Labels

Thursday, September 1, 2016



नन्हे बटुक बताओ तुम अवधूत कब बने ? 
दाँत तले जिव्हा दबी बंदआँख कब खुले ?
कुछ कर बैठे हो अब बता भी तो दो जरा ?
धूल धूसरित हो बैठे क्यों शैतानियों तले , ..''तनु ''




बचपन बीतता खुशियों ,     खेले कैसे खेल !
कागज़ से जहाज़ बने, मुँह से छुक-छुक रेल !!
 मुँह से छुक-छुक रेल !! फुलवारी ऐसी सजी   
 झूला डोले  डाल ,         झूले में गुड़िया सजी 
 पेड़ लगाओ सब भूल,   तुम सँवारो पचपन,  
कोमल कोंपल फूल,  हँसाता हँसता बचपन !!... तनुजा ''तनु ''

Tuesday, August 30, 2016


प्रार्थना 


 कठिन समय है नयना ढूँढे, पर दिखते करतार नहीं ;
 अपने भी भगवन हैं बनते ,    हैं पर पालनहार नहीं !
 जीवन की उलझन में नैया,   कैसे पार लगाऊँ मैं , ,,
 खेवन हार सभी हैं बनते,     पर करता भव पार नहीं !!... ''तनु''

Monday, August 29, 2016



चालो तो चाँद ने पूछां... 

तूँ तो बिणजारो रे चाँद ,
सूरज सहारो रे चाँद !
वात कई ?? तूँ घटे क्यों ??
पूनम उजास वारो रे चाँद , .''तनु ''



ओस 

क्यों दर्द सह कर दिए तुमने ये ओस के मोती ,
थोड़ी सी हवा और धूप में खोते ओस के मोती !
दे जाते इक दृढ़ इच्छा शक्ति मानव मन को , ,,
हैं अमर कभी खोकर न खोते ओस के मोती !!.. तनुजा ''तनु ''

Sunday, August 28, 2016



हिम कण

ये बिंदु हिम कणों के गुलाब की पंखुरी पर चमकते,
नाचते झिलमिल डोलते गिरते पंखुरी पर दमकते ! 
हुलसी पवन हुलसा गयी सारी डालियाँ गुलाब की, ,,
ओस चमकती रही, पंखुरी की अंजुरी पर गमकते!!..तनुजा ''तनु ''




ओस 

निशा को घाम की तपन धर धरा सो गयी ,
अजब आह भी,...  दिल में दबा धरा सो गयी !
कहूँ क्या ?? अरुणिम नभ था तम के जाते ही , ,,,
चमकती ओस माला देख धरा खो गयी !!...... तनुजा ''तनु ''