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Wednesday, July 18, 2018


बधाइयाँ थाने घनी,   म्हापर राखो नेह !
 आसीसाँ  मिंह वरसे,  चालाँ थांँ री गेह !!.. 'तनु'

बंजर हूँ, कहीं कुछ उपजता ही नहीं,

बंजर हूँ,  कहीं  कुछ उपजता ही नहीं, 
क्या लिखूँ ए दिल कुछ जँचता ही नहीं !

गयी बहार जुल्फ ने खुश्बुएँ खोयी,
 जिंदगी एकसा कुछ रहता ही नहीं !

एक उम्मीद थी दिल के मुआमले में,
पर टूट गया है कुछ सहता ही नहीं !

घर जला की कितनी फैली रौशनी,
रात रौशन दिन कुछ कहता ही नहीं !

गले कौन लगाये नहीं कोई राजदाँ ,
आबशार सा कहीं कुछ बहता ही नहीं !... ''तनु''

Tuesday, July 17, 2018

मदद की आस है अभी, बाढ़ से जो तबाह !

मदद की आस है अभी,   बाढ़ से जो तबाह !
आसमानी आफत की ,  ऐसी पड़ी निगाह !!

ऐसी पड़ी निगाह,      जीवन बिखरा देखिये !
पानी पानी गाँव,       अभी न निथरा देखिये !! 

बीमारी चहुँओर,   चाहती साँस अदद की !

कुनबा ढाणी ढोर ,  लगाये आस मदद की !!... ''तनु''

कर्म हवाला दे दिया !.

पहले सूखा भेज के,  भेजी फिर है बाढ़ !
फोड़ ठीकरा भाग का, दुबले को आषाढ़ !! 

दुबले को आषाढ़,     कर्म हवाला दे दिया !
किसान है बर्बाद,   सुकून सभी  छीन लिया !! 

सबका भरते पेट,   रहें किसान क्यों भूखे !
शासन है निश्चेत,   मेघ ज्यों जल बिन सूखे !! .. ''तनु''

सूखे ने घेर पहले,


सूखे ने घेर पहले,       भेजी फिर है बाढ़ !
फोड़ ठीकरा भाग का, दुबले को आषाढ़ !!

दुबले को आषाढ़,   दे दिया कर्म हवाला !.
किसान है बर्बाद,   छीना मुख का निवाला !!

सबका भरते पेट,    रहें किसान क्यों भूखे !
शासन है निश्चेत ,   मेघ ज्यों जल बिन सूखे !!.. ''तनु''

आस लगाये मदद की, जो बाढ़ से तबाह !

आस लगाये मदद की,   जो बाढ़ से तबाह !
आसमानी आफत की ,  ऐसी पड़ी निगाह!!

ऐसी पड़ी निगाह,      जीवन बिखरा देखिये !
पानी पानी गाँव,       अभी न निथरा देखिये!! 

बीमारी चहुँओर,    हर जीवन चाहे साँस! 

कुनबा ढाणी ढोर ,  मदद की लगाये आस!!... ''तनु''

Monday, July 16, 2018

विरह

आँसू की नदिया बहे,नैन बन गए झील 
तन से रूठा प्यार है,नींद खो गयी मील 

करूँ नहीं श्रृंगार मैं, मुरझाया है डील !
जाग जाग नैना जले , जलते क्यों कंदील !!

एक सुरमयी साँझ को, लिया तमस ने लील !
रात चाँदनी सो गयी,   दूर बज रही जील !!... 'तनु'