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Sunday, September 7, 2014

त्रिवेणी

जानती हूँ टूटे  छप्पर को सहारा कौन देगा
जानती हूँ जिद्दी मौसम को कौन बदलेगा

लो फिर बदले हैं बादल बूंदों में 
विसर्जन .... 

कुरूपता क्यों ? जगत में व्याप्त है,,, भगवान के नाम पर !
नीचता पर ही पहुँच जाता नर है,,,,,, भगवान के धाम पर !!
मजबूर होकर सोचते होंगे गजानन ,,,अब न आउँगा यहाँ !
क्या क्या नहीं है कर रहा इंसा   ये,,, भगवान के नाम पर !!

अगले बरस भी देखना है क्या यह सब मुझको यहाँ ???
 बक्क्ष दे ए मानव अब कभी न आऊँ,,, मैं यहां ,,,मैं यहाँ !!! 
 छोड़ दे !!! लेकर चला तेरी बुराई और तेरे दिल का मैल ,,,,,,,
 बहा दूंगा तेरे कलुष !!! तू वहीँ का वहीँ,,, मैं वहां और तू यहाँ ,,,''तनु ''


















लघु गुरु, गुरुता भूली गए  ,
गुरु को दिया है आसन !
गुरु लघु ,लघुतर हो गए, 
छा गए  सकल जहान !!''तनु ''
ज्ञान सोच से,------- है ----- या सोच से है ज्ञान !
बुद्धिहीन धर्मभ्रष्ट हैं,----- पहने धवल परिधान !
ग्रहण करो और बांटो शायद यही रह गया ध्यान !
कहाँ जाना और  कहाँ  नहीं भूल गए अभिज्ञान !!… ''तनु ''

Saturday, September 6, 2014




धर्मपथ पर चली हूँ जहाँ फूलों का कालीन बिछता है !!
जीवन और मृत्यु के बीच सचमुच एक अटूट रिश्ता है  
सुनसान रात मैं सोऊँ और सोयी  ही गर रह जाऊं!!!
मौत मुझे डराती है, दर्द औ डर का एक घाव रिसता है !…''तनु ''







मृत्यु जाने कहाँ है रहती नहीं जानते वह  है ''अनिकेत ''
देह सांस का कैसा बसेरा  नहीं जानते वह है ''अनिकेत''
हम क्या जाने  कौन हैं मृत्यु और कहाँ  वह रहती है ???
जीवन मृत्यु रिश्ता अटूट नहीं जानते दोनों हैं ''अनिकेत''…'' तनु ''


कल के गुरु जो पदपूजित,  आज उठाते बर्तन झूठे,
गुरु जो ईश्वर समक्ष थे , क्यों उनसे ईश्वर हैं रूठे !
एक दिन का राजा बना,  दे दो उनको सम्मान !!
फिर चाहे पुलिस कर्मियों की मार क्यों न उन पर टूटे,,,,,,,,,,, ''तनु ''