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Sunday, July 16, 2017






आयो  कने वणी ने प्यार दीजो सा !!
जग  री खुशियां उपहार दीजो सा !!

यूँ बाँधी ने हाथ उबा मति रिजो ! 
हाथां ने खोल जो दुलार दीजो सा !!

घणी जबर लागि या कपट री गाँठ ! 
आँटी राखो मन मति खार दीजो सा !!

नया रा साथ चालो जूना री वात मानो 
पुण्य पुरखाँ रा करज उतार दीजो सा 

अकड़ी ने आँख्यां थें मति दिखाजो !
निजरां भरी प्यार थें वार दीजो सा !!

खातर कणि जरा झुकी जावो तो कई !
जो जीत्या चालो वणाने हार दीजो सा !! 

 मोल कौड़ी जीवन कीमत नि अणि की !
बुरी  वातां भूलजो सदव्यवहार दीजो सा !!

काले आया ने काले चालता वणोगा !
ताबूत वो के सीढ़ी ''तनु''सिणगार दीजो सा !!,,,..''तनु''









मालवी गज़ल 



सूरज उगमणो  ही  रे !
सूरज आथमतो ही रे !!

सई साँझ सिंदूरी लुगडो !
परबतां फिसलतो ही रे !!

झरनो गावै मीठो गीत ! 

साथे पौन झरतो ही रे !!

थारे म्हारे बीच में !
प्यार धीमें वदतो ही रे !!

सोना सी रूपारी तूँ !

घर जगमगातो ही रे !!

उगमणे  रा साथे साथै !

आथमणों भी सजतो ही रे !!

वादला री  प्रीत माय !

चांदड़लो छुपतो ही रे !!

आंख्या बंद ने हाथ जुड्या !

राम राम थांसे वेति ही रे !!.... ''तनु''






मालवी गज़ल 

कस्तर !

आँख्यां बहे आँसू छिपावाँ कस्तर !
समंदर में लेहरां उठावाँ कस्तर !!

जिनगी रा मोड़ घणा रोके कदम !
मंजिल ने कने     बुलावाँ  कस्तर !!

वख़त री साँसां तेज़ घणी चाले !
बोलो रातां ने दन बणावाँ कस्तर !!

जो फुलड़ा री खुशबू चावै थाने !
रई बागाँ  बहार बुलावाँ कस्तर !!

कणिके नी आया ''तनु''ई चाँद-तारा !
अणि माटी दीवा बणावाँ कस्तर !!,..... ''तनु ''










सावन झूला

सावण झमाझम वरसो, करजो जी उपकार !
मेहा मनड़ा सरसजो, ..... सूखो रे संसार !!
सूखो रे संसार,  ..... ताल तलैया भरी दो ,
मिटि जावै तकरार ,जिनगी सुखमय करी दो !
मनडो गाय मल्हार ,   वणा दो पावन सावण !
झूला डालां  डार,  वरसो झमाझम सावण !!.. ''तनु ''

सावन झूला
सावन रिम झिम बरसिये , करिये कुछ उपकार !
मेहा मनवा सरसिये , --------- सूखा सा संसार !!
सूखा सा संसार , ------ तलैयाँ सरवर भर दो ,
मिटे सभी तकरार !!! जिंदगी सुखमय कर दो !
मन गा रहा मल्हार ,----- बना दो मौसम पावन !
झूले डाले डार ! ---- बरसिये रिम झिम सावन !!.... ''तनु''

Saturday, July 15, 2017






दिमागों पे पड़ा ताला हुआ है,
कहीं फिर से घोटाला हुआ है ?

बहुत स्वार्थ की दुनिया बसा ली ,
हर आस्तीन ही अहि पाला हुआ है ?

 जिसे पूजा जिसे देवता बनाया,
उसी ने बनाया निवाला हुआ है ?

कि घटता जा रहा मैं चाँद जैसा ,
अमा पूनम का बवाला हुआ है ?

सभी निर्दोष हैं जिन्होंने ली है जां,
 ये खूं क्यों नाहक उबाला हुआ है ?

वही प्यासा उसे है प्यास कितनी ,
वही साकी वही प्याला हुआ है ?

अरे जाँ देता तो देश खातिर देता ,
लिए आतंक क्यों जियाला हुआ है ?

 चढ़ाना ''तनु'' क्यों आसमा पर उसी को ,
 बुझी शमा का जो परवाना हुआ है ??,,,, ''तनु ''

Wednesday, July 12, 2017







आँख से बहते, आँसुओं को छुपाना होगा !
समुन्दर बन के  लहरों को उठाना होगा !!

हर एक चौराहा रोक लेता है बढ़ते कदम !
मंजिलों को बताने हवाओं को बुलाना होगा !!

कैसे वक्त की साँसों को कोई छू पाये !
नक्श आने वाले लम्हों को बनाना होगा !!

रखना है कायम गुलों की  महक तुमको !
चमन में रह कर बहारों को बुलाना होगा !!

चाह कर कौन ला पाया चाँद -ओ- तारे !
''तनु ''इसी ख़ाक से दीयों को बनाना होगा !!.. ''तनु ''







Saturday, July 8, 2017



लिखने वालों का दिल मत तोड़िये उनमे विज्ञ बहुत हैं ,
अनजाने भी जानकर कौतुक लाते उनमें अज्ञ बहुत हैं !
साधनों के अभाव में भी होती ही रही मानसपूजा , .. 
ईश्वर भावों से खुश होता नहीं जानते अनभिज्ञ बहुत हैं  !!, ''तनु ''