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Sunday, June 11, 2017




नशा उसूलों का रखो साथ में अहबाब भी ,
डरो नहीं  आ भी जाए साथ में सैलाब भी !
नूर -ए -क़लम औ ज़ोर -ए -बयाँ हो नायाब तो , ,,
पा  ही जायेंगे  सनम साथ  में इंक़लाब भी !! .. तनुजा ''तनु ''

Saturday, June 10, 2017


मालवी में 


असाढ़ रा डंका वज्या, बादळी नी समाय !
कठे वरसे या बदली,  पूछ कुण रे जाय??

आषाढ़ के मेघ घने,     ढोल बजाते आय !
कहाँ बरसते ये भला,     कौन पूछने जाय??.."तनु''


आषाढ़

आषाढ़ री हूँ बदली,    मती लगा तूँ  जीव  !
कदि बरसी ने बाढ़ हूँ, कदी मिलूँ नी पीव  !!

कारा पीरा वादरा,         घणा रूप रो चाव !  
वायरा री गलबहियाँ,  पल पल करो बणाव !!

आज कळायण उमड़गी, बिन बरस्या नी जाय !
घणा दना रो चाव यो ,      पल पल वदतो जाय !!

सारा सरवर कदि भरे,   छूटी जीवन आस !
जा मति कारी वादरी,   हिवड़ो हुयो उदास !!

म्हे अडिका थाने घणा,   दन बीते औ रात !
क्यों नी आया वादरा ,  आई रुत बरसात !!   ,,...''तनु ''                         


 वादळी आषाढ़ री 

ताव चढ़्यो आषाढ़ रो, उमस सही नी जाय !
चालो सावन तेड़वा !       भर ठंढई पिलाय !!


असाढ़ रा डंका वज्या, बादळी नी समाय !
कठे वरसे या बदली,  पूछ कुण रे जाय !!

नीर जिमावै बादली,       हरिया बंजर बाँठ!

सब जीमण तरसिया,  खुल गी हिय री गाँठ !! 

धुळ्या थका डुंगरिया , कोंपल फूटी जाय !    

जाणे कोरी चूंदड़ी,     सनेह से हरियाय !!,...''तनु ''



 वादळी आषाढ़ री 

ओ आषाढ़ी बादळी ,   चुप रे धीरे डोल !
मन म्हारा मौन धरयो, गरजे क्यों तू बोल !!

 मौन बड़ो है वात से ,  तूँ नी जाणे मोल !
 आप अपनी वात करे, वाजे थारा ढोल !!

आषाढ़ी वदरी झरै , शीतल चले बयार !
जाणे मोती विखरया, खुश आखो संसार !!

मौन धरयो  है मुनि सो, बदली को नी काम !
वायरा संग अगास में ,       चाले तो है नाम !!





वादळी ओ आषाढ़ी ,    चुप रे धीरे डोल !
मन म्हारा मौन धरयो, गरजे क्यों तू बोल !!
गरजे क्यों तू बोल ?  आप अपनी वात करे,
तूँ नी जाणे मोल,         जद सनेह नीर झरे !
कारा वदरा वरसे दूर कारी काजळी !
धीरे धीरे बरस ओ आषाढ़ी वादळी !!, ... तनुजा ''तनु ''

Wednesday, June 7, 2017


कुछ मेरी भी , 

सुनो सादी  ख़बर है इसे अब नया मोड़ ना देना !
ज़रा सी बात थी, बढ़ा इसे अब नया मोड़ ना देना !!

महकता था आँगन घर  हमारी लम्स -ए -खुशबू से !
उसी खूबसूरत ज़मी को उजाड़ कर छोड़ ना देना !!

निसार कर जां इस जहां से हँसते चले जाएंगे हम 
हमें याद में रखना यादों को हमारी तोड़ ना देना !!

ज़मीं पर जो नहीं चलते उन्हें क्या दर्द बिवाई का !
रिसती बिवाईयाँ, आबलों को हमारे फोड़ ना देना !!

मिटे हर्फ़ वरक़ फटे कुछ दरख़्वास्तें  ख़ारिज हुई !
 लिखीं बातें भूल जाना तुम वह वरक़ मोड़ ना देना !!

बिखर जाता''तनु'' कोई यूँ गलत फहमी के झौंकों से !
कभी जाने अंजाने बहलाकर विषैला खोड़ ना देना !!, ,,,,''तनु