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Thursday, November 26, 2020

ख़ाक में दस्तार मिली , इज़्जत मटियामेट

 

 ख़ाक में दस्तार मिली, इज़्जत मटियामेट !
बिकती जाती जिंदगी,   भरते खाली पेट !!

रहे पेंच दस्तार के,  दिली अज़ीज़ वक़ार !
सर ने सजदा ना किया,  सजी रही दस्तार !!

हिफ़ाज़त हुई न सर की, लुटे दरो दीवार !
बिक जाये ये जिंदगी,  बिके नहीं दस्तार !!

किस फितरत में खो गये,  लोगों के किरदार !
बात सभी झूठी रही,        नकली थी दस्तार !!

 आज सभी इंसान के,     सस्ते है किरदार !
 झूठ दिखावा शान में,   बिक जाती दस्तार !!

जली बिटिया की खुशियाँ,  क़दम तले दस्तार !
किस फितरत में लुट गये,    सस्ते से किरदार !!.... ''तनु''

Wednesday, November 25, 2020

हर तरकीब लड़ाना छोड़ा !


हर तरकीब लड़ाना छोड़ा !
जोखिम और उठाना छोड़ा!!

हल ना होगी यही हुआ फिर !
हमने बात बढ़ाना छोड़ा !!

होती हर दम उसकी पूरी !
नूरे नज़र झुकाना छोड़ा !!

कडवी बात दवा के जैसी !
लो जी को समझाना छोड़ा !!

तूफां, बिजली, इंद्रचाप में !
मन को अब उलझाना छोड़ा!!

शोख़ लिबासों को छोड़ा था !
अब हमने फकीराना छोड़ा !!

''तनु'' मटमैला दिल देखा तो !
उसको ग़ज़ल सुनाना छोड़ा !!... 'तनु'




Tuesday, November 10, 2020

बढ के सीने से लगाऊँ कैसे


बढ के सीने से लगाऊँ कैसे !
वो मेरा है पर, मनाऊँ कैसे !!

तार टूटा सुर सजते ही नहीं !
टूटती हैं रगें सहलाऊँ कैसे !!

रोग इक बार में ही कट जाये !
दौरे हाज़िर ग़म भुलाऊँ कैसे !!

ये हवाएँ फिर नमी ले आईं है !
तुझको मैं सब से बचाऊँ कैसे !!

जाने क्यों आज ये लहू रिसता है !
ये ज़ख़्म अपना दिखाऊँ कैसे !!

मैं 'तनु' सार और अयस भी कहाँ !
उस पारस से बदन सटाऊँ कैसे !!.... ''तनु''

Thursday, October 22, 2020

ग़ज़ल गीत ओ शायरी,

 

ग़ज़ल गीत ओ शायरी, पल पल मेरी चाह!
प्रेम जगाये बाँसुरी , विहग गगन की राह!!

विहग गगन की राह, कल कल गा रही नदिया!
झरनों का संगीत, मगन फूलों की सखियाँ !!

तितली भौंरे मीत , नाचता सारा अंचल!
छेड़े मन का मीत, शायरी गीत ओ ग़ज़ल!!... ''तनु''

Tuesday, October 20, 2020

समता सुंदर भाव है

 

समता सुंदर भाव है, अहंकार दें त्याग!
भेद भाव हैं नर्क के, अवदारित से भाग!!

अवदारित से भाग, साधना की बलिहारी !
सेवा का है धाम, पावन कल्याणकारी!!

कहती 'तनु' समझाय, रखें सबसे ही एका !
अहंकार दें त्याग, सुंदर भाव है समता!!.... ''तनु''

माया मन की चाहना,



माया मन की चाहना, भटक जाय इंसान !
गर विवेक खोया हुआ, लिपटा रहे अज्ञान!!

लिपटा रहे अज्ञान, भ्रमित ही जीवन खोता !
सोयी राह प्रशस्त, रात दिन खाता गोता !!

कहती 'तनु' समझाय, झूठ का जीवन भाया ?
रहते मन भरमाय, कौन घर रहती माया ?... ''तनु''



Saturday, October 17, 2020

होंठ हर हाल तो सिया होता,

घूँट गम के कभी पिये होते 

होंठ हर हाल तो सिये होते !


कोई इतना भी तो न था मुश्किल, 

दर्द सहकर कभी जिये होते !


लफ्ज़ दिल के आर पार होते हैं,

सोच समझ कर कह लिये होते !


 जो चुभी बात तीर के जैसी, 

 देर बाद कुछ कह  लिये होते 


वक्त ये नहीं किनारा करने का,

साथ कभी तो बह लिये होते !


जिंदगी छोटी, शिकायतें लम्बी,

 बिन कहे भी तो रह लिये होते !


दर किनार करते ख़ुशी अपनी,

मुझको अपना कह लिये होते !!


मिल बैठ 'तनु' कही सुनी होती,

दर्द के पहाड़ ढह लिये होते !..... ''तनु''