Labels

Saturday, April 5, 2014

भाषण भर कर कान  में नेता हो गए चुस्त ,
मन में अपने समझ रहे कर गए काम दुरुस्त !
कर गए काम दुरुस्त अब आया उनका राज ,
पर नहीं जानते भाषण अब नहीं करते राज !
योग्य व्यक्ति ही चाहिए देश नेतृत्व के लिए !
मिल कर जलाते चलो जनसंस्कृति के दीए !!………तनुजा ''तनु ''

Friday, April 4, 2014

लोई पिवा री वणारी तो आदत वईगी,
हींचि हींचि ने लोई हवेली बुलंद वईगी !
रीती रिवाजां री  अबे कई वात करां ,
अबे वात करवा री आपणी आदत वईगी !! तनुजा  ''तनु ''
साहित्य में जब धर्म का अहं होता है
जातिवाद की टीस वंश दम्भ होता है
राजनीति भी उतर समा जाती पन्नों में
 राष्ट्र के लिए  ये खतरे का समय होता है 
                                           यहाँ ''अप्रेल फूल'' की कदर है !
                                             इरादा इनका कारगर है !!
                                             अब ये ''मूर्ख'' बनायेंगे जरूर !
                                              इनपर ''मूर्ख दिवस'' का असर है !!
मुक्तक 


दिल की बात दिल में छुपाये रहिये ,
आंसू के दरिया को बचाये रखिये , 
आंसू कभी किसी के न बहें , 
यही दुआ दिल में बनाये रखिये !


आंसू की झड़ी जो लगी बरसात में ,
नम तकिये ने जो सुनी कहानी रात में ,
सरे आम कहानी ये बयां न हो जाए ,
खुल जाए न ये राज़ जजबात में !


न गिराओ नाहक ये आंसुओं के मोती ,
ये बेशकीमती है इनकी कीमत नहीं होती ,
भावनाओं का ज्वार जब आंसुओं में ढल जाए ,
कीमत जजबात की किसी गैर को नहीं होती !




    
क्यों ये आग का दरिया बहा  रखा है
 ये पीना पीना पीना जुल्म ढ़ा रखा है
  क्यों ? क्या बर्बाद करने को जीवन ही बचा है
  जो बिला वजह ही दाव पर लगा रखा है  तनूजा ''तनु ''
मुक्तक 


दायित्व मन का गुरुर है ,
कुछ कर गुजरने का सुरूर है !
कोई साथ दे या न दे कभी ,
वफ़ा का साथ जरुर है !!


मैं कैसे न साथ दूँ उसका ,
मैं क्यों न साथ दूँ उसका,
वो मेरे खुदा  की नियामत है !
मैं निभाता हूँ बंदगी उसकी !!


अभाव में दायित्व बोझ अधिक है ,
चाह कर भी मुंह फेरना कठिन है ,
तू तूफान में भी नैया खेते रहना !
भंवर की  राह है और पतवार टूटी है !!

मंज़िल का पता देता है चमकता सितारा ,
दूर ठिकाना होगा वहीँ  पर  कहीं हमारा ,
कितनें ही कांटे बिखरे हों राह में अपनी ,
छूटे न कभी हमारा साथ ये प्यारा प्यारा  !!

पत्थर को तराशना फिर बुत को बनाना ,
इक बुत के लिए प्यारे जजबात सजाना ,
उपरवाला ही ये कर सकता है तनु ,
जजबातों को  आवाज़ अपनी से सजाना !!