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Wednesday, January 10, 2018

जाड़ा




ओस बिछाये चदरिया,  सूरज ढूँढे ताप ,
बटुक बना संसार है, जाड़ा करता जाप !

Sunday, January 7, 2018

मन के हाथी घोड़े


मन के हाथी घोड़े दौड़े सूखे गीले पथ में ;
बादलों के पीछे छुप गए भानु अपने रथ में !
ये सलोनी साँझ लिए फिर गहरायेगी रजनी , ,,
पहन सितारों की चुनरिया चन्दा डाले नथ में !!.... ''तनु''

चित्र के मित्र बहुत अभिन्न हैं 
मित्र ही मित्र भिन्न भिन्न हैं 
आभार आदरणीय मित्र को 
आप भी हमारे अभिन्न हैं। .. ''तनु ''

Saturday, January 6, 2018

बेकरार होकर आया जाड़ा



बेकरार होकर आया जाड़ा ;
जाकर धूप को दिया लताड़ा ,
हल्की होकर पसरी अब , ,,
शायद दिया नहीं था भाड़ा !

कितनी खटपट होती झटपट ;
घड़ियाँ भाग रही हैं सरपट ,
आलसियों को पीछे पछाड़ा , ,,
ओढ़ें रज़ाई पढ़ें पहाड़ा !
 बेकरार होकर आया जाड़ा 

कभी कोहरा धूप का दंगल ;
पाला कभी करे अमंगल ,
बीच बीच में मावठ गाढ़ा , ,, 
बहे नाक तो पी लो काढ़ा !
बेकरार होकर आया जाड़ा 

मिली सर्दियाँ मटरगश्तियाँ ;
 धूप की मीठी सरगोशियाँ ,
खूब इसने गर्मी को झाड़ा , ,, 
तार तार कर सबको ताड़ा ! 
बेकरार होकर आया जाड़ा 

 दिन छोटे और रात बड़ी है ;

कहीं कहीं तो बर्फ पड़ी है ,
ठिठुरन ने चमड़ी को फाड़ा ,,,
रंग हो गया बिलकुल पाड़ा !
बेकरार होकर आया जाड़ा ,,, ''तनु ''

Friday, January 5, 2018

तू नहीं, तो ये माहताब कुछ भी नहीं

तू नहीं,  तो  ये माहताब कुछ भी नहीं;
गुल और गुलों के ख़्वाब कुछ भी नहीं !

हूँ उदास, गुम मेरी नज़रों की हँसी ;
तारों से अदब -आदाब कुछ भी नहीं !

इस चमन में कभी गुलों की बहार थी;
है नहीं शाख़  को शादाब कुछ भी नहीं !

रिस गए ज़ख्म दर्द से भी हूँ बेज़ार;
दिल में खूं का सैलाब कुछ भी नहीं ! 

की अश्क़ मोती से बहे बहते ही रहे ;
दिले गौहर की तब-ओ-ताब कुछ भी नहीं !!... ''तनु ''

Thursday, January 4, 2018

कहे जलेबी प्यार ही चाहूँ

कहे जलेबी प्यार ही चाहूँ ;
बदले में आभार न चाहूँ !

मुझको खा तकरार न करना ;
मन की कड़वी दरार भरना ,
मुझसी मिठास रिश्तों में घुले, ,,
आपसी लड़ाई झगड़ा भूले !
बस मीठा  प्रचार ही चाहूँ !!
अलगाव की दीवार न चाहूँ , ,,
बदले में आभार न चाहूँ !

चाहे टेढ़ी मेढ़ी मैं हूँ ;
रंगभरी अलबेली मैं हूँ ,
रस रस देखो अंग समाता , ,,
खट्टे से दूर तक न नाता !
कड़वाहट के घूँट न चाहूँ!!
मैं तो सबसे प्यार जताऊँ , ,,
बदले में आभार न चाहूँ !

लोकप्रिय भारतीय मिठाई ;
इमरती है मेरी माँ जाई ,
और बहुत हैं मीठी चीजें, ,, 
रहते हैं हम बहना भाई 
तन मन को अल्हादित चाहूँ !!
मन पर कोई भार ना चाहूँ , ,,,
बदले में आभार न चाहूँ! ... ''तनु '' 










Monday, January 1, 2018

हर इक जन्म पिछले जन्म का जवाब होता है ;




हर इक जन्म पिछले जन्म का जवाब होता है ;
हर इक जन्म अगले जन्म का ख़्वाब होता है ! 

है किनारा दूर मझधार में है कश्तियाँ ;

हर इक क़दम सोच के रखना जनाब होता है !

लिखी हुई कहीं आपके कर्मों की बही है ;
हर इक जन्म पिछले जन्म का हिसाब होता है !!... ''तनु''