धुँआ … धर्म में ये कैसी --धुँए की बास कूपमण्डूकों को कुँए की आस अगर तगर ना भावे इनको राजनीति बनी जुए की ख़ास गुज़रा लम्हा यूँ , धुँआ धुँआ हुआ, गम और ख़ुशी का था छुआ हुआ ! वक्त आज़ाद पंछी उड़ा उड़ गया, हर कोई कहे ---- यहाँ जुआ हुआ !!!''तनु'' जादू की पोटली में--- धुँए का बम छोटी सी ओखली में ,कुँए का भ्रम मन पर हो काबू इच्छाशक्ति प्रबल है अंगद का पांव हिलादे जो हो दम क्या जानों धुँए में--- क्या छुपा छुपा खंज़र है ------ सीने में जो घुपा घुपा
ये जलते मंजर, विधवा की चीखें !!!
न बोला ना सुना सब चुपा चुपा
Friday, November 7, 2014
मोगरे की कलियाँ जो लगी झूलने गजरे में , कचनार रूठ गया औ चला फूलने मगरे में !! कैसे मनाऊँ !!! रूठी चम्पा, जूही, चमेली को , रूठ गया गुलाब लगी चाँदनी ढुलने सगरे में !! ''तनु ''
Thursday, November 6, 2014
घट्टी ने पीसा
अनाज ढेर सारा
कुटुंब पाल
कोल्हू का बैल
निकाले तिल तेल
निखारे काया
रहट जल
क्यारियों को सींचता
तृप्त धरणी
अनवरत
खींच रहे रहट
जल सींचन
पुरखे बन
शाखामृग प्रसन्न
आये न कल
खांच खनकी
निरंतर चलती
घमक घट्टी
खवां खाँच bangles up to shoulders
ओखली करे
धान कुटाई सारी
छिलका गुम
Wednesday, November 5, 2014
ओढायी थी रात ने धरा को मोती की चादर , ऊषा लाई प्रभात समेट ली सूरज ने सादर ! बिखेर समेटना बंध खुलना जीवन संग ये होता !!! देखो तो सूरज ही सभी को खुशियाँ देता आकर ...''तनु ''
सितारों में चमक रही, हँसते आकाश की ! धरती हँस हँसती रही, बिखेरती आस सी !!... ''तनु ''
सिर्फ लालटेन का नहीं ज़िक्र कहो क्या न थी ?? चिमनी की फ़िक्र.... बत्ती वाला स्टोव्ह वो दमघोंटू घासलेटी सन्नाटा … पम्प भरो जलाओ वो भर्र भर्र भर्र भर्राटा .... नहीं हुआ विग्रह हाँ !!!.... तो मैं नानी हूँ इन सारी वस्तुओं का हाँ हुआ संग्रह कहानी हूँ .... ''तनु ''