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Sunday, July 2, 2017






अपने लोग बिठाय के, जात संग गठजोड़,
रंग मंच सजा कर के,      पाते कुर्सी होड़ !
पाते कुर्सी होड़,    धज्जियाँ अनुशासन की !  
देश धर्म को तोड़,  हीनाचरण,  पालन की!!
फिर सत्ता पद पा कर पूरे करते सपने !
रेवडी  बँटती अपनों और खाते अपने !!.... ''तनु ''

Wednesday, June 28, 2017



बारहा


क्यों बारहा हम ही हम मरे हैं ?
अजी  जुदाई से कब उबरे हैं ?

सुनो दिल से न तुम दूर होना ,
वक्त बड़ा ये सख़्त गुजरे है !

न डूब इस कदर गम में अपने , 
आइना देखे तो खुद ही डरे है ! 

अभी कश्ती से दूर है किनारा ,
कहाँ है सहारा  जो तू उतरे है ?

यही जिंदगी यहीं पर अता कर ,
इसी छलावे में  ये मनवा जरे है!

इसी लिए हम बावले हो गए हैं ,
के चाँद के ख़ाब दिल से परे हैं !

कयामत अभी नहीं आने वाली !
जब्त कर 'तनु' क्यों रो के मरे है !!...''तनु ''

Monday, June 26, 2017



ईद की ईदी !


चाहतों के दामनों में बरसती है ईद की ईदी !
हो गयी इबादत पूरी चाहूँ  मैं मुरीद की ईदी !!

नफरतें हो लाख पर मुहब्बतों  की खुश्बुएँ हो !
 बंदगी और दुआओं से बड़ी तेरी दीद की ईदी !!

कीजिये कायम सख़ावत औ ज़कात जिंदगी में !
मिलती नहीं  फिर शिकायत औ ताक़ीद की ईदी !!

चाँद का दीदार कर और दे  इमदाद गरीबों को !
माहे रमजान में तुझे मिल जायेगी तौफ़ीक़ की ईदी !! 

प्यास शदीद रख दरिया का रुख कर ऐ नेकदिल !
इल्म की इमदाद ले  लो फन और अदीब की ईदी !!,''तनु ''

Sunday, June 25, 2017





यामा मनमौजी हुई , जम्हाई आह्वान !
नींद में ये मगन हुई, भूली अपना मान!!
भूली अपना मान, लगन अब सोने की है ,
 है चाँदी का चाँद,       रात तो सोने सी है !
 रोज़ निभाए चाकरी ये हुआ क्यों रामा ???
  जम्हाई आह्वान !   हुई मनमौजी यामा !!....''तनु ''

Saturday, June 24, 2017




|| 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में बालगीत'||


चली चींटिया, पीछे - पीछे ,
पीछे - पीछे,  अंडे लेकर !

अंडे लेकर , बारिश होगी !
बारिश होगी ,तालाब भरें !!

तालाब भरें,   नभ गरजेंगे !
नभ गरजेंगे,चली चींटियाँ !!...''तनु ''



!!! नव-कुंडलिया !!!
---- राज-छंद ----

लेखनी 

धर्म लेखनी, पूजनीय तू,
पूजनीय तू,   प्रीत हृदय दे !

 प्रीत हृदय दे,  मन आहत है,
 मन आहत है ,बोझ न बन तू !

बोझ न बन तू,  दूर विषय कर  ,
 दूर विषय कर , धर्म लेखनी !!...''तनु ''


लेखनी 

लिखना दीपक लेखनी, कहना जी की बात !
सहलाना मरहम लगा ,  थाल केसरी भात !!
थाल केसरी भात !! नभ से ज़मी पर पटके !
दे व्यंग्य की घात !!     गिरे खजूर पर लटके !
माता का है रूप ,     इससे मत बुरा लिखना !
सत्य की लिखें धूप ,   जगरते दीपक लिखना !!