बलम गये झरिया ,,, टूट गयी थरिया ,,, दुखवा मैं कासे कहूँ हो !!! बलम गए … सगुन असगुनवा के बीच रहे मन फड़के है नैन अब आये रहा सावन फूट गयी कच्ची गगरिया हो!!! … बलम गए … हमरे अंगनवा में फूले हैं गेंदवा चले पछुवाई हरखे मन भावन भूल गए हमरी डगरिया हो!!! … बलम गए हमरी वो प्यारी सी कांसे की थरिया टूट गयी बहुतै ही आग लगावन चमकत थी कैसी बिजुरिया हो!!! … बलम गए तनुजा ''तनु '' प्रेरित अशोक शर्मा जी …
दर्द - ए - दिल ग़ज़ल की बात मत करो , दिल टूटा टूटा सा है , आंसू के हैं अशआर कोई अब रूठा रूठा सा है ! खुला सा आसमान था , हवा भी गीत गाती थी, जी चाँद का बादलों के दामन में घुटा घुटा सा है ! रहनुमा था , दामन में खुशियाँ लिए चलता था , बदल गयी है तकदीर दरवेश लुटा लुटा सा है ! ज़ख़म हरा और जले पर नमक है छिड़का हुआ , मरा है ज़मीर इंसा का हर शख्स कुटा कुटा सा है ! हर फूल पर उड़ते थे ''तनु '' तितलियों की तरह , अँगुलियों पर उसके कोई रंग छूटा छूटा सा है !!!. '' तनु "
ईद ख़ुशी का दिन आ गया , ईद मनाने का दिन आ गया !!!
भूल जाओ गुनाह दूसरों के तुम खुदा ने बनाये बन्दे सब हम इज्जत, अदब इंसा की कायम , पेश करने का दिन आ गया !!! ख़ुशी का दिन आ गया , ईद मनाने का दिन आ गया !!! नफरत न करो किसी से तुम बयां करदो दिल की बंदगी तुम खुशियाँ बाँटों ख़ुशी से रहो खुशियाँ बाँटने का दिन आ गया !!! ख़ुशी का दिन आ गया , ईद मनाने का दिन आ गया !!! ईनाम चाहिए अपने आप को सजाओ नेक दिल बन कर आँसू पोछो हँसाओ साथ में देश को न भूलो भाई तुम हँसो के हँसने का दिन आ गया !!! ख़ुशी का दिन आ गया , ईद मनाने का दिन आ गया !!! माँगती हूँ दुआओ में ईदी खुदा ये मुल्क मेरा दुनिया में है जुदा अमन में रहो और चमन में रहो आओ ईदी लेने का दिन आ गया !!! ख़ुशी का दिन आ गया , ईद मनाने का दिन आ गया !!!''तनु ''
दमन में प्रीत के गीत गा सकते नहीं ! अमन में चिंगारियाँ सजा सकते नहीं !! आह सुन के गर कोई दर्द पहचान ले ! गले क्यों कर उसको लगा सकते नहीं !!…''तनु ''
Saturday, October 4, 2014
चलना ही दूभर ----- यहाँ कैसे लगे छलांग ! आदत से लाचार कैसे ?? खींच लेते हैं टांग !! कौन कैसे गिरेगा दौर है खींचा खींची का ,,,,,,,,,,,, फर्जी मैदान ए जंग में लगता पी ली भांग !!! ''तनु ''
Friday, October 3, 2014
मूंछों का ताव है, और उनके सर पर ताज ! मेहरबां हुई है झाड़ू , उनके मुख पर आज !! सफाई हुई पूरी हुई अब बुराई का अंत हो ! सब कुछ साफसुथरा कभी न फैले खाज !! ''तनु ''