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Tuesday, May 10, 2016


घूँट इक बुझाती नहीं, ...  प्यास है क्या ?
दर दर भटकाती रही , .. आस है क्या ??
सामने आब भी आफताब भी  है , ,,,
आज कुछ बता तो सही, ..  ख़ास है क्या ??.... तनुजा ''तनु ''



सुखन तेरी जुबान के चुने मैंने ;
चुप रहूँ ?  कुछ कहूँ?? ईमान में क्या ??"

मैं किसी के कहाँ मुक़ाबिल हूँ ; 
काबिल सभी हुए जहान में क्या ?? 

देखना परखना नज़रों से ही ;
झूठ ही कहती,  मीज़ान में क्या ??

खामुशी सी भरी फ़ज़ाओं में ;
सो गए तारे आसमान में क्या ??

तौल कर बोलना टूटे हैं दिल ;
पा लिया खोकर गुमान में क्या ??


 देखा जाना करीब से तुझको ;
 ढूंढती तुझको एलान में क्या ??.... तनुजा ''तनु ''


Monday, May 9, 2016

"नुक्स है कुछ मेरे बयान में क्या?"
बह्र~~ 2122 1212 22
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ैलुन
~~ काफ़िया ~~ आन (स्वर)
~~ रदीफ़ ~~ में क्या?


सुखन तेरी जुबान के चुने मैंने ;
 "नुक्स है कुछ मेरे बयान में क्या ??"

मैं किसी के कहाँ मुक़ाबिल हूँ ; 
काबिल सभी हुए जहान में क्या ?? 

देखना परखना नज़रों से ही ;
झूठ ही कहती  मीज़ान में क्या ??

खामुशी सी भरी फ़ज़ाओं में ;
सो गए तारे आसमान में क्या ??

तौल कर बोलना टूटे हैं दिल ;
पा लिया खोकर गुमान में क्या ??

 देखा जाना करीब से तुझको ;
 ढूंढती तुझको एलान में क्या ??.... तनुजा ''तनु ''



Saturday, May 7, 2016

कौन है वो ??

भोर की किरण ने छेड़ा होगा ;
सूरज ने साथ फिर दिया होगा !

आ गयी नन्ही धूप आँगन में ;
धीरे से मुट्ठी को खोला होगा !

थाम कर किसी पेड़ की टहनी को ;
उछल  फिर फुनगी पर चढ़ा होगा !

यहाँ से उस लाल फूल की तरह ;
उसने अँखियों को तरेरा होगा !

कितना डर कि आँख का गुस्सा ;
मुरझाई  दूब में सो गया होगा !

हो गयी परछाइयाँ खूब लम्बी ;
फैला टांगों को अलसाया होगा !

फिर उतर कर किसी सागर में ;
गहरी नींद में सो रहा होगा !!..... तनुजा ''तनु ''



Thursday, May 5, 2016




कलम आपकी चश्मा आपका, .. लगता हूँ न आप सा ही :
पहन कोट आपके  जैसा,......    जँचता हूँ न आप सा ही !
दीजिये आशीष पापा मुझे  कुछ बन कर दिखाऊँगा !
मेरी अदाएँ आप सी ही,.. .......  दिखता हूँ न आप सा ही !!.. तनुजा ''तनु ''

Tuesday, May 3, 2016




वो क्या जाने क्या गरीबी,  जिनके कोषागार भरे ;
नंगों की वो फ़िक्र करे क्यों जिनके वस्त्रागार भरे! 
माया के वशीभूत हैं ,  ये मदमस्त लोभी भँवरे , ,,,
भूखे की भूख क्या जाने, जिनके अन्नागार भरे !!...तनुजा.. ''तनु'' 

Monday, May 2, 2016



दिन के सारे कर्मों का लेखा जोखा ले शाम ढली ,
सुखद क्षणों के मधुरिम स्वप्नों को सजा अभिराम पली 
भव बंध से मुक्त हुआ मन उड़ चला नीले आकाश में ,
यामिनी महकी रजनीगंधा सी संग ले आराम चली !  तनुजा ''तनु ''