दहकते कुछ पलाश हैं करीब दिल के ; अनजाने से सवाल हैं गरीब दिल के ! कितने पास हो कर भी वो दूर ही रहे ; फ़िराक़ और विसाल हैं नसीब दिल के ! आखिर हम जा न सके उसके रू ब रू ; उलझने और जाल हैं हबीब दिल के ! नामजद किसे हुआ इश्क का तोहफ़ा ; खुशियां और मलाल है शरीक़ दिल के ! चाहत रही मेरी कभी उफ़ुक़ को चूम लूँ ; उरूज़ और जवाल हैं रक़ीब दिल के !.... ''तनु ''
इस जहां में कहीं जो मोतबर है मेरा ; रब तू भी तो है यहीं जहाँ घर है मेरा ! धूप देने वाले तू देता रहा धूप मुझको ; हर जगह तू ही तो मुन्तज़िर है मेरा ! पहुँचूँ कहीं भी मैं तुझसे न बिछड़ूँगा ; तू ही तो हमसफ़र हम नज़र है मेरा !... ''तनु''
आडंबर से मीत विलग हूँ ; कैसे मैं मधुमास बुलाऊँ , मीत , प्रीत में आँसू बहते कतरा कतरा टूटा जाऊँ ! एक बावरी साँझ मिली थी ; पलकों पर ऐसी सँवरी थी , बूँद ओस की कहीं बुझी थी ! नदिया भी तो कहीं रुकी थी, ,, लो पत्ता पत्ता सहम गया है , बिखरा बिखरा बूटा पाऊँ , ,, कतरा कतरा टूटा जाऊँ !.... कैसे मैं मधुमास बुलाऊँ , बुझे दीप तो तम गहरा था ; मनवा में तो ग़म ठहरा था , ,, उठी नहीं डोली अरमानों , जाने किस किस का पहरा था ! सुनाता शून्य पथ विकल था , औ मैं जग को रूठा पाऊँ !... कतरा कतरा टूटा जाऊँ !.... कैसे मैं मधुमास बुलाऊँ , उसके इंतज़ार की घड़ियाँ ; टूट गयी मोती की लड़ियाँ , ,, पल पल होता दर्द सवाया , हँसती बिरहा की सुंदरियाँ , अगन जलन कैसे सहता हूँ , ,, चाँदनिया को झूठा पाऊँ !... कतरा कतरा टूटा जाऊँ !.... कैसे मैं मधुमास बुलाऊँ ,
लिखने वाले हाय रे , क्या क्या तू लिख जाय ; धरती को मूरख बना , माया से नहलाय ! माया से नहलाय ! बर्फ की करे बुवाई ; बहरों से बतियाय, आग की फसल उगाई ! रही ''तनु'' घबराय , जगत तो देखे सपने ! पाथर भी शरमाय , बोल ?? बैठेगी लिखने !! .. ''तनु ''