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Friday, July 7, 2017



 अपने हित साधने के लालच को भुलाना होगा ,
 अपनी खोयी हुई खुशियों     को बुलाना होगा !

  देश प्रेम के नाम पर जो खूनी खेल खेल रहे,
 खून के आँसू  देश द्रोहियो को रुलाना होगा !

मूक बन दर्शक हम जिसको देख रहे हैं बोलो ,
अपनी आँखों  के सामने  पर्दे को हटाना होगा !

वीरों के बलिदान का अपमान क्यों होता है ,
बढ़ कर आगे अपने क्रोध को बताना होगा !

कोई नहीं है जो इसका बहिष्कार विरोध करे ,

सच्चा है प्यार देश से तो उसको जताना होगा !,,, ''तनु ''

Thursday, July 6, 2017


गुमशुदा , ...

आसमा में कहीं छुपा होगा !
बादल भी बेदिल रहा होगा !!

वो परिंदा नाकाम प्यासा सा ! 
प्यास रूह से बुझा रहा होगा !!

शब उसके नसीब की तारीकी !
डूबते सा बख़्त रहा होगा !!

दूर औ पास कोई नहीं उसका !
पेड़ बिन साया ही रहा होगा !!

 जो सदाओं दम ही नहीं उसके  !
  या सदा -ए -करख्त रहा होगा !!

 वो किसी का नहीं गुमशुदा ''तनु '',
 जानकर गुमशुदा रहा होगा !!, ..... ''तनु ''

Tuesday, July 4, 2017


गजल - समय चक्र चलता रहा

समय चक्र चलता रहा,
सूरज नित ढलता रहा !

दामन सिंदूरी साँझ का, 
पर्वतों फिसलता रहा !

गा रहा गीत झरना ,
संग पवन झरता रहा !

धीमे धीमे दरमिया ,
प्यार फिर बढ़ता रहा ! 

सुनहरी सी किरण तुम ,
घर जगमगाता रहा ! 

कामनाएँ सोणी सी,
ये जहां सजता रहा !

प्रीत ओढ़े बदरिया ,
चाँद भी छुपता रहा !

बंद आँखें झुका 
सर 
मेरा ये सजदा रहा !... ''तनु''




Monday, July 3, 2017


दीजिये ,


आ गया पास कोई उसे प्यार दीजिये ,
जहां की खुशियाँ उसे उपहार दीजिये !

 यों हाथ बाँध कर मत खड़े रहें साहिब , 
हाथों को खोल लीजिये दुलार कीजिये !

अकड़ कर आँख क्यों दिखाते साहिब ,
नजरों में भरे प्यार का इजहार कीजिये !

बेसबब खड़े हुए फोटो खिंचाते साहिब ,
ऐसा कहा नहीं हमने उपकार कीजिये !

बातें टालना ये अदा तुम्हारी है साहिब ,
भुलाकर बुराइयाँ  सदव्यवहार कीजिये !

खातिर किसी ज़रा झुक जाइये साहिब ,
अजी जीत पर हमारी, चलिए हार दीजिये !

कौड़ियों के मोल ये जीवन है साहिब ,
अमीर - गरीब मत देखिये वार दीजिये !

कल कज़ा आयी  मिटटी कहाँ साहिब ,
ताबूत हो के सीढ़ी ''तनु ''श्रृंगार कीजिये !,,.... ''तनु ''




आभासी दुनिया, ... 




महफ़िलों में अब कहकहों के अपने मज़े खो गए ,
तुम सुनाओ मैं कहूँ कुछ वो कहते कहते सो गए !
कह चुको तो देखना रुक दुनिया आभासी सनम ,...  
जो रहे रोते हँसे फिर वो हँसते हँसते रो गए !! .....  ''तनु ''

Sunday, July 2, 2017


नव कुण्डलिया
 'राज छंद' 


अपने बिठाय, जात गठजोड़ !
जात गठजोड़ !   कुर्सी बैठा 

कुर्सी बैठा ,     आचार हीन !
आचार हीन !! खो अनुशासन,

खो अनुशासन,  बँटे रेवड़ी !
 बँटे रेवड़ी !!  अपने बिठाय, ,,,,..''तनु ''






अपने लोग बिठाय के, जात संग गठजोड़,
रंग मंच सजा कर के,      पाते कुर्सी होड़ !
पाते कुर्सी होड़,    धज्जियाँ अनुशासन की !  
देश धर्म को तोड़,  हीनाचरण,  पालन की!!
फिर सत्ता पद पा कर पूरे करते सपने !
रेवडी  बँटती अपनों और खाते अपने !!.... ''तनु ''