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Wednesday, June 7, 2017







सुनो सादी  ख़बर है इसे अब नया मोड़ ना देना !
ज़रा सी बात थी, बढ़ा इसे अब नया मोड़ ना देना !!

महकता था आँगन देश का हर लम्स -ए -खुशबू से !
उसी खूबसूरत ज़मी को उजाड़ कर छोड़ ना देना !!

निसार कर जां  इस जहां से हँसते चले जो जाते हैं !
उन्हें याद में रखना यादों को उनकी तोड़ ना देना !!

ज़मीं पर जो नहीं चलते उन्हें क्या दर्द बिवाई का !
रिसती बिवाईयाँ हैं, आबलों को उनके फोड़ ना देना !!

मिटे हर्फ़ वरक़ फटे कुछ दरख़्वास्तें  ख़ारिज हुई !
 लिखीं बातें भूल जाना तुम वह वरक़ मोड़ ना देना !!

बिखर जाता''तनु'' कोई यूँ गलत फहमी के झौंकों से !
कभी जाने अंजाने बहलाकर विषैला खोड़ ना देना !!, ,,,,''तनु ''















ताप वद्यो है तावड़ो,      गर्मी जीव जलाय ,
पंछीडा तीसा मरे ,    जुलम सह्यो न जाय !
सब जाणे है बादली ,    सागर पाणी लाय , ,,
घमाघम छड़ी मेह री,  ताव उतरयो जाय !!...''तनु ''

Tuesday, June 6, 2017




आषाढ़



मैं बदली आषाढ़ की,  मत कर मुझसे मोह !
कभी बरस कर बाढ़ हूँ, कभी मिलूँ  ना टोह !!

उमस भरा ये दिन कहे,  ढूँढूँ ठंढी रैन !  
बीती रजनी दिन गया, दिवस रैन बेचैन !!

आषाढ़ बदली बरसी, सौंधी चली बयार !
नहाये जड़ जंगम हैं, पहन बूँदो का हार !! 

आषाढ़ी बदली कहे , बजा बजा कर ढोल !
तरसी धरा बुला रही,  कहाँ बरसूँ मैं बोल !!

ओ बदली आषाढ़ की , धीरे चुपके डोल !
मन में मेरे मौन है, कह ना दे कुछ बोल !!

पवन चढ़ गयी बादली,  उड़कर करती सैर !
पर्वत जग जंगल मिले,    नहीं किसी से बैर !!

रैन दिवस न पलक जुड़े, कटता तन से स्वेद !
मैं जड़ जिद्दी हूँ सदा,            ना मानूँ मैं खेद  !!

पवन चढ़ गयी बादली,  नहीं किसी की ख़ैर!
पर्वत जग जंगल छलूँ ,   उड़कर करती सैर !!

आषाढ़ी तेवर चढ़े ,  बढ़ा उमस का भाव !
सावन जल्दी बुलाइये ,     वे रावों के राव !!

पवन चढ़ी बदली चली, बूंदों का ले भार !
पर्वत पाहन सोचते , किसे मिले उपहार !!    ..''तनु ''



Monday, June 5, 2017







करे पढ़ाई आग की , रखकर जी में ऐंठ !
शब्द ठंढ के रो पड़े , आग महीना जेठ !!

निपट अकेला राह में , ना संगी ना साथ !
जेठ महीना घाम का , कौन पकड़ता हाथ !!

निपट अकेला राह में , ना संगी ना साथ !
जेठ माह आराम का , कौन पकड़ता हाथ !!

ताप बढ़ा गर्मी चढ़ी,      जेठ करे उत्पात !
छड़ियाँ बरखा की पड़ी , भूला सारी घात !!



Thursday, June 1, 2017





गणपति सुमिर शुरू करें, शुभ दिन नूतन काज !
लक्ष्मी बन करती रहे ,         रानी बिटिया राज !!

Monday, May 22, 2017






नभ पर टेसू खिल गया,  ले कुमकुम का थाल !
जीवन हरा भरा रहे,            होता रहे कमाल !!
   
निराली आभा से सजा ,  नभ का भाल विशाल !
सिंदूरी सजता  रहा ,     नित सीमान्त भाल !!

जब सूरज ऊपर चढ़े ,सही न जाए प्यास !
प्यासे  प्राण चाह रहे , जल की है यह आस !!


Thursday, May 11, 2017



जेठ रो महिनों


घाम जलावै लाय सी, घणो जेठ रो ताव !
पंछीड़ा तीसा मरे,   रूँखड़ा खोजे छाँव !!

ज्ञानी दानो डोकरो ,आग महीनो जेठ !
''ठंढ'' आखर रो पड्या, रख्या कान उमेठ !!

जबरो जिद्दी यो घणों,    कट नी माने वात !
जेठ तपायो आग सो , जदि तो वी वरसात !!

उगमणों ने आथमणों, थोड़ो रे कमजोर !
जेठ दुफारी लाय री,   लपट घणी बरजोर !!

जेठ दुफारी लाय री, पटके रे झिंझोड़ !
पगरख्या में पगथली ,जळे बळे बरजोर !!

धरणि तपे जद घाम से, सावण में सरसाय !
जिद्दी जेठ घणों तपे ,चिलक घणों इतराय !!  ''तनु ''