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Wednesday, January 17, 2018

उड़ती पतंग सा रहा , मनवा बेपरवाह



उड़ती पतंग सा रहा ,   मनवा बेपरवाह ,
कोई भी ना पा सका,  कितनी उसकी थाह !
संयम की है सख्तियाँ, अनहद गीत सुनाय , ,,
ढील ज़रा सी मिली तो, भूला अपनी राह !! .... ''तनु''

अनजान हूँ उस से, पहचान क्यों रखूँ ;




अनजान हूँ उस से, पहचान क्यों रखूँ ;
तारीफ़ करूँ उसकी,  ध्यान क्यों रखूँ !

जानती नीयत, भरोसा नहीं किसी का ;

वो नहीं अपना, उसे मेहमान क्यों रखूँ !

आए जिंदगी में, जायेंगे सभी इक दिन; 
मुकाम नहीं  इतना सामान क्यों रखूँ !

मुस्कुराते  चेहरों की कीमत है बहुत ;
फूल ये मुरझाये ,  गुलदान क्यों रखूँ !

लगता डर उसे जो गुनाहों में डूबता ;
मुझसे तो ख़ता नहीं मीज़ान क्यों खूँ !...'' तनु ''

मन पतंग आहत हुआ , बिखरे मीठे भाव



मन पतंग आहत हुआ ,    बिखरे मीठे भाव ;
बात बात पर दिख रहे,   विषम कँटीले दाव !
खोयी आँखों की शर्म,    शब्द नुकीले बाण , ,, 
होता अब सहना कठिन,  जलते रिसते घाव  !!.... ''तनु ''

Monday, January 15, 2018

दहकते कुछ पलाश हैं करीब दिल के ;



दहकते कुछ पलाश हैं  करीब दिल के ;
अनजाने से सवाल हैं     गरीब दिल के !

कितने पास हो कर भी वो दूर ही रहे ;
 फ़िराक़ और विसाल हैं नसीब दिल के !

आखिर हम जा न सके उसके रू ब रू ;
उलझने और जाल हैं हबीब दिल के !

नामजद किसे हुआ इश्क का तोहफ़ा ;
खुशियां और मलाल है शरीक़ दिल के !

चाहत रही मेरी कभी उफ़ुक़ को चूम लूँ ; 
उरूज़ और जवाल हैं रक़ीब दिल के !.... ''तनु ''

Friday, January 12, 2018

इस जहां में कहीं जो मोतबर है मेरा ;




इस जहां में कहीं जो मोतबर है मेरा ;
रब तू भी तो है यहीं जहाँ घर है मेरा !

धूप देने वाले तू देता रहा धूप मुझको ;
हर जगह तू ही तो मुन्तज़िर है मेरा !

पहुँचूँ कहीं भी मैं तुझसे न बिछड़ूँगा ;
तू ही तो हमसफ़र हम नज़र है मेरा !... ''तनु''

Thursday, January 11, 2018

आडंबर से मीत विलग हूँ ;




आडंबर से मीत विलग हूँ ;
कैसे मैं मधुमास बुलाऊँ ,
मीत , प्रीत में आँसू बहते 
कतरा कतरा टूटा जाऊँ !


एक बावरी साँझ मिली थी ;
पलकों पर ऐसी सँवरी थी ,
बूँद ओस की कहीं बुझी थी !
नदिया भी तो कहीं रुकी थी, ,,
लो पत्ता पत्ता सहम गया है ,
बिखरा बिखरा बूटा पाऊँ  , ,,
कतरा कतरा टूटा जाऊँ !.... कैसे मैं मधुमास बुलाऊँ ,


बुझे दीप तो तम गहरा था ;
मनवा में तो ग़म ठहरा था , ,,
उठी नहीं डोली अरमानों ,
जाने किस किस का पहरा था !
सुनाता शून्य पथ विकल था ,
औ मैं जग को रूठा पाऊँ !... 
कतरा कतरा टूटा जाऊँ !.... कैसे मैं मधुमास बुलाऊँ ,


उसके इंतज़ार की घड़ियाँ ;
टूट गयी मोती की लड़ियाँ , ,,
पल पल होता दर्द सवाया , 
हँसती बिरहा की सुंदरियाँ , 
अगन जलन कैसे सहता हूँ , ,,
चाँदनिया को झूठा पाऊँ !... 
कतरा कतरा टूटा जाऊँ !.... कैसे मैं मधुमास बुलाऊँ ,
... ''तनु ''



  

लिखने वाले हाय रे , क्या क्या तू लिख जाय ;





लिखने वाले हाय रे , क्या क्या तू लिख जाय ;
धरती को मूरख बना ,       माया से नहलाय !
माया से नहलाय !          बर्फ की करे बुवाई ;
बहरों से बतियाय,    आग की फसल उगाई !
रही ''तनु'' घबराय ,     जगत तो देखे सपने !
पाथर भी शरमाय ,   बोल ?? बैठेगी  लिखने !! .. ''तनु ''