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Friday, April 4, 2014

आने वाले की जय जय जनता उच्चारती ,
जाने वाले की ''रूह'' तक को भी बुहारती ! 
यही ''कल'' आज ओ कल का तकाजा है , 
''बिरला'' जिसको जनता जनम जनम जयकारती !!   

Thursday, April 3, 2014

राजपूत जाट  यादव कुर्मी दलित ओ मुस्लिम ,
इनको साधे नेताजी कर कर जतन ओ इल्म !
कर कर जतन ओ इल्म , बड़ा ये काम कठिन है !
नहीं साधना कर पाओ तो होती छबि मलिन है !!
 ये तो गिने चुने हैं  अब तो  जागी जनता सारी ,
सही रस्ते पे चलना वर्ना उतरेगी आरती तुम्हारी !!
                                   
  नन्हा मुसाफिर,
  चल पड़ा राहें सजाने कर्म की !
  राह उसकी प्रभु सँवारे      
  साथ ले निज धर्म की !!   तनुजा ''तनु'' 
                     
 कोई नहीं यहाँ हम कदम है 
 दुनिया में  गम ही गम है !
 हैं लोग यहाँ कई चेहरे पे चेहरा लगाये !
 आदमी की कीमत दौलत से कम है !!………  तनुजा ''तनु''
                                           

Tuesday, April 1, 2014


कागा कोयल ओ बोले मोर ,
आम्र वृक्ष के बौराये बोर ,
भारत देश है सबका सिरमोर !
है प्यारी  सुन्दर सुहानी भोर !!…………  तनुजा  ''तनु ''
मौन के बैन मुखरित हुए पन्नों पर ,
क्या है ये मौन जो लिखा पन्नों पर !
तुम ही कहो इस पर रोऊँ या हँसूं मैं ,
जो लिख गए हो तुम इन पन्नों पर !!


पन्नों पर इतिहास मौन है ,
कहानी बन कहानी मौन है !
कह जाती कुछ कही अनकही ,
देख सुन कर सब जग मौन है !!


पन्नों पर उतरती कथाएं ऐसी ,
उन्मादित क्रोधित हँसाती रुलाती ऐसी !
साहित्य समाज का होता है आइना ,
रच गए साहित्यकार रचनाएं ऐसी !!


कुछ पन्ने फड़ फड़ा कर पलट गए ,
इतिहास को यूँ तिरोहित कर गए !
अब  समय ,  हवाएं और तूफान है ,
कुछ कहानी बन गए कुछ कहानी कह गए !!


संस्कृति गाये गान मुखरित हो ,
पन्नों पर स्वर्णिम साहित्य रचित हो !
वह देश बनाये  सुखद भविष्य ,
जिसके जन सुघड़ सुसंस्कृत हो !!


नन्ही लेखनी से सजे प्यारे पन्ने ,
बैंगन ,घर, तितली ,बिल्ली के पन्ने !
नन्हीं कलम के पन्ने दीवाल हो या आँगन ,
यहाँ वहाँ सभी दूर सजते नन्हों के पन्ने !!





















अठे  अप्रेल फूल की कदर हे !
इरादो अणा को कारगर हे !!
अबे ई ''फूल'' वणावेगा जरुर ,
अणा पे ''मूर्ख दिवस'' रो असर हे !!