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Tuesday, January 6, 2015



 हाँ तुम !!! तुम हो!!!
 तुम ही हो मित्र , 
नाम से तुम्हारे ,
शक्ति सी मिल जाती है। 
पास होने से तुम्हारे ,
हर ग़म दूर हो जाते हैं. 
तुम ही हो उजाला!!!
तुम ही हो महक !!!
छाया भी तुम ही हो ,
या मैं कहूँ फरिश्ता !!
या के खुदा तुम ही हो!!! … ''तनु ''

Monday, January 5, 2015

 न रहने से मेरे ये महफ़िल तो अधूरी तो न होगी ,
मैं आऊँगी ये कह भी दूँ तो भी सबूरी तो न होगी ! 

आदतें बदल भी डालो के हर ख्वाब रंगीन नहीं , 
स्याह रात ऐसी कभी गुज़री म जबूरी तो न होगी ! 

मैं मैं हूँ किसी भी अक्स में न तलाशो मुझको ,
अब्र -ए  -इल्तिफ़ात भी मुझसे उबरी तो न होगी !   

चाँद घट घट के भी रहता है सबके जेहन में , 
''तनु'' अमावस सही, ये सदके ये जी हजुरी तो न होगी !! …… ''तनु''

Sunday, January 4, 2015

टूटते  घट 
आत्मा विहीन जन 
छोड़ते तन 

Friday, January 2, 2015

अरुणोदय
छलका रश्मि  घट
पोषित धरा 

रवि प्रांगण 
घट घट किरण 
फैला प्रकाश 

 मेघ गर्जन 
उलझी शम्पा रश्मि 
जल प्लावन

 नन्ही किरण 
गोद लाड़ली  धीय 
करे उजाला 

किरण परी
 लिए जादुई छड़ी 
सजाये जग 

दिखे विधु सा 
 वसु  विहीन भानु 
नहीं सोहता / मन मोहता 

संध्या भोर 
अलहदा स्वर्णिम 
क्षितिज मित्र। … 

Thursday, January 1, 2015

कटी पतंग
नाते रिश्ते बिखरे
झूठी उम्मीद

मिलन आस
उमड़ती नदिया
सागर प्रीत

कली चटकी
स्वागत नौबहार
आस पतंग

बूँद बरसी
मनवा तरंगित
आस हरषी 
सूफी संगीत
उम्मीद लिए दीप
मन उजास

 मन देहरी
उम्मीद पर पानी
बुझते दीए 

आशा के गाँव
गूँजती  शहनाई
बंधे घुँघरू

मधुर गूँज
कलरव प्रभात
आये प्रवासी


बड़ी उम्मीद
उकेरे शब्द हरे
धरा कागज़

कच्चा सा धागा
रिश्ते नाते बिखरे
छूटी उम्मीद

आस का पंछी
दाना चोंच ले चले
सन्तुष्ट मन

धूप चमकी
उमड़ती चाहत
उम्मीद पकी

आशा के गाँव
गूँजती  शहनाई
बंधे घुँघरू

मधुर गूँज
कलरव प्रभात
आये प्रवासी


बड़ी उम्मीद
उकेरे शब्द हरे
धरा कागज़

कच्चा सा धागा
रिश्ते नाते बिखरे
छूटी उम्मीद