घूँट इक बुझाती नहीं, ... प्यास है क्या ?
दर दर भटकाती रही , .. आस है क्या ??
सामने आब भी आफताब भी है , ,,,
आज कुछ बता तो सही, .. ख़ास है क्या ??.... तनुजा ''तनु ''
सुखन तेरी जुबान के चुने मैंने ; चुप रहूँ ? कुछ कहूँ?? ईमान में क्या ??" मैं किसी के कहाँ मुक़ाबिल हूँ ; काबिल सभी हुए जहान में क्या ?? देखना परखना नज़रों से ही ; झूठ ही कहती, मीज़ान में क्या ?? खामुशी सी भरी फ़ज़ाओं में ; सो गए तारे आसमान में क्या ?? तौल कर बोलना टूटे हैं दिल ; पा लिया खोकर गुमान में क्या ??
देखा जाना करीब से तुझको ;
ढूंढती तुझको एलान में क्या ??.... तनुजा ''तनु ''
Monday, May 9, 2016
"नुक्स है कुछ मेरे बयान में क्या?"
बह्र~~ 2122 1212 22
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ैलुन
~~ काफ़िया ~~ आन (स्वर)
~~ रदीफ़ ~~ में क्या?
सुखन तेरी जुबान के चुने मैंने ; "नुक्स है कुछ मेरे बयान में क्या ??" मैं किसी के कहाँ मुक़ाबिल हूँ ; काबिल सभी हुए जहान में क्या ?? देखना परखना नज़रों से ही ; झूठ ही कहती मीज़ान में क्या ?? खामुशी सी भरी फ़ज़ाओं में ; सो गए तारे आसमान में क्या ?? तौल कर बोलना टूटे हैं दिल ; पा लिया खोकर गुमान में क्या ?? देखा जाना करीब से तुझको ; ढूंढती तुझको एलान में क्या ??.... तनुजा ''तनु ''
Saturday, May 7, 2016
कौन है वो ??
भोर की किरण ने छेड़ा होगा ; सूरज ने साथ फिर दिया होगा ! आ गयी नन्ही धूप आँगन में ; धीरे से मुट्ठी को खोला होगा ! थाम कर किसी पेड़ की टहनी को ; उछल फिर फुनगी पर चढ़ा होगा ! यहाँ से उस लाल फूल की तरह ; उसने अँखियों को तरेरा होगा ! कितना डर कि आँख का गुस्सा ; मुरझाई दूब में सो गया होगा ! हो गयी परछाइयाँ खूब लम्बी ; फैला टांगों को अलसाया होगा ! फिर उतर कर किसी सागर में ; गहरी नींद में सो रहा होगा !!..... तनुजा ''तनु ''
Thursday, May 5, 2016
कलम आपकी चश्मा आपका, .. लगता हूँ न आप सा ही : पहन कोट आपके जैसा,...... जँचता हूँ न आप सा ही ! दीजिये आशीष पापा मुझे कुछ बन कर दिखाऊँगा ! मेरी अदाएँ आप सी ही,.. ....... दिखता हूँ न आप सा ही !!.. तनुजा ''तनु ''
Tuesday, May 3, 2016
वो क्या जाने क्या गरीबी, जिनके कोषागार भरे ; नंगों की वो फ़िक्र करे क्यों जिनके वस्त्रागार भरे! माया के वशीभूत हैं , ये मदमस्त लोभी भँवरे , ,,, भूखे की भूख क्या जाने, जिनके अन्नागार भरे !!...तनुजा.. ''तनु''
Monday, May 2, 2016
दिन के सारे कर्मों का लेखा जोखा ले शाम ढली , सुखद क्षणों के मधुरिम स्वप्नों को सजा अभिराम पली
भव बंध से मुक्त हुआ मन उड़ चला नीले आकाश में ,
यामिनी महकी रजनीगंधा सी संग ले आराम चली ! तनुजा ''तनु ''