला झाड़ लेते हैं .
न पकड़ना भली लंगोटी भागते भूत की अब तुम, 
गनीमत है वो सिर पर पैर रखकर भाग लेते हैं. 
इतना होने पर भी सदा रहती उनकी टांग है ऊँची, 
यहां वहां जहां तहां अपना वो  झंडा गाड़ लेते हैं.
हलवा और करेला गर हो उनके सामने रखा ,
अपने लिये  वो सदा ही हलवा छांट लेते हैं. 
पल्ले उनके अनजाने कभी कोई काम आ जाये,
बीमारी हो न हो कोई पकड़ वो खाट लेते हैं. 
गाये तराने दुख भरे दुनिया से क्या मतलब, 
मौसम कोई हो बजाते डफ गा फाग लेते हैं.
भला हो चोरों का जो करते काम उनके साथ ,
मिली मिलाई  जितनी रकम हो बांट लेते हैं ........तनुजा ''तनु'' 12 -11 -1974 

Thursday, January 9, 2014

भ्रम

ज्ञान पाये अंधा बनै ज्यों दीपक है घाम, 
पढ़े पढ़ाये पशु हुए  बुद्धि भ्रम की खान.. 

बुद्धि भ्रम की खान अंतर तनु समझ न आवै, 
शाकाहारी बनै श्वान और मानुष अन्न न खावै .......... तनुजा 'तनु' 

Wednesday, January 8, 2014

बंदगी





ये किताब नहीं मेरा दिल है ए दोस्त , 
के सिवा इस के मेरी बंदगी किसी से नहीं..........तनुजा 'तनु'

घर ,

ये घर ,
मकान
हो जाये तो कोई बात नहीं,
मुकाम
 न हो............
 कि कब आया.. कब गुज़रा, 
 कुछ
 पता न चला ............तनुजा 'तनु'