''दो टप्पी '' आज रो काल कदी नी ''आवै ''……। मरया पाछे लाडू ''खावै'' ………
सुप्रभात चन्दा तुम तो सदा के चोर , एक अदालत जब लगती भोर ! छुप जाते ले अपने सब संगी , ओढनी तारों की ले नई नकोर
सूर्य तपस्वी चन्द्र हठी हैं ,
बातें चन्द्र की बड़ी बड़ी हैं.
पखवाड़े पखवाड़े बदलता रूप,
रजनी सितारों से रूठी पड़ी है।
अपने रथ पर आये दिनकर , राह से हटी रजनी छुपकर। सात घोड़े हैं सात रंग के , आई रौशनी सफ़ेद छनकर।
भारती के भास्कर दिनकर ,
किरणों से सज उतरे दिवाकर।
मध्यान्ह का गर्वीला तेज ,
संध्या सिंदूरी निमंत्रित सुधाकर। निशा बिखराये पात पर मोती , सूरज बुहारे पात पर मोती। सोचो जो ये धरा न होती , आते नहीं पात पर मोती। निशिनाथ रहे अपने चातुर्य , हरते रहे उदधि का गाम्भीर्य। धारा मगन मनमौजी सजनी, रही संवार अपना ही माधुर्य।
जो तलवार के धनी हैं वो जंग जीतें तलवार से ,
जो प्यार के धनी हैं वो ज़माना लूटें प्यार से !
हैं मिटटी के घरौंदे फिर भी झूठ का करें सौदा ,
जीतता वही है जो जीते जग सच्चे व्यवहार से !! ''तनु ''
Thursday, April 17, 2014
विवेचना का ??????? अधिकार किसे है … कर्तव्य बोझ उठाते जाओ ……… सुखों का संसार किसे है ?? अभावों में जीते जाओ.……… सारे दर्द हमारे . और , सारी मनमानी नेता की....... है पतली खाल हमारी। और मोटी चमड़ी नेता की ,,,,,,,,, ''तनु''