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Tuesday, September 2, 2014



 ये जो चाँद है न
 ये भी सोचता है.…  
 मेरा कोई साथी नहीं,,,,
 रोशनी !!!
 भी मेरी नहीं,,,
 ये तारे !!!
 भी मेरे नहीं,,,,, 
 याचना !!!
 की भी तो किससे ?
 सूरज से ??
 न ये चाँद ,,
 न ये सूरज,,
 न ये तारे,, 
 कोई नहीं होता किसी का !!!
 सब अपना अपना काम करते हैं ,,
 सब नहीं सोते !!!… ''तनु''
काट दिए सब..  वृक्ष हमने जिनसे पानी मिलता था ,
जिन्हे देख कर हमारे इस दिल का फूल खिलता था !
भुगत रहे हैं अब हम अतिवृष्टि अनावृष्टि दृष्टि दृष्टि ,
विधाता तू कहाँ है जो कभी मंदिर मंदिर मिलता था !!''तनु ''
 प्रीत निशानी,
 धरा की ले बावरा !!!
 रक्ताभ रहा ,,,,,,,,,,,''तनु ''


चित्र ; शास्त्री जी की वाल से साभार


 बरसाने की ,
 वृषभानु दुलारी,
 मोहन प्यारी !!!

राधे राधे री,
मन माने मने न !!!
कृष्ण प्यारी री,.....

गोविन्द माधौ!!!
राधे राधे रटत,
हिय हुलसै,.... ''तनु '' 

बचपन सबका मीठी यादों की धरोहर है ,
कहीं मोगरा है फूला कहीं खुशबू अगर है,
बीत न जाए सभी कहते पर अब है कहाँ ???
चन्दामामा की नींद है तमचुर की सहर है। ''तनु ''

हम यूँ ही थे घबराये हुए होंठ थे बंद कि बात हो कैसे
मुँह से न कही गयी बात वो इशारों में समझ गए 
तकदीर का साथ था सुलझे हुए थे लटों के पेंचो ख़म भी 
बच के निकल रहे थे वो बहारों में उलझ गए। ''तनु ''

Monday, September 1, 2014

गुजरात से सीखो ----- कोई व्यापार करने का ढंग ,
बनारसी पान सा होता------ नहीं पान का कोई रंग ,
हम तो रंग में अपने----------  सभी को रंग देते हैं !
देखकर दबा लेता उंगलियां रह जाता है ज़माना दंग  !!''तनु ''