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Monday, August 4, 2014

सबसे कीमती होती इज्जत    होती ये अनमोल ,
राह चलते कभी न बिकने देना नहीं ये बड़ा बोल !
आलू, कांदा, टमाटर, चाँदी, प्लेटिनम  या गोल्ड ,
कुर्बानी मत देना इज्जत की बनकर के यूँ बोल्ड !!.... ''तनु ''
सागर गोद
बुला रही है तुझे
थकन मिटा

नहीं खेलूंगा
सूरज पाने चला
आकाश छू लूँ


चित्र ....
नेह  सुनीता जी की वाल से साभार


Friday, August 1, 2014

नी केवे ,
हिन्दू के मुसलमान। 
चाँद दूज रो !!!

चाँद रुपारो!!! 
पण बदले रूप ,
पूनम अमावस। 

तारो हवेर रो,
जासूसी करे!!! 
चाँद बिचारा री  .... "तनु "


दल बादल
दलदल बदले
जीव दलन

उत्तराखंड
खंड खंड खंडित
दण्डित जीव

लालिम संध्या
निमंत्रित रजनी
स्वप्न सुंदरी। ''तनु ''
जुस्तजू के पंख हैं  पर वो  तितली नहीं होती!!!
जुस्तजू एक गीत है पर वो बुलबुल नहीं होती!!!
भावों के पंख, मन के गीत, या एक कविता है!
जुस्तजू एक आशा है  पर वो रंगीन नहीं होती!…… ''तनु ''

है ख्वाहिश रक्ताभ हो  बन पलाश दहकूँ ,
मैं बुलबुल बन बाग़ की डाली डाली चहकूँ,
तितली बन उडूं फूलों के बिस्तर सोऊँ !!!
कभी फूल बन जाऊं खुशबू बिखेरूं महकूँ। … 'तनु'


राम बन!!! राम बन कर, राम की तलाश कर,
'वन अंगारा' बन 'जरा' जला कर पलाश कर,
एक ही तो जीवन मिला न खो  न यूँ गँवा रे!!!
विष पी 'महेश' बन कर जीवन दे न लाश कर..... "तनु "