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Saturday, October 17, 2015

बेटी रो सुख 

कणी री बेटी अगर थारा घरे दुखी वेगा !
थारी बेटी भी क्यों कर कठे सुखी वेगा !!
आस्था प्यार विश्वास है जीवन रा आधार , ,,
वठेज स्नेह सनी फलां री डाली भी झुकी वेगा !! .... तनुजा ''तनु ''

Tuesday, October 13, 2015

धीरज एक गाँठ है सब्र से खोलिए ;
मित्र की ज़रूरत हो मुँह से बोलिए !
सभी चलते रहें धर्म मर्यादा के साथ, ,,
नर हो या नारी हो कभी न तौलिये !!

Sunday, October 11, 2015

 बलि चढने वाला आपकी चाह पर बलि बलि गया ?
 मूक!! बिना मन  घसीट चाह पर चढ़ बलि गया , ,,
 ये कौन सी पीढ़ी तरी किस कर्म मर युग कलि गया !
 आज नर न नृप कोई धर्महित बंध बंधन बलि गया  !!
भारी करी 

सुपणा रा सितारा टूट्या ;
गिरगिट हगरा रंग लूट्या !!

कसी सिंदूरी जाजम विछि ;
दन सूरज नारायण संग लिप्ट्या !!

जिनगी दौड़ी सरपट ;
दर्दां रा एहसास घट्या !!

वणी आँगणे चाँद है ; 
डूंगर रस्ता से हट्या

अबे आस रो साथ है ;
जाणजो पासा पलट्या !!

जाणे खुशबु फैली थकी ;
फुलडा वायरा संग लिपट्या !!

अंधारो डरी ने भाग्यो ;

रात आखि सितारा लूट्या !!
…  तनुजा ''तनु ''

Thursday, October 8, 2015

एक जिंदादिल ख्वाब 

ख्वाब के सितारे मिट गए ;
रंग ये   चुरा गिरगिट गए !!

तान कर सिंदूरी चादरें ;
सूरज संग दिन लिपट गए !!

चल पड़ी राह ये जिंदगी ;
दर्द के एहसास' घट गए !!

अंधियारा डर' के भागता ;
जात अपनी में सिमट गए !!

सोच कर उस जमीं चाँद है ;
रास्ते से परबत भी हट गए !!

मोअत्तर हुआ है जहान भी ;
गुल भी   हवा से लिपट गए !!

खेलना   साथ में    आस के ;      
अब यहाँ   पासे पलट गए  !!.... तनुजा ''तनु ''

Wednesday, October 7, 2015

शिव भोले भंडारी 



वो जटाएँ  कमाल रखते हैं !
पेंच ख़म में सवाल रखते हैं !!

नाग तम के जकड कर पाश में !
शीश शशिधर जमाल रखते हैं !!

भूल जाते बहुत बहुत भोले !
नाम लेकर मलाल गलते हैं !! 

लो चुग रहे हैं जहर भरे मोती !
पाप मोचन न' मराल थकते हैं !!

तीसरा नेत्र जो खुले भी तो !
जान लो जग, बवाल जलते हैं !!

जाप शिव का करो नित मनन कर !
सकल जग दुःख भगवान' हरते हैं !!… तनुजा ''तनु ''






Monday, September 21, 2015


माता पिता को समर्पित 


दिन बचपन के जो सँवारे न होते ;
मिले संस्कारो के' सहारे न होते !

बिखर ही गए थे बिगड़ भी हम'जाते ;
समय पर जो नैना तरारे न होते !

बचाया उमस बारिश ठंढी गर्मी से ;
हुलसकर ख़ुशी के झलारे न होते !

तमस को हटाया जलाकर के' दीया;  
जो दिन  रैन हमारे उजारे न होते !

उसूल निभ जाये वही जिंदगी' है ;
वरना हम सबके दुलारे न होते !

सरल सी डगर की नहीं चाह कोई ;
पथ वह नहीं जहाँ अंगारे' न होते !

कर रही ''तनु''नमन झुक चरणों को छू ;  
गुलाब तो  गुलाब हैं हजारे न होते !.... तनुजा ''तनु ''