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Saturday, August 12, 2017

पीड़ा सगरी !






अपनी गलती छुपा रहे हैं, मानवता की फूटी गगरी ,
बेबस और दुखी रोते हैं,   और रो रही सारी नगरी ! 
हुआ रुग्ण रुग्णालय कैसे, भोग रहे हैं सब अन्जाम, ,,
धन दौलत के हैं ये लोभी, सस्ती जन की पीड़ा सगरी !! .. ''तनु''



अपनी गलती छुपा रहे हैं, सस्ती जन की पीड़ा सगरी 
बेबस और दुखी रोते हैं,   मानवता की फूटी गगरी ,
हुआ रुग्ण रुग्णालय कैसे, भोग रहे हैं सब अन्जाम, ,,
धन दौलत के हैं ये लोभी, और रो रही सारी नगरी  !! .. ''तनु''

''भादवा री  झड़ी लागे '' 


बावरा !!
पत्ता झूमे 
हवा गावे है 
गीत !!
मिली ने 
स्वागत करां 
चालो 
निभावां रीत !

पलंग तोड़े है 
सूरज जी 
घणी वरसार्ई 
लाय !!
लो मनमानी
वरसात री 
छम से दई 
बुझाय !!


समी साँझ 
से देखो तो 
कसुमल वयो
अकास ,
बन कानन
नंदन भयो 
हुई गी
साता निरात 
झूम उठ्यो 
संसार !!

संदेसो
पीहू पीहू पाछे 
त्राहि त्राहि मची 
अंधारो जाणे पड्यो 
वई गी ज्यूँ रात  
जगत में 
संकट पड़ग्या
 जीव !!
5  
काजर आंजी ने 
आँख्यां में  
वादरा दौड्या 
आवे
थोड़ीक सी देर में 
सूखी धरती री 
प्यास बुझावै 
वई जायआँगणा  
धुळ्या थका 
साफ़ सुथरा !!


सूरज भई ने पूछो
आजकल क्यों 
सरमावे !!!
कदि कदि  तो
लाली वना 
वि आगास में 
आवे ,... 
केवे, ...  
कद से उठ्यो हूँ,... 
झूठ बोली ने 
आपणा से 
वतरावे !!
बात सुणी ने 
सूरज री 
जाता थका 
वादरा 
पाछा आवे ने 
पर्दो नाखी जावे 
सूरज पे 
म्हे वरसाँगा
असो के है ,,,
जाओ थे ,, 
आराम करो
भादवा री झड़ी लागे , .. ''तनु''

Friday, August 11, 2017

कहाँ नहीं तू 

केशव कहाँ नहीं है विश्वास कीजिये !
माधव जहाँ नहीं है निष्कास कीजिये !! 

टूटे हुए पतवार हैं माझी भी नहीं !
कैसे ही होगी पूरी ये आस कीजिये !!

ढूँढा कहाँ कहाँ न नज़र तू आ रहा !
कण कण रचा बसा तेरा वास कीजिये !!

माया रची सजा जहां तेरा उजास ले !
इक पल उदास इक पल उल्लास कीजिये !!

रास !!! रास आये ऐसी रसमय रात दे !
सबके साथ ही है वो आभास कीजिये  !!... ''तनु ''





          लौह नगर में खो गयी,  परमपिता की भेंट !
         रोज प्लास्टिक खाय के, गाय भर रही पेट !!
         गाय भर रही पेट ,  नहीं ये भोजन उसका !
         फूल गया है पेट ,     पेट भरती जो सबका !!
         हम सबकी माँ गाय, खा कर कचरा  सो गयी !
         उसकी करुण पुकार,  लौह नगर में खो गयी !!,,.. ''तनु ''
       

स्वच्छ रख आँगन धुला


पाप 



करनी जो जैसी करे,     वैसा ही फल पाय
मन मंदिर इन्साफ का , सदा करे है न्याय !
सदा करे है न्याय !   कभी पाप छुपता नही !
शीश चढ़ करे बोल ,     चाहे मनु बोले नहीं !!
रहे सभी समुझाय ,  भली रख अपनी भरनी !
फल मीठा क्या खाय,  जिसकी बुरी है करनी !! 


धुला ना कोई दूध का ,  सबमें पाप समाय !
छोटे बड़े दुष्कर्म में,    अनचाहे  फँस जाय !!
अनचाहे फँस जाय,   कभी ये होय सूझते !
अनजाने हो जाय ,       कैसे ये राह बूझते !!
करो ईश को याद,  स्वच्छ कर आँगन धुला !
मत कर तू फरियाद, रख मन का द्वार खुला  !!,,, तनु 


Wednesday, August 9, 2017

जीव रो दरद






हर जीव रो दरद  कुण भोग सके है !
हर रूँख रा आँसू कुण रोक सके है !!

धूल धुँआ से पट्यो है यो आसमान !
सब करे मनमानी कुण रोक सके है !

अच्छी आदतां तो धीरे धीरे पनपे है !
झट पड़े बुरी वीने कुण रोक सके है !!

वत्तो वद्यो प्रदूषण बीमारी भी फैल री !
निजरां चुरावा से कुण रोक सके है !!

रूँख तो रूँख हर जीव ने है  दुःख !
पग आपणा काटे कुण रोक सके है !!

खुद से वे शुरु हर काम यो जाणो !
'तनु' साथ मिली चालां कुण रोक सके है !!... ''तनु'!
गुड़ का गोबर कर गए, अपनी ढप्प बजाय ! 
तूती की आवाज में ,    अपना राग सुनाय !! 
अपना राग सुनाय !!  ठंढी छछिया फूँकते, 
जला दूध का रोय,      कर्ज दूध का भूलते ! 
कर सिँह दृष्टिपात,      जिंदगी देखिये मुड़, 
सारे फ़र्ज़ निभाय , जिंदगी शहद और गुड़ !! ,, ''तनु ''

जिंदगी गुड़ गोबर की , अपनी ढप्प बजाय ! 
तूती की आवाज में ,    अपना राग सुनाय !! 
अपना राग सुनाय !!  ठंढी छछिया फूँकते, 
जला दूध का रोय,      कर्ज दूध का भूलते ! 
कर सिँह दृष्टिपात,   करते रहिये  बंदगी 
सारे फ़र्ज़ निभाय ,शहद और गुड़ जिंदगी  !! ,, ''तनु ''