हरषे कुंज निकुंज , चन्द्र सजते रोहिणी !!..तनुजा ''तनु ''
Saturday, August 20, 2016
ख़ुशी मन की कपूर है, बहे मवेशी बाढ़ !
नदिया नाले पूर थे , कैसा था आषाढ़ ?
बरस गया आषाढ़ सावन गरज के बरसा ,
हुए बुरे हालात अब नहीं चाहिए बाढ़ , .... तनुजा ''तनु ''
Thursday, August 11, 2016
बचपन
बचपन बीतता खुशियों , खेले कैसे खेल ! कागज़ से जहाज़ बने, मुँह से छुक-छुक रेल !!
Monday, August 8, 2016
बादल की बूँद बिटिया,...पराई हुई आज , नभ में नगाड़े बजते ,.. गिरती तृष्णा गाज ! गिरती तृष्णा गाज, शीतल मंद पवन बहे ! अपने मन की बात , चुपके से बिजली कहे !! जाओ पी के धाम, मन की बजाओ मादल, आना अपने गाम, ....जब याद आयें बादल !!....तनुजा ''तनु ''
मांगे बिना न दीजिये , कभी कोई सलाह, पता नहीं अपमान की, कब खुल जाए राह ! अपनी बात तब रखिये जब सन्मुख हो चाह , वाह वाह ही पाइये, चाहे कोई राह !! ..तनुजा ''तनु''
रुग्ण औ निर्बल हुए, आज हमारे तात ! जरावस्था बहुत बुरी , बिसराये सब बात !! बिसराये सब बात, विधना ये क्यों कर हुआ ? बोलो दीनानाथ , तुम से हम करते दुआ ! निरोगी रहें तात , और जीयें जुगन जुगन ! सबल मन रहे साथ, दूर भागे रोग रुगन !!... तनुजा ''तनु''