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Thursday, November 9, 2017

धुँए धूल की जो हमने आरज़ू कर ली




धुँए धूल की जो हमने आरज़ू कर ली ; 
बुरा ही किया जो ऐसी जुस्तजू कर ली !

ये जज़्बा है लगाते इक दूजे इल्ज़ाम ?
 के खुश हैं खूब गन्दगी की ख़ू कर ली ,

पर्यावरण छतरी टूटी तपन सही जाए ना ;

कुछ देर बैठ ए. सी. में हाँ और हूँ कर ली !

मोहताज हम आराम के चाह खुशियों की ;

आहिस्ता ही सही कयामत रु-ब-रु कर ली !

शह-ए -ख़ूबाँ हम डरते न अब किसी से ;

ज़र्रा ज़र्रा अस्काम आग हर सूं कर ली !!... ''तनु''

Wednesday, November 8, 2017

तुम सामने बैठो के क़रार आया नहीं;






तुम सामने बैठो के क़रार आया नहीं;

बहुत दिन हुए के ग़मगुसार आया नहीं!!

मेरी आँखों में नहीं सपन किसी और के ;

दीद की उम्मीद थी के यार आया नहीं !! 

जज़्बा-ए-दिल पर इल्ज़ाम ना लगे कोई ;
कमतर सभी रहे के मुख़्तार आया नहीं !!

फिर बेपनाही के अंदाज़ भूल गया मैं ;

 तरीक़-ए-आशिक़ी पे निखार आया नहीं !!

फ़रेब ग़म था मगर आरज़ू थी यही मेरी ;
कैसी जुस्तजू थी ये दिलदार आया नहीं !!

ऐ तनु वफ़ा दफ़्न हो गयी है ज़माने में ;
मज़ार ही मज़ार अपना दयार आया नहीं !! ....'' तनु ''



Sunday, November 5, 2017


तितली के मन के उदगार धूप के साथ चुहल


धीमी धीमी ठंढी सी है तू
दीवार पर सहमी सी है तू
पात को तूने,  मैंने तुझे छुआ
कुछ देर की पाहुनी सी है तू। . ''तनु ''

ऐ मेरे मन दीपक जल





ऐ मेरे मन दीपक जल ,
ऐ मेरे मन दीपक जल ,
तूने उजारा है मेरे,
अंधियारे मन का महल !


तेरी बाती जलती है 
रवि सी अनवरत ऐसे 
तेरी चमक में मुझको 
मिलती है दुआएँ जैसे 
मेरी राहों में बिखरे हैं 
कई कोमल से कँवल !! .... ऐ मेरे मन दीपक जल

कभी रोऊँ मैं हँस दूँ 
कभी करता इंतजार 
यहीं काँटे यहीं गुल हैं 
यहीं आती है बहार 
मस्ती भरी आँखों में 
कभी बरसते बादल !!.. ऐ मेरे मन दीपक जल

तू जो साथ चले तो 
ये दिल नगमें गाये 
जड़ में जीवन हो 
और पात भी लहरा जाए 
लहरा बुझना ना कभी 
देख मेरा जाये ना बल !!... . ऐ मेरे मन दीपक जल... ''तनु ''

Saturday, November 4, 2017

थकता दीप कहाँ था सोया





थकता दीप कहाँ था सोया ,
सूखी पलक शुष्कता रोया ?
वर्तिका नेह  प्राणपगी थी , ,,
तन भी था अनुराग भिगोया। .. थकता दीप कहाँ था सोया ,

मूक प्राण में व्यथानहीं थी ,
धूम रेख की कथा नहीं थी ! 
प्रणय लौ का प्रेम निवेदन , ,,
लहराती सी वृथा नहीं थी !!

उज्जवल शिखा शिखरिणी, 
मुख म्लान मलिन था धोया। ..... थकता दीप कहाँ था सोया ,

कज्जल कूट धारा जिसने ,
यों तनूनपात वारा जिसने !
तम बवंडर ले आगोश में , ,,
सकल विश्व उजारा जिसने ! 

मयंक भामिनि के अंक के 
ज्यों शशि शिव भाल संजोया। .. थकता दीप कहाँ था सोया ,

तू मौन प्रहरी ज्योति का ,
तू  दृश्य नयन द्युति का !
हर लेता तिमिर हृदयंगम , ,,
तू दानी प्रखर ज्योति का !

जीवन में पलपल जल कर ,, 
तूने प्रकाश पुंज है ढोया .. 
थकता दीप कहाँ था सोया। ... ''तनु ''

Thursday, November 2, 2017

जिंदगी लज्जते ग़म है कुछ और नहीं





जिंदगी लज्जते ग़म है कुछ और नहीं ;
अभी आँख पुरनम है कुछ और नहीं  ! 

मैं अब बहलाऊँ खुद को किस तरह ;
ये अज़ाब से कम है कुछ और नहीं !

दर-ओ-दरीचे  उदास हैं मेरे घर के ;
आज अजीब आलम है कुछ और नहीं  !

मेहर-ए-मह को छू लूँ पर किस तरह ;
सिर्फ कमन्द ही कम है कुछ और नहीं  !

रफ़्ता रफ़्ता रूह गम से आबाद होगी ;
नाम तेरा ही मरहम है कुछ और नहीं !

छान कर काबा बुतखाने की मिटटी ;
खोजता इब्न-ए-आदम है कुछ और नहीं  !.... ''तनु''

जिंदगी लज्जते ग़म है और कुछ नहीं





जिंदगी लज्जते ग़म है और कुछ नहीं :
अभी आँख पुरनम है और कुछ नहीं ! 

मैं अब बहलाऊँ तुझको किस तरह ;
ये अज़ाब से कम है और कुछ नहीं !

दर-ओ-दरीचे  उदास हैं मेरे घर के ;
आज अजीब आलम है और कुछ नहीं !

मेहर-ए-मह को छू लूँ पर किस तरह ;
सिर्फ कमन्द ही कम है और कुछ नहीं !

रफ़्ता रफ़्ता रूह गम से आबाद होगी ;
नाम तेरा ही मरहम है और कुछ नहीं !

छान कर काबा बुतखाने की मिटटी ;
पूजता इब्न-ए -आदम और कुछ नहीं !.... ''तनु''