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Monday, June 8, 2020

मंदिर मंदिर अब भी आना

मंदिर मंदिर अब भी आना
पलकें खोलूँ तब भी आना
आज खुलेंगे तेरे दर जब
आँखें मुंदूँ तब भी आना

ख़ुद को खोना भूल गया हूँ
ख़ुद को पाना भूल गया हूँ
साँसें ही जब खोयी पायी
तुझको जपना भूल गया हूँ
गरम धरा उबले सागर पर
पावन सा बन जब भी आना
पलकें खोलूँ तब भी आना
आँखें मुंदूँ तब भी आना .. मंदिर मंदिर अब भी आना

शाम सवेरे दीप जलालूँ

तेरी ही तो राह निहारूँ
आशा मेरी तू आयेगा
छलिया कान्हा तुझे बुला लूँ
लेकर वंशी की तानें तू
यमुना तट पर जब भी आना
पलकें खोलूँ तब भी आना
आँखें मुंदूँ तब भी आना.. मंदिर मंदिर अब भी आना

लाल गुहर ना लगे अनूठे

पता नहीं तू कब तक रूठे
जान गया सारा जहान है
दुनिया के सुख दुख हैं झूठे
मेरी नैया पार लगा दो
शरणागत हूँ जब भी आना
पलकें खोलूँ तब भी आना
आँखें मुंदूँ तब भी आना .. मंदिर मंदिर अब भी आना ... 'तनु'


Saturday, June 6, 2020

तू हमारा,


तू हमारा, हम तेरे हमसे रिश्ता भगवन मत तोड़ !!
परेशाँ हैं हम अपनी इनायत रख नयन मत मोड़!!
कभी की हों गलतियाँ तो भुला दे ऐ ऊपर वाले , ,,
मेरे मालिक तू अपनी मुहब्बत का चलन मत छोड़ !! ... ''तनु''

Friday, June 5, 2020

कुदरत से इंसान है

कुदरत से इंसान है , मत करो खिलवाड़ !
हरियाली नाहीं उगे, सीमेंट के पहाड़ !!

कुदरत की तासीर को , समझ अरे इंसान !
हरियाली है जब तलक , खिले रहे उद्यान !!

जलवायु प्रदूषित है, सूखे कुंँए तालाब !
शुद्ध हवा पानी बिना, कैसे पूरे ख्वाब !!

जंगल विटप उजाड़ के, उपजता घना क्लेश !
बच ही पाएँ फिर कहीं, मानव के अवशेष !!

मानव तेरी गलतियाँ , धरती धारे धीर !!
ज्यों ज्यों प्रदूषण बढ़ता, बढ़ती जाती पीर!! ... 'तनु'


Wednesday, June 3, 2020

खोज कर के पलाश को,

खोज कर के पलाश को, पाये फागुन रंग!
मन सावन सा झूमता, आज पिया के संग!!

चाहे हों दिन चार ही, पाय पिया का संग!
हर दिन तू होली मना,  रंग पिया के रंग!!

लाल पलाश को खोजता,  बेलगाम मन दौड़!
संसार  के ऋतु चक्र को,चाह सके ना मोड़!!

पाँखुरि देख पलाश की, मनवा उठी हिलोर
मन सावन सा झूमता, बागों नाचे मोर

मन पलाश की पाँखरी, भाव बहकते चोर
रंग बिना जीवन नहीं, ज्यों सावन बिन मोर... ''तनु''

अब आस नहीं कोई संत मिले,

अब आस नहीं कोई संत मिले,
विश्वास नहीं कोई कंत मिले !

अंगार लिए जीवन बगिया,
फिर नहीं कोई बसंत मिले !

मधुमय अभिलाषा की क्यारी में,
सुमन सलोने ना कभी खिले !

मुस्कान खो गयी अधरों की
कभी जीत सदा दिगंत मिले !.. ''तनु''



Tuesday, June 2, 2020

काश !


जो था खोया  काश मिलता !
रिसता जख़म काश सिलता !!

तन सुलगता ख़ूं उबलता  !
दिल अंगार  काश उगलता   !!

तकते तकते आँखें  पत्थर  
पथ से वो काश निकलता !!

कैसे ख्वाब बुने जिंदगी !
सपनें में वो काश मचलता !!

हसरतें घुटती रहीं जी की!
बेक़ाबू मन काश फिसलता !!

होंठ चुप से लरजते रहे !
कुछ जुबाँ से काश निकलता !!

आँख समझी ना आँसू देखे!
वो सितमगर काश पिघलता !!

गहरे सागर सा मन मेरा !
फिर ''तनु'' काश उछलता !!.... ''तनु''

जो था खोया मिला ही नहीं


जो था खोया मिला ही नहीं !
रिसता जख़म सिला ही नहीं!!

सुलगे तन या के ख़ूं उबले!
दिल अंगार उगला ही नहीं!!

राह तकते उम्मीद टूटी!
रास्ते से वो निकला ही नहीं !!

ख्वाब बुनती रही जिंदगी !
सपन बिखर सम्भला ही नहीं !!

हसरतें घुटती रहीं जी की!
बेक़ाबू मन फिसला ही नहीं!!

होंठ चुप चुप लरजते रहे!
कुछ जुबाँ से निकला ही नहीं!!

आँख समझी ना आँसू देखे!
वो सितमगर पिघला ही नहीं!!

है समंदर सा मन मेरा !
गहरा ''तनु'' उथला ही नहीं !!.... ''तनु''