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Jyotish
Kaavya
Wednesday, December 31, 2014
अनमनी सी ही सही दुआएँ तो हैं
दूर ही से ही सही सदाएँ तो हैं
तुम खास हो मेरे लिए खास ही रहोगे
रूठा रूठा सा ही सही भाई तो है
मेहरबाँ है शजर के शाख पे गुल कायम हैं
मुस्कान तुम्हारी से बनी ग़ज़ल !!! न पूछ …''तनु ''
Tuesday, December 30, 2014
आखर मोती
झरती है लेखनी
कहे कहानी
सिंदूर सजा
मिले धरा गगन
साँझ सबेरे
स्याह उफ़क़
फ़साने फ़िराक़ से
रोई नर्गिस
अम्बरारंभ
अलिखित लिखित
ईश चितेरा
क्षिति उन्वान
हर पल सुन्दर
मन उलझा
नया सितारा
दो हजार पंद्रह
नभ किनारा
नया सितारा
दो हजार पंद्रह
नभ किनारा
क्षितिज पार
अनहद बजता
सुने न कोई
Monday, December 29, 2014
आइए नव वर्ष में गाँव की सैर हो जाये
कुछ हायकु :-
तिर्यक वाट
चरमर मोजड़ी
नीरव शाम
ग्राम मुखिया
पर्दानशीन नारी
महत्वहीन
ग्रामीण श्राप
अभिशप्त जीवन
बंधुआ जन
पुरखे बन
शाखामृग प्रसन्न
ग्राम जीवन
गाँव को चल
दृश्य से दृश्यांतर
शहर डेरा
आज का गाँव
गौविहीन गोकुल
नकली दूध / खरीदे दूध
गूगल छाँव
देश रहा बदल
पहुँच गाँव
दादा की छड़ी
लालटेन कहती
कोने में खड़ी
गीता का पाठ
दिनचर्या दादी की
चश्मा लगाए
गाँव बाहर
बागरियों की बस्ती
कुँआ अलग
ठसक न्यारी
ग्रामीण परिधान
जँचते जन
सूखते कुँए
प्रदूषण प्रभाव / ग्लोबल वार्मिंग से
जलती धरा
जाड़े में गाँव
धुँआता कुहासा सा
जगे अलाव
ससुर आये
खांस के ठसक के
लिहाज बहू
वर्षा निमित्त
अंधविश्वासी ग्राम
ढूँढे टोटके … ''तनु ''
देहरी सजी
वन्दनवार बंधे
लौटे प्रीतम
वर्षा निमित्त
अंधविश्वासी जन
ढूँढे टोटके
गूगल छाँव
देश रहा बदल
पहुँच गाँव
Sunday, December 28, 2014
चंचल छाया
भूत भी भविष्य भी
ढूॅंढता फिर / दर भीतर / दर बदर … ''तनु ''
पीपल छाँव
भागवत पुराण
पंडित बाँचे
तिर्यक वाट
चरमर मोजड़ी
नीरव शाम
ससुर आये
खांस के ठसक के
लिहाज बहू
ठसक न्यारी
ग्रामीण परिधान
जँचते जन
गाँव बाहर
बागरियों की बस्ती
कुँआ अलग
जाड़े में गाँव
धुँआता कुहासा सा
जगे अलाव
चश्मा लगाए
गुन गुन पढ़ती
दादीजी मेरी
दादा की छड़ी
लालटेन कहती
कोने में खड़ी
गीता का पाठ
दिनचर्या दादी की
चश्मा लगाए
ग्रामीण श्राप
अभिशप्त जीवन
बंधुआ जन
ग्राम मुखिया
पर्दानशीन नारी
महत्वहीन
गाँव की बोली
संस्कारित जीवन
मीठी निबोली
आज का गाँव
गौविहीन गोकुल
नकली दूध / खरीदे दूध
गाँव को चल
दृश्य से दृश्यांतर
शहर डेरा
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