Labels

Sunday, April 5, 2015

हृदय में धारे रहें , ------------  मन भाते हनुमान !
सब कामना सिद्ध करें ,  जय जय जय हनुमान !!

Saturday, April 4, 2015

कविता चपला सी कौंधती ,जब हाथ कलम न होता, 
कविता बन बिरह सी होती ,जब साथ सजन न होता !
चल पड़ी अभिसारिका चाह अब अवगुंठन की कहाँ ,
हृदय में अंकित तिमिर सी, जब प्रात जनम न होता !!,,,, ''तनु ''
देख लो !!! ये लालन को, सिंदूर से नहाय हैं ,
पास है ''सोटा'' धरे,  दैहिक दुख ये भगाय हैं !
राम ही को उर रखे ,  राम भक्त ये कहाय हैं, 
राम चरण में नित रत , लौ राम जु से लगाय हैं !!   

Friday, April 3, 2015

 https://fbcdn-sphotos-c-a.akamaihd.net/hphotos-ak-xfa1/v/t1.0-9/s480x480/10372571_1560836100864123_3928769112020979571_n.jpg?oh=079081b83d039dfab9f10af805931119&oe=55A45C8E&__gda__=1437977349_7b00b32b2023c70c0beb833b7bb42c5d

चित्र पर कविता 

नन्हे गदहे,
प्यारे गदहे!!!
उछ्वास न छोड़,
 दुखी न हो !
तू नहीं अकेला ,
चल उधर डग है ,
डग है !!!
आज में रह नन्हे,
 आज में जी!
विज्ञ बन, 
अज्ञ नहीं !!!
यही अद्य है ,
अद्य है!!! .....
प्रेम का पद्य,
वात्सल्य का पद्य!
मेरा प्यार सदा,
तेरे साथ रहेगा!
तू आया ,
अभी सद्य है,
 सद्य है !!!
मैं समझा दूँ तुझे,
दुनिया की रीत!
पेट भरने के लिए,
करना मेहनत !
तुम!!!
ये गद्य  है,
गद्य है !!!
मोह न कर ,
अश्रु न बहा!
जीवन से प्रीत कर, 
उदास न हो !!!
यही समर्थ का,
यज्ञ है ,
यज्ञ है !!!,,,,


Thursday, April 2, 2015


संयम, संस्कार हो संगत हो असंगत न हो !
प्राण हो कोमलता हो हया हो कुसंगत न हो !!
यशोगान हो मानवता काऔर गंभीर सोच हो, 
साहित्य मरे न ! जिए कविता शरणागत न हो !!!,,,''तनु''

Wednesday, April 1, 2015

कविता 
मन भावों का ,
सागर है !
कविता उसमें , 
 एक बूँद सी !!!
मन उद्यानों का,
 एक सुमन! 
कविता उसमें ,
 एक महक सी !!!
मन तरुणाई की, 
एक साँझ !
कविता उसमें,
 यौवन सी !!!
मन जीवन की,
 ख़ुशी लिए !
कविता उसमें,
 एक गीत सी!!!
मन प्रीतम का,
 गीत लिए! 
कविता गुनगुन,
 भौंरे सी!!! 
मन बारिश,
 की एक बूँद !
कविता भावों के,
 सागर सी !!!
मन प्रीत रीत के,
 सजल भाव !
कविता झर झर,
  झरनों सी!!! 
मन सपनों की.
 मीठी मुस्कान!
कविता मूँद नयन,
सोयी सोयी सी!!! .... ''तनु ''
छंद पियूष वर्ष छंद  पर आधारित  :-
विधा परिचय  -   यह एक भारतीय सांस्कृतिक छंद है जिसमे १९ वर्ण  एवं ४ पद होते हैं तथा ३-१०-१७ पर लघु वर्ण अनिवार्यत: रखना होता है , संस्कृत रचना में पदांत की अनिवार्यता नहीं होती परन्तु हिंदी तथा देसज में पदांत हो तो सौन्दर्य का बोध कराते हैं।
***********************************


                        १                        

 मान ! बल ! उद्वेग ! सागर ही रहा , 
 है मयंक पूनम नभ दिख ही रहा ! 
 हैं खिलाडी द्वय  !!! जीवन खेल था  
 एक उलझ ज्वार , उन्नत ही रहा !!...
                           
                         २ 

खेल लिया अब , चल !!! धो हाथ मुँह दूँ 
धो कर तेरी थकन रत्नाकर  दूँ !!!
हो न ऐसा माँ  तुझको डाँट रही   ,,,,,,,,,,,
तू कहीं न हो चुप , लो मैं रो न दूँ!! 



                         3  
याद आवे री बरसाने जन की !!! 
वृषभानु आँगन झनक रुनझुन की  !!!              
याद आवे झूलत मन मोहन की,
बाँसुरी टेर सुन राधे गुनन की !!!……