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Saturday, February 15, 2014

जुगल बंदी





कहते हैं जुगल बंदी में तीसरा वाह वाह करता है
कभी वो  मुस्कुराता है तो कभी वो आह भरता है
चाहिए दाद  देने वाले भी इस जमाने में सबको 
तभी तो मंच पर जा कोई कोई शहंशाह बनता है। ……तनुजा  ''तनु ''

बुहारूँ






 मैं गर झूठा हूँ तो बुहारूँ अपने झूठ को,
 कल आयेंगे  पात हरे सूखे हुए ठूँठ को !
 साँच की आँच बहारें ले आएँगी जग में , ,,,
 कहलाऊँ नीलकंठ पीकर कालकूट को !!.. ''तनु''

सत्य




एक फूँक से सत्य को उड़ा दोगे तुम,
ग़लतफ़हमी कि खुद को दग़ा दोगे तुम।
ये राख के नीचे दबी एक चिंगारी है ,
बुझ पाएगी कैसे ?? सत्य को समझोगे तुम .... ''तनु''

Wednesday, February 12, 2014

काग़ज़ की चकरी



काग़ज़ की 
 चकरी का चक्कर,
चले हवा से बेहतर
बेहतर ,
जब चलती हवा लगाता.
 चक्कर ,
पे चक्कर..
रंग बिरंगा कई रंगों में ..
उलझता उलझाता,
अटकता अटकाता,
भटकता भटकाता,
मन बच्चों का ..
रुक रुक   जाते बच्चे .
देख    निरखते बच्चे
कैसे घूमा  ? कैसे घूमता ?
 कैसे चलता ?
ये कागज़ का चक्कर ?
  जैसे हवा चलाती इसको .
वैसे चलता जीवन .
तेज़ हवा में     खुश हो घूमता ,
रूकती हवा    रुक जाता,
घूमता तो ख़ुशी है देता  ……
 रुकता तो रुलाता ,
सुख दुःख,
 दोनों  मानव के…
 आँगन …
 आते जाते रहते ,
 दोनों की  है रचना करता  …
 ऊपर वाला दाता। ......................  तनुजा  'तनु'     

नाम न दो




हमने देखी है स्पोर्ट्स सेलिब्रिटी  की बिकाउ कीमत..
खेल को खेल ही रहने दो कोई नाम न दो... 
खेल कोई अभिनय नहीं ,
खेल नौटंकी नहीं .. 
एक जज़बा है जो हर दिल बहा करता है ,
न ये बिकता है न बाज़ार में नीलाम ही हो पाता है .
खेल बिकाउ नहीं ये रूह से महसूस करो ,
खेल को खेल ही रहने दो कोई नाम न दो ......''तनु''

Tuesday, February 11, 2014

ऐसे चलना है






बन दीपक अब जलना है
तुम्हे तो ऐसे चलना है।


चट्टानों पर नींद कहाँ है ?
फूलों वाली सेज कहाँ है ?
पर्वत अटल है लावा दिल में ,
चैन कहाँ किसी मंज़िल में ,
शीतल सुगंध हो बहना है ,
तुम्हे तो ऐसे चलना है।

कठिन राह है मंज़िल दूर ?
कंटक पत्थर हैं भरपूर ?
लालच करके छाँव दरख्त की
कभी रुक न जाना तुम ,
संकल्पित हो लक्ष्य ठान कर
अब तो आगे बढ़ना हैं 
तुम्हे तो ऐसे चलना है।

फूल हरषाये मन भरमाये  ?
आँधी पतझड़  रोके भटकाए ?
पथिक हो पथ से न डिगना ,
दीया बन सबको राह दिखाना ,
बन दीपक अब जलना है
तुम्हे तो ऐसे चलना है।               तनुजा ''तनु''   03 -07 -1972


Thursday, February 6, 2014

बसंती बयार





बसंती बयार 

बसंती बयार ,

लो आई बहार।
  धरा  हंसी हंस दी यूं,
उपासना पर्व  !
उत्तरायण सूर्य !!
जाड़े की  ठिठुरन,
 ख़त्म हुई,
नई ,
अंगड़ाई ले।
प्रकृति दे रही सन्देश।
 देखो !
 पतझड़ बीता ,
फूटे शिशु कोंपल !
कूकी कोयल !!
बौरे आम महक बहक ,
 हल्दी चना ,
  सरसों गेहूं ,
 श्रृंगारित भू !
 कर वंदन !!
चरण छू !!!  
 बसंती बयार 
लो आई  बहार   15 -2 -1978