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Friday, April 18, 2014

''दो टप्पी ''
आज रो काल
कदी नी 
''आवै ''……। 
मरया पाछे 
लाडू
''खावै''  ……… 
सुप्रभात 



चन्दा तुम तो  सदा के चोर ,
एक अदालत जब लगती भोर !
छुप जाते ले अपने सब संगी ,
ओढनी तारों की ले नई नकोर 



सूर्य तपस्वी चन्द्र हठी हैं ,

बातें चन्द्र की बड़ी बड़ी हैं.

पखवाड़े पखवाड़े बदलता रूप, 

रजनी सितारों से रूठी पड़ी  है। 


अपने रथ पर आये दिनकर ,

राह से हटी रजनी छुपकर। 

सात घोड़े हैं सात रंग के ,

आई रौशनी सफ़ेद छनकर। 




भारती  के भास्कर दिनकर ,

किरणों से सज उतरे दिवाकर। 

मध्यान्ह का गर्वीला तेज ,

संध्या सिंदूरी निमंत्रित सुधाकर। 



निशा बिखराये पात पर मोती ,

सूरज  बुहारे पात पर मोती।  

सोचो जो ये धरा न होती ,

आते नहीं पात पर मोती। 


निशिनाथ रहे अपने चातुर्य ,

हरते रहे उदधि का गाम्भीर्य। 

धारा मगन मनमौजी सजनी, 

रही संवार अपना ही माधुर्य। 

















जो तलवार के धनी  हैं वो जंग जीतें तलवार से , 

जो प्यार के धनी हैं वो ज़माना लूटें प्यार से ! 

हैं मिटटी के घरौंदे फिर भी झूठ का करें सौदा ,

जीतता वही है जो जीते जग सच्चे व्यवहार से !! ''तनु ''


Thursday, April 17, 2014

 विवेचना का ???????


अधिकार किसे है … 



कर्तव्य बोझ उठाते जाओ ……… 



सुखों का संसार किसे है ??



अभावों में जीते जाओ.……… 



सारे दर्द हमारे . 



और ,



सारी मनमानी नेता की....... 



है पतली खाल हमारी।



और 


मोटी चमड़ी नेता की ,,,,,,,,, ''तनु''