भटक कर भुक्ति, भक्ति के बीच भक्त का भूला हूँ धर्म, अटक कर पाप, पुण्य के बीच जीव का भूला हूँ कर्म , प्रश्न सदा रहता है कायम बीच देव, गुरु ओ मनुज के ??? देव गुरु पूज्य हैं !!! देव मनुज बीच घूंघट का भूला हूँ मर्म ...तनुजा ''तनु ''
मन माने न मने हार हार गई तोहे बिसराये ? मन माने मानिनी बन मन कैसे झुठलाए ?? तोहरे संग प्रीत भई तू ही मौको भायो है……… नयनन में तू ही मन में तू ही मन कौ ? समुझाए ''तनु ''
गरीबों का आटा अलग और बाटी भी अलग, गरीबों से नाता अलग और बाती भी अलग , महराब रोशनदान कंगूरों की नक्काशी जिनसे !!! उनकी बेटी भी अलग ठिकाना थाती भी अलग………''तनु ''
Saturday, June 28, 2014
बदरा तुम दूर ही थे और दूर हुए , हम और मजबूर हुए और दूर हुए, कितने जतन ??? अब जल की खातिर बता भी दो क्यों इतने मगरूर हुए ???"तनु "
Friday, June 27, 2014
मकान के बाहर भी हैं कई मकां जिंदगी में , मुकाम के बाद भी हैं कई मकां जिंदगी में , कायम वही है जिसका के दिल में हो मुकाम !!! मुकाम को न हो उसके कई मकां जिंदगी में ……तनुजा ''तनु ''
फूलों की बगिया हो , प्यारी सी क्यारी हो ,
खुले खुले आँगन हो , छोटी सी बारी हो,
अमृत चाँदनी झाँके घर के वातायन से !!!
भीनी महक हो साथ सजनी सी प्यारी हो……तनुजा "तनु "
सूरज के घर के मोती चाँद ये सितारे हैं , विभावरी ने संजोये कैसे ये नज़ारे हैं ! प्रकृति की माया अनुपम ये ईश्वर ने बनाई !!! मानव न उजाड़े इनको सुन्दर ये सहारे हैं ……तनुजा "तनु"