Labels

Thursday, February 27, 2014

दिल की बात




ये तो दिल की बात है,
चेहरा कोई खास है !
हवा बयां कर देती है,
कोई तो आसपास है!!

न कुछ कहने का है,
 न कुछ सुनने का है!
 कुछ न दरम्यां रहता है,
 राज कई खुल जाते है!!
 
खुशबू  कोई उड़ जाती है,
हलका सा मन हो जाता है!
पाँव में पायल बजती है,
सुर होंठों पर सजते हैं!!

शहनाई कहीं बजती है,
 तारों की बारात सजती है!
हम उनके दिल में रहते हैं,
वो हमारे दिल में रहते हैं!!................ 12 11 1979  तनुजा  ''तनु ''

दर्द का आगाज़





दर्द का आगाज़  न ढूँढ ,
आशिकी में ताज न ढूँढ !
मुहब्बत तो हर दिल में जिन्दा है,
मुमताज़ को कब्र में न ढूँढ !!


दीवाने तू पत्थर न खा,
पत्थर को सजा तू बुत बना !
जिस्म में जज्बात ढूँढ ,
बुत में आवाज़ न  ढूँढ !!


मेरी ही तो कहानी है,
आँसुओं की ज़ुबानी है !
दिल में है तूफान ग़ुम,
समंदर में आँसू  न ढूँढ!!


ये दिल की  लगी है,
अंगूठी का नगीना नहीं है !
सब कुछ तो बयां कर दिया तुझे,
अब कुछ भी न राज़ ढूँढ !!....................24  09 1984 . तनुजा ''तनु''


  

Tuesday, February 25, 2014

बेचारगी




पड़ोस में कुण ?
वीने नी  मालम.......
पण ,
फेस बुक रा  ,
दोस्त  होन  ने
स्टेटस रा साथ जाणे..........तनुजा ''तनु'' .... 

जरुरत





 जरुरत ??
 में...
 आम भी खास हुए जाते हैं
काम ?
और ,
काम ?
के लिए मुर्दे भी उठाये जाते हैं। ......... 20  01 2010 … तनुजा  'तनु' 

तोहफा






सोमेश को विवाह की पहली वर्षगाँठ पर 



ऐ  ................

चाँद लेकर भागते हो
वो.
वो तो अब तुम्हारा ही है
अरमानों के उमड़ते समंदर में ,
मोती  हैं उजले धुले
जैसे उस चाँद के पीछे
ढेर से सितारे चले
उठा लो मोती सजा दो तारे
हो जाएँ आसमाँ और समंदर रीते
शुभ आशीष है मेरा
जिंदगी प्यारी प्यारी बीते। ...........05  07  2009 ................ तनुजा ''तनु''

Monday, February 24, 2014

रेफरेंडम




दुखी हो भगवान धरती पे रखना चाहे कदम
सोचने का मौका नहीं,  न करने दे रेफरेंडम
न करने दे रेफरेंडम सोचा आ धूम मचा दूँ
जैसी करनी वैसी भरनी का अर्थ समझा दूँ 
सोच कुछ ऐसा भगवन  मन ही मन मुस्काये          
मौसम के बदले रूप में प्रभु ने दर्शन दिखलाये


एक दिन सर्दी एक दिन गर्मी एक दिन बहार
मौसम में ढाला प्रभु ने  मानव का  व्यवहार
मानव का व्यवहार  देख  बहुत हुए अचंभित
उल्टा पुल्टा बेतरतीब देख हुए  बहुत चिंतित
मानव का बदला व्यवहार देखो कैसी आफत ढाये
दिन दिन दूना बदला मौसम  सबको  खूब रुलाये, ,,''तनु''





Sunday, February 23, 2014

ये उदासी





ये उदासी क्यों ?
छोड़ो इसे.…
हँसी  ख़ुशी जीवन जियो ,
कारण  जो भी हो.
हाथों की लकीरों से बात
 करना नहीं उठो , उछलो,
 उछल कर...
आकाश छू लो ,
ये अधिक ऊँचा नहीं  ……………तनुजा ''तनु''