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Thursday, August 2, 2018

विरह वेदना कह रही

विरह वेदना कह रही, सजन नहीं है पास !
पवन की अंगड़ाइयाँ,   बूँदों  का परिहास !
डरे जिया कल ना पड़े,  बहे नयन भी नीर, ...
बिजुरी की मनमानियाँ, जलद का अट्टहास !!... ''तनु''
                              

आज गगन ने थाल में


आज गगन ने थाल में,   बादल दिये परोस !
सूरज की नादानियाँ,   रह गयी मन मसोस !!

आज गगन ने थाल में,  बादल दिये परोस !
मंद मंद डोले पवन,   उड़ती कितने कोस !!

आज गगन ने थाल में,  बादल दिये परोस !
मंद मंद खेले पवन,       देखे नहीं पड़ोस !!

आज गगन के थाल में, बादल करते रोष !
बिजुरी को संग लेकर,   करते हैं उद्घोष !!

पवन की अंगड़ाइयाँ,   बूँदों  का परिहास !
बिजुरी की मनमानियाँ, जलद का अट्टहास !!... ''तनु''

सावन आया झूल ले

सावन आया झूल ले ,  छोड़ दुखों की डोर !
ऊँची ऊँची पींग ले ,    आसमान की ओर !!  

अँगना में झूले डले ,    सावन का है शोर !
ओढ़ नवेली गा रही,     प्रेम प्रीत की सोर !!... ''तनु''

बहुमंजिला इमारतें ,

बहुमंजिला इमारतें , संग लिफ्ट के झूल !
हुए पेड़ गायब जहाँ,  आँगन भी जा भूल !!

बाढ़ ले सावन सहता, बहते मानव ढोर !
जब बगीचा नहीं रहा,  क्या गायेंगे मोर !!

जाय कहाँ हम झूलने,  ख़तम हुए रिवाज !

मददगार ही लूटता,    खोय गयी परवाज !!.. ''तनु''

प्रेम हिंडोल झूल लूँ ,  पाऊँ हिय अनुराग !
ये मनमोहा  मोहना, श्याम हमारा भाग !!

Wednesday, August 1, 2018

नीम तले झूला नहीं,

नीम तले झूला नहीं,  टूट गयी है डोर !
सखियाँ हैं ससुराल में , दूर गए चित चोर !!

हिय में चुभती फाँस है, नीति की नहीं डोर !
कौन झुलाये झूलना,   नहीं किसी पर जोर !!

नहीं झूलना साँच का,  नहीं प्रीत की डोर !
कैसे मैं झूलूँ  सखी,      भूले नंदकिशोर !!.. ''तनु''
प्यारी तूँ नारायणी, म्हारा मन ने मोह !
लेखन में माँ शारदे, कदी विछोह न होय !!... ''तनु''