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Friday, February 12, 2016

बसंत 

बसंत में फूलों की आई बहार ;
पलाश का मित्र बना नन्हा कचनार !
देर सवेर आया रूठा अमलतास, ,,
तन उसके वल्लरी उलझी सी नार !!,,,,''तनु ''
कैसा वसंत ?

अपसंस्कृति कैसी कुशिक्षा जन जन में ?
कैसा वसंत ? आधे नहीं वसन तन में 
तन उजले मन काले भूले सदाचार , ,,
देख,  कामिनी झुलस गयी जीवन वन में !!.... तनुजा ''तनु ''

Wednesday, February 10, 2016

वसंत आया 


तन तृण तरंगित है ;
घूँघट कली ने सरकाया !
अधरों पर अंगुली धरे , ,,
चुपके से वसंत आया !!

प्रीत की क्यारी में ;
फिर सुमन हरषाया !
खुली वसंत की बारी , ,,
सौरभ भरमाया !! .... अधरों पर

चिठिया से प्रीत नहीं ;
प्रीतम ही आया !
खिलखिलाई सखियाँ , ,,
लो ऋतुराज आया!! .... अधरों पर

सजीले,  सजे से द्रुम ;
नव कोपलों में गुम !
कलियों का  लेकर , ,,
यूँ  सरताज आया !! ....  अधरों पर

सजीली गोरियाँ ;
मुस्काती टोलियाँ !
फाग गीतों ने।, ,, 
हर गाँव सजाया !! ... अधरों पर


मदभरी महुआ मटकी से ;
पीकर वारुणी वन में !
थाली मांदल की थाप पर , ,,
झूम झूम नचाया !! ... अधरों पर

धरती का नवयौवन ; 
निहारे रवि साजन !
 पुहुप टेसू खिलकर , ,,
कैसा इतराया !!.... अधरों पर

पीली सी पाग धरे ;
वसंत की टेर टरे !
हाथ सरसों से पीले कर, ,, 
मधुमास लड़खड़ाया !! .... अधरों पर

वसंत का आना गुन ;
 ज्योँ मधुप बौराया !
ऋतुपति के प्यार में , ,,
अंग अंग गदराया !! ..... अधरों पर.... तनुजा ''तनु ''


क्या हुआ जो मिला न हमको हम सा कोई ;
आइना देखूँ या देखूँ तुम सा कोई ! 
अश्क आँखों में लहू बन के उभर आया, ,,,
होश था कायम बे सब्र मुद्दत सा कोई !!.... तनुजा ''तनु ''

Tuesday, February 9, 2016



चोटिल घायल तन मेरा है ;
धीमी साँस उच्छ्वास का कैदी !

करूँ भरोसा कहाँ और कैसे ?
मुझे मलाल मैं आस का कैदी !!

देखूँ भरकर नज़रें अपलक;
दम -ब -दम एहसास का कैदी !

अब दाम कहाँ ज़हर खाने को ;
डूब गया हूँ प्यास का कैदी !!

गिरे सितारे आसमान के ;
कहाँ चाँद उजास का कैदी !!

हमेशा ही रहा  बे- बहर सा ;
कीड़ा तम और घास का कैदी !!.... तनुजा ''तनु ''

Sunday, February 7, 2016




गज़ब है तिल !! दिल में है तिल ,
तिल तिल बेदिल, बेहद कातिल !!
हठेला हो गया तो गया है छिल ,
फटेला है? क्यों नहीं जाता सिल ??
मुहब्बत में घायल पियें करेला ,
रोता ही रह जाए बिगड़ा हठेला। ... 
दुपहिया हो सायकिल हो या ट्रक  ,,,,
भोंपू तो बजेगा बजना है बेशक 
बेवजह ही जले दिल, जलते दिल
 तिल तिल बेदिल, बेहद कातिल !!
गज़ब है तिल !! दिल में है तिल ,....तनुजा ''तनु ''

Tuesday, February 2, 2016


रात दंगों में जल रही ;


सुना है रात दंगों में जल रही ;
यहाँ दिन में उदासी सी पल रही !! 

हवा सहरा से चले या कि गुलशन , ,,
जलाती जुल्म ढाती ही चल रही !!

नज़ारे तो उनींदे ही रह गए ;
पलक आँसू लिए क्यों बोझल रही !!

ज़माना याद करता रहेगा' सदियों ;
शब यहाँ हादसे की जो कल रही !!

जिसे दिन रात नज़रों से निहारा ;
उन्ही निगाहों से जिंदगी ओझल रही !!

कहाँ तक ताब ?  दिल बेबस ओ ग़मगीं :
सदा देकर मिरी साँसे बेकल रही !!...तनुजा ''तनु ''