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Monday, May 11, 2015

इक  दर्द सा ---  साल गया
दिल तेज़ाब --- उबाल गया
फफोलों  में ऑंख न रोयेगी
गम दे गया मौत टाल गया 



बिखर के रह गए वो ''तेरी दोस्ती'' कमाल के वो दिन;

उलझे रहते थे खुद ही में, खद्द-ओ-खाल के वो दिन!

न तू पढ़ता था न मैं, गुजारते थे वो मस्ती भरी राते; 

मकतब भी खोया, उम्र भी खोयी, उस साल के वो दिन! 

किस्म किस्म के पकवानों से, सजा हुआ है दस्तरखान; 

माँ के हाथ का ''आम का अचार'', रोटी दाल के वो दिन!

अब उसी गुलशन में, उसी तरह क्यों गुल खिलते नहीं ?

बीते जनम न कोई पूछता,  ''हाल ओ चाल'' के वो दिन!!!  






Sunday, May 10, 2015




दोस्ती में तेरी----- मैं नादान बन गया 
मैं मानता हूँ ------ मैं इंसान बन गया 

हश्र में    ---  निगाह तेरी तरफ ही थी
जान-बूझकर क्यों तू अनजान बन गया   

देखा किये हमीं को    हँसते रहे हमीं पर 
क्यों सोचते थे सब ?  तू इंसान बन गया 

सोचता यूँ झुक कर    तू दस्त थाम लेगा
मुँह क्यों फेरा तूने तेरा अरमान बन गया

धीरे धीरे लिए जाता हूँ मैं कश्ती कनारे पे 
साहिल तुझे समझा था तू तूफ़ान बन गया , ,,.... ''तनु ''

           








संग राम रखवालो,   कहाणी राम री न्यारी ;
रंग भरे उ फूलां में,    सजावै नेह री क्यारी !
क्यों रोवै थारां नयणा,     जद राम राखै है ;
जग रो भरसो झूठो,   भरोसो राम रो भारी !!

Saturday, May 9, 2015

प्रेम 

कैसा प्रेम तुम्हारा ऐसा ?
कि है, ,,, 
मेरे मन का कोना रीता ! 

निश्चल निर्मल झरने बहते ;
नदिया कूल   बतियाँ कहते !
देख फुनगी पर पुष्प नया !
भौंरा मस्त कर अठखेलियां !! 
प्रेम!!! पुष्प और भौरे जैसा , ,,,
करते क्या तुम मुझसे ऐसा ?
फिर ?
 क्यों पल कलप सम बीता ?
क्यों है  मन का कोना रीता ?
… कैसा 

नयनों की ज्योति तुमसे है ;
अधरों की बानी तुमसे है !
लो कोयल की कुहुक सुनों तुम !
कितनी मेरी प्रीत गुणों तुम !!
प्रेम!!! चाँद चकोर के जैसा,  ,,,, 
करते क्या तुम मुझसे ऐसा ?
कहो ?
बूँद  बूँद   वो  मधुरस पीता ?
क्यों है ?  मेरे मन का कोना रीता ?
  …कैसा  

चमक शंपा  की बनी गुहार :
पड़े बारिश की भीनी फुहार! 
पपीहा पीहू पीहू पीहू बुलाये !
मोर नाचे नाच घन बुलाये !!
प्रेम!!! घन चातक के जैसा , ,,,
करते क्या तुम मुझसे ऐसा ?
बोलो ?
बातें कभी न हो अब संजीदा ?
हो न मेरे मन का कोना रीता ?
 .... कैसा 










Thursday, May 7, 2015

कवि 

दर्द ,आँसू, फूल, प्रीत, अंगार, प्रात, सांध्य से---- कवि के दिनमान हैं !
भक्ति, श्रृंगार, रौद्र, वात्सल्य, करुण, हास्य, --- वीर कवि के गान हैं !!
कवि घटक ले, घट में समा, घट घट उंडेले ---- ये कविता की खान हैं !
देश-दुनिया, हम-तुम, आज-कल, दिन-रात  निष्प्राण को देते प्राण हैं !!


 वे कल के ''सुकवि'' सूरज से चमके -दमके जैसे चमक ''भानु ''भान हैं !
रचनाएँ बोधगम्य, रससिक्त, प्रवाह युक्त,  ------ लालित्य लिए बाण हैं !!
''आदि कवि'' ''कोकिला'' कोई ''कवि गुरु'' कोई ''निराला'' देश की शान है !
कोई ''पंत,''   ''संत'' दे सीख कोई ''राष्ट्र कवि'',------  देश का अभिमान है !!


मीरा ,रहीम, तुलसी, कबीर, कृष्ण भक्ति में डूब रहे ------   रसखान है !
जगा इंकलाबी आफताब ''महताब'' बन फलक सज रहे ---  इकबाल हैं !!
आज के साहित्य चोर चोरी कर रचनाओं की हो रहे ---------- बदनाम है !
 ऐसा ? क्या पा गए ऐसा ? खो इंसानियत ------------   कैसे ये इंसान हैं!!





राम की क्यारी
सुख दुःख के फूल
जीवन बारी … ''तनु ''