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Tuesday, June 20, 2017




योग 



राज़ सब जान गये हैं, जिसने जो चाहा मिला ,
योग करेगा वही जानेगा, उसको क्या मिला !

 जमीन पर झोपडी वाला हो या महल वाला, 
खो गए वीराने,सबको चाँद का रास्ता मिला !

डूबने लग जाओगे  जब मस्ती में योग की,
जान जाओगे , दीवाने को दीवाना मिला ! 

इस सफर में, आसन हैं औ आयाम सांसों के, 
काया नफीस बनती, रोगों से छुटकारा मिला !

पुराने कठिन रोगों को रगड़ के धो डालो तुम, 
साथ सूरज के चलने वालों को सरमाया मिला !  

ध्यान करने औ प्राणायाम में निरंतरता हो , 
खुद को देखो, लिपटोगे यूँ  शहज़ादा मिला ! . ..''तनु ''





Monday, June 19, 2017



योग 


राज़ सब जान गये हैं, जिसने जो चाहा मिला ,
योग करेगा वही जानेगा, उसको क्या मिला !

इस जमीं पे झोपडी वाला हो या महल वाला,
खो गए वीराने,सबको चाँद का रास्ता मिला !

इस सफर में, आसन हैं और आयाम सांसों के,
काया नफीस बनती, रोगों से छुटकारा मिला !

सब पुराने कठिन रोगों को अब धो डालो तुम, 
साथ सूरज के चलने वालों को ही साया मिला ! 

ध्यान करने और प्राणायाम में निरंतरता बने,
खुद को देखोगे, कहोगे कोई शहज़ादा मिला !...''तनु ''

Sunday, June 18, 2017

  

योग से ,

   एक लचीला और मजबूत शरीर बनाओ योग से ,
   साँस औ उच्छवास ले मुखकान्ति बचाओ योग से !
   फैट घटे जुकाम मिटे एलर्जी चर्म रोग भी दूर करे , ,,
    साथ मेडिटेशन करो स्ट्रेस फ्री हो जाओ योग से !!...''तनु '' 

Friday, June 16, 2017




जीवन मंगलमय रहे ,    सुख की हो बौछार !
 नित नित सुवासित शीतल, आती रहे बयार !!,,..''तनु ''

किसान, ,,

खेतिहर मजदूर रहा , सदा अपना किसान ,
रात औ दिन एक किये, सोया सदा मचान !
सोया सदा मचान !   गेह छोड़ कानन जिया!!
सीँच सदा ईमान , -----ग्रीष्म को सावन किया ,                               
दो उसको सम्मान, ---  नेह सरसाता हलधर!
सबके भरता पेट, ----   वही मजदूर खेतिहर !!, ..''तनु''




जात

सिकती इसपर रोटियाँ,  करती ये व्यापार !
राम नाम तो दूर है ,        जात जीवनाधार !!
जात जीवनाधार ,  करे सब अपनी मन की !
दुबले दो आषाढ़,      कौन पूछेगा जन की ?
''राजनीति'' दूकान में  जिंदगानी  बिकती !
लाशों पर सरेआम आज रोटियाँ सिकती !!.... ''तनु ''

Sunday, June 11, 2017




कोई हबीब नहीं पढ़े जो मेरी जिंदगी की किताब,
कभी बहार थी गुलिस्ता में और सुर्ख़-रु थे गुलाब !

मुझ ही से शब में उजाला, मुझ ही से बादे सबा,

बंद हुए दरीचे सभी, खुलता नहीं कोई ही बाब !

फ़िक्र -ए फ़र्दा रही हवा, चली समंदर से दश्त, 

देती है साज-ए-शिकस्ता का जहां को हिसाब !

आँखों में मदहोशी थी,लहजा था प्यार में डूबा,

ग़ुम सारे ख़्वाब हुए, अब हैं अज़ाब ही अज़ाब ! 

खोया है कलाम कि फिर तफ़्सीर लाऊँ कहाँ से !

ख़्वाब उसी का जमाल, मेरी आयत की किताब !!...''तनु ''