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Monday, February 5, 2018


शाम ही से हुआ खफा देखो ;
शाम ही से दुआ दवा देखो !!

दिल जलाया अभी अभी उसने ;
दूर ही से रवा दवा देखो !!

रंग फूलों सा  ''संग'' ले चले ;
उलझन में रहा बागबा देखो !!

शाख फूलों भरी कहाँ ज़ख़्मी ;
खार सब ही हुए महरबा देखो !!

शाम ढलती रही बिना उसके ;
आज ऐसा सितम सहा देखो !!

क्यों धुँआ दे रहे जिस्म जां भी ;
आतिश है रग रग में रवा देखो !!

कौन चला ये अभी अभी आगे ;
ज़िंद खोकर रहा जवा देखो !!,,,,तनूजा ''तनु ''

रुत आई पतझड़ की




रुत आई पतझड़ की कानन में पात निपात रहे; 


फिर वसंत के आगमन वन में साज निवाज रहे!
  
पिक बैनो ने गूँज लगाई तन उल्लासित हो गया; 
  
प्रकृति संग जन जन के मन में राज विराज रहे !!.... तनुजा ''तनु ''

Friday, February 2, 2018

तुम सर्वज्ञ ;


जान कर अनजान बन कहाँ हो तुम सर्वज्ञ ;
भूल कर सबके मर्म को रहे न अब मर्मज्ञ !
छली गयी बेटी टूटे रिश्ते खोया धर्म , ,,
जाने किस भुलावे में तुम बन गये स्थितप्रज्ञ !!... ''तनु''

कौन बाज


कौन बाज आये गर बाज ही न हो ;
कौन बाज़ आये गर राज़ ही न हो !
बाज़ ही रहते हैं और बाज़ नहीं आते , ,,
फिर कौन बात करे जब बाज़ ही न हो !!... ''तनु''

पल पल मेरे साथ है

पल पल मेरे साथ है ,   चलती है इतराय ,
झूठ मूठ हँसती कभी, कभी देती रुलाय !
कभी देती रुलाय, मौज में अपनी रहती ,
इत उत ढूँढूँ जाय ,   भावना में है बहती !
बरसों से है साथ ,  कहे नदिया ये  कल कल !
जितना दुरूह पाथ ,     मेरे साथ है पल पल !!.. ''तनु''

नसीब तेरा सवाल ऐसा था !



रोटियों का सवाल ऐसा था !
नसीब तेरा सवाल ऐसा था !!

गोल चपटी नक्श लिए फूली !
सोँधी  रोटी सवाल ऐसा था !!..

ठंढी या जली, पकी कच्ची ही हो !
पतले मोटों का सवाल ऐसा था !!

रोटी तो हाल हर चाहिए साहब !
नेक ही था पर ख़याल ऐसा था !!

हाथ की किस लकीर में खोया !
कौड़ियों का सवाल ऐसा था !!

रोटियाँ जब सिकी सिकती गयी !
मौजियों का जवाल ऐसा था !!

परत परतें जली मिली मौला  ! 

था नहीं पर इक़बाल ऐसा था !!

नोचती थी निगाह भूखी थी 
 बोटियों का सवाल ऐसा था .. ''तनु''





Thursday, February 1, 2018

सूखा तन रोटियों का सवाल ऐसा था !



सूखा तन रोटियों का सवाल ऐसा था !
 बेदम हूँ रोटियों का सवाल ऐसा था !!

सब ने अपने अपने तरीके से सोचा !
आखिर रोटियों का सवाल ऐसा था !!

जली परत ही रोटी की मिल जाए मौला  !
 बोटियाँ नहीं, रोटियों का सवाल ऐसा था !!

कितनी हथेलियों की घिसी लकीरें !
नहीं था किस्मत का सवाल ऐसा था !!

गोल होकर फूली पेट सभी का भरा 
छदाम कौड़ियों का सवाल ऐसा था !!

कभी उन्माद में भी खोयी न रोटियाँ !
सिकती रोटियों का सवाल ऐसा था !!

रोटी तो रोटी है साहब हर हाल चाहिए !
ठंढी-बासी रोटियों का सवाल ऐसा था !!... ''तनु''