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Wednesday, September 6, 2017




एक मोती , ,,


दिनकर का रथ औ मस्तानी चाल ;
नियति ने रंग दिए हैं भोर के गाल !      
घड़ों उंडेली खुशियों की गुलाल , ,,
लेकर  सिंदूर कभी बादल मलाल!!.. ''तनु''


एक मोती , ,,,



किरण किरण मर गयी लो धूप का अनंग है ;
बूँद-बूँद भगीरथी महिमा अनूप गा मृदंग है !
दीप की कई शिखाएँ लिए आराधन है मेरा , ,, 
पूरित स्नेह , लुब्ध हूँ, मुग्ध हुआ मनवा पतंग है !! .. ''तनु''




एक मोती , .. 


ओ मेरे अडिग विश्वास के साखी ;
 पिंजर बसना रे सुकृति के पाखी !
मन की मलिनता शहद सी होती , ,,,
मत  फँसना रे लालच में माखी !!.. ''तनु''

एक मोती , ... 


कहीं भीतर तक झर चले हर सिंगार ;
मधुमय सुधियों की सम्मोहिनी बयार !
कैसा आलोकित प्लवन मन बींध गया , ,,, 
आ ही गयी लौट कर फिर जाती बहार !!... ''तनु''

एक मोती , ... 


दिनकर की सुधियों में घाम के शूल ;
रजनी की बगिया में   तारों के फूल !
सजाये   हैं  संध्या ने  दीयों के थाल , ,,
चाँद और सूरज चले संध्या के कूल !!... 'तनु'

एक मोती , ... 



रजनी बेचारी का खोय गया मान है ,
बादलों का उत्सव ,   गर्जना गान है !
बिजुरी चमकती पवन के आघात चले , ,,
रजनी की नींद में हुआ व्यवधान है !!,,.. 'तनु'

Monday, September 4, 2017

मंज़िल







अपना मकसूद औ माबूद भूला ,
 ये तो मंज़िल तेरी नहीं थी !!

उमीदों का मुंतहा और को बनाया,
 ये तो मंज़िल तेरी नहीं थी !!

कैसे रब का नाशुक्रा हुआ तू ,
ये तो मंज़िल तेरी नहीं थी !!

बहकावे और मक्र में उलझा,
 ये तो मंज़िल तेरी नहीं थी !!

नफ़्स की ख्वाहिशात औ चाहतें ,
 ये तो मंज़िल तेरी नहीं थी !!... ''तनु ''