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Sunday, January 3, 2016

जादू है इश्क भी ....... 



झुकी गर आँख, ,, तो दिल की कहानी यूँ सुनाओगे ;
बंद होठ कलियाँ बन के, ,, मुस्कुराके, खिलाओगे ! 

अजब सेहर, ,, कभी सुलझी इश्क की राह भी दिलबर ? 
चल पडे हो, ,, मगरिब कहीं मशरिक़ कहीं दिखाओगे !!

कहाँ खिड़की मुहब्बत की, ,, दर ओ दीवार भी गुम हैं ;
कब तलक चाँद तारों को दुनिया अपनी बनाओगे !

अब बिखर के गुल, ,,कहीं बिफर दरिया, न बन जाना तुम ;
नहीं तूफां बना साहिल, सितम अगर समझाओगे !!

भली इक शब,  भला है एक चाँद कहीं नज़ारों में ; 
 ''तनु ''कभी सोचा नहीं था तुम दुबारा चाँद लाओगे !!!.... तनुजा ''तनु ''

Saturday, January 2, 2016

पग नी धरयो मग में घणों दूरो  है गाँव  
अंधारा री रात वीती चालो आगे है ठाँव  
भणवा वारा भणजो ने लिखवा वारा लिखजो 
संत, ग्यानी,  महात्मा री मिलती रेवे छाँव 
विधना

विधना ही खोलते पोटली, काल की ;
ले भी जायें दे कर जाते ,   साल की !
इसमें कुछ मोती  अनबिंधे दुखों के , ,,
बिंधे सुख मोती मानव के, भाल की !!
अभी तो एक कदम ही चले, बहुत संघर्ष बाकी है ;
अंधियारे की रजनी ढले , बहुत उत्कर्ष बाकी है !
कलम की धार पैनी हो कटे विचारों की फसल, ,,
सृजन मार्जन परिमार्जन ज्ञान सहर्ष बाकी है !!,,,तनुजा ''तनु ''
नया साल 

कार्तिक की शीत हो या फूले हों टेसू लाल ;
ज्वाला बन मित्र हो या टपका हो स्वेद भाल !
जीव के जीवन में नित ऋतुएँ आकर के जाएँ , ,,
ले दिन रात संग अपने आप आता नया साल !!

Friday, January 1, 2016

नव वर्ष 

मार्तण्ड के साथ कुछ श्रम कण बोये मैंने ;
अधरों सूखी हँसी देख कुछ अश्रु खोये मैंने !
संसृति हो अशोक ये चाह रही मेरे दिल की , ,,
स्वर्ण से इस नव वर्ष में कुछ मोती पोये मैंने !!


अभी तो एक कदम ही चले, बहुत संघर्ष बाकी है ;
अंधियारे की रजनी ढले , बहुत उत्कर्ष बाकी है !
कलम की धार पैनी हो कटे विचारों की फसल, ,,
सृजन मार्जन परिमार्जन ज्ञान सहर्ष बाकी है !!,,,तनुजा ''तनु ''
ऋषभ का कोमल स्वर कठोर बन क्यों साल गया ?
सर्द दर्द धीरे से  सुमधुर  जीवन क्यों बाल गया ?
घट रीत गया नव वर्ष बीता दे कर अभिशाप , ,, 
रजनी सा स्याह रवि बना अनमना क्यों साल गया ?