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Monday, July 9, 2018

पौन सुने न मौन कहे, अब तो सब कुछ गौण !!

चुप रह कर न सताइये,  तोड़ दीजिये मौन !
मन की गहरी पीर को,  आज सहेगा कौन !!
मन बेकल को कल नहीं, बिन कहे भी अधीर, ,,
पौन सुने न मौन कहे, अब तो सब कुछ गौण !!... ''तनु'' 

मन की आँट मिटाय के, रखना सबसे मेल !!

मन के आँगन उग गयी,  ऐसी विषमय बेल !
जिव्हा कड़वी हो गयी ,    कहन हुए बेमेल !!
आये कुछ लेकर नहीं,  जाना खाली हाथ , ,,,
मन की आँट मिटाय के,   रखना सबसे मेल !! .. ''तनु''

Friday, July 6, 2018

नदिया

हर हर गंगे !!
बहते रहना नियति है,बहने की है सोच !
देखो मेरी उर्मियाँ,  कितना इनमें लोच !!
गोते लगाते मुझमें, पतित पावनी मान, ,,
मैं मैली प्रदूषित हूँ,      यही है एक दोच !! .... ''तनु''

मैं नदिया हूँ प्यार की , मीठा मेरा प्यार !
इक तिनके को पकड़ के , बिखेर दूँ बहार !!
मैं चल पडूँ ढलान पर,   निरंतर है प्रवाह  , ,,,
मत बनाना बाढ़ मुझे,   दो ऐसा उपहार !!... ''तनु''

पाप कितने धोय रही,  शेष रह गयी रेत !
देख नीरवता उसकी,   सहती दर्द समेत !!
नदिया जीवन दायिनी, अब सूखी बिन नीर, 
उर्वरता खोने लगी ,    खतरे का संकेत !! ... ''तनु''

कल कल बहती जो कभी,  दौड़ हज़ारों मील
नदी समाप्त हो रही ,          नाले में तब्दील !
शब्द सुरों के खो गए, मौनी नीरव होय ,
कभी भयावह रूप धर , जग को लेती लील !!... ''तनु''

सारी नदिया बिक चुकी,  बिक गए हैं पहाड़ !
हर ज़ुबान चुप हो गयी,    आँखें तकती ताड़ !!  
सोतों का नीर तरसा,    बूँद बूँद को मार , ,,,
रोयगी सूखी नदिया ,  जब सूखेंगे हाड़ !! ... ''तनु''

इक महज़बीं को प्यारा सा ये इनाम अच्छा लगा !

इक महज़बीं को प्यारा सा ये इनाम अच्छा लगा !
जनम जनम की चाहतों का ये पयाम अच्छा लगा !!

तृषित धरती परअब हरियाली है बिखरी हुई, 

छू लिया अंतस धरा, तेरा अंजाम अच्छा लगा !!

भड़कने वाले शरर है खिलने वाले फूल हैं ,

खूबसूरत बानगी थी ये इब्तिसाम अच्छा लगा !! 

 था कहीं पर खोजने पर ना मिला सुकून - ए -दिल , 

 कौन जाने खो गया दिल है गुमनाम अच्छा लगा !!

 ना-सुबूर दिल ''तनु'' शायद भटकती है रूह भी,  

इंतज़ार था  उम्मीद तेरा,   इंतिक़ाम अच्छा लगा !! 

इंतिक़ाम =बदला 
इब्तिसाम =परिहास

Thursday, July 5, 2018



जात पुरानी हो गयी,      हूनर है बलवान !
राह अपनी है चुननी,   कर लो जी संज्ञान !!

अपने अपने कर्म हैं,     अपनी अपनी जात !
मनुज मनुज समान सभी,  मानवता है जात !!


अपने अपने कर्म का,      नहीं जात पर जोर !
कुछ तख़्त पर राज करे,   बन बैठे सिरमौर !!.. ''तनु''

कब चलता है जोर !

आलसी मन के सम्मुख,  कब चलता है जोर ! 
बिना कर्म किये मुख में.  जामुन जाय न बोर !!

अपने अपने कर्म का,        नहीं जात पर जोर ! 

कुछ तख़्त पर राज करे,    कुछ उलझे हैं क्षौर !!

बलात हठात सब यहाँ,         होता है बरजोर !

निबल कमजोर का भला, कब चलता है जोर  !!

सत्तामद में झूमते,         बन बैठे सिरमौर !

कुछ रईस बलवान हैं , कब चलता है जोर  !!

लावारिस से घूमते, कहते उनको ढोर !

बूचड़खाने जा रहे, कब चलता है जोर ।।

दूषित जल दूषित हवा,   दुनिया में चहुँओर !

कौन सँवारेगा भला,     कब चलता है जोर ।।

भूले  पैर पसारना,     लम्बी ना  है सोर ! 
महँगाई के दौर में,  कब चलता है जोर ।।

कुछ रईस बलवान हैं  , कब चलता है जोर !

बने सियासतदान फिर, छीने मुँह का कौर !!

बातें ये कुछ ख़ास हैं,    कब चलता है जोर !

जऱ जोरू ज़मीन पर,   अजी कीजिये गौर !! 

आँधी पानी बाढ़ हो,    कब चलता है जोर ! 

पल में ही बह जायगा,  फूस ठिकाना ठौर !!... ''तनु''

Wednesday, July 4, 2018

मन मैला है

मन मैला है मेघ का,  उपजा मन की प्यास,

बरसे बिन क्यों जा रहे, लगा नीर की आस ! 

लगा नीर की आस.    पुकारे वन हरियाली; 

तोड़ो अब उपवास,      पुकारे चातक माली !!

गोरी देखे राह,  पास  इक ना  धेला है ,

मीठी मन की चाह , मेघ का मन मैला है !! .. ''तनु''