अपनी गलती छुपा रहे हैं, मानवता की फूटी गगरी ,
बेबस और दुखी रोते हैं, और रो रही सारी नगरी !
हुआ रुग्ण रुग्णालय कैसे, भोग रहे हैं सब अन्जाम, ,,
धन दौलत के हैं ये लोभी, सस्ती जन की पीड़ा सगरी !! .. ''तनु''
अपनी गलती छुपा रहे हैं, सस्ती जन की पीड़ा सगरी
अपनी गलती छुपा रहे हैं, सस्ती जन की पीड़ा सगरी
बेबस और दुखी रोते हैं, मानवता की फूटी गगरी ,
हुआ रुग्ण रुग्णालय कैसे, भोग रहे हैं सब अन्जाम, ,,
धन दौलत के हैं ये लोभी, और रो रही सारी नगरी !! .. ''तनु''