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Thursday, July 3, 2014

इन दिनों टीवी में प्याज ही प्याज भरी है,
जाने ये महंगाई की मारी हुई कहां मरी है ,
गोदाम के गोदाम हो गए हैं अंतर्ध्यान !!!
अभी ही तो मैंने टीवी पे अगरबत्ती करी है। … ''तनु "

सोच बिजली की " कौंध"है ,
फली खुजली की ''कौंच" है 
आ जाये असर पे जो.… 
पड़ी मुंह की "औन्ध"है  !!!"तनु "

Wednesday, July 2, 2014

पहुंच गयी पाती   सृजन की मित्रों के पास !
घच घच ऐसे चर जाते जैसे पौष्टिक घास !!
जैसे पौष्टिक घास करते नित मंथन जुगाली,
लाइक कुछ कॉमेंट्स करते कुछ घूमते खाली,
मेरे मन कामना यही बस मैं लिखती जाऊं !
कोई सुने या ना सुने मैं अपने गीत सुनाऊँ !!''तनु "

Tuesday, July 1, 2014

इंटरनेट प्रेमिका ऐसी.…घंटों करते प्यार,
न जाने कब खिड़की से गुजर जाए बहार !!
गुजर जाए बहार सवेरा कब साँझ होती, 
पिज़्ज़ा बर्गर खाए नसीब न रोटी होती ,
मोटा चश्मा फिगर गँवा बनते बड़े महान !
इंटरनेट की दुनिया है  ये कैसे बचे इंसान ??… "तनु "

व्यथित मन रोती बिलखती गंगा करती है यह गान,
कल - कल इसकी लगती जैसे रोता हो कोई श्वान,
मत कचरा बहाओ इसमें रख लो थोड़ा ध्यान !!!
तन मन दोनों निर्मल करती अपनी ये गंगा महान  ...... ''तनु''


प्याज उगाये थे धरा ने बूंदों की तरह ,
आज उड़  गए प्याज़ वाष्प की तरह ,
अगर ये स्वप्न है तो कोई बात नहीं!!!
खायेगा क्या गरीब भोजन की जगह  ? "तनु "
तेरे नाम की कश्ती चाहिए भव पार उतरने को ,
तूफां के बाद वक्त लगेगा अब साहिल संवरने को , 
तेरे ही सहारे है मझधार में  नैया अटकी है !!!
ग़म की राहें हैं कंटक भरी, दर्द है !!!अब न उबरने को ..''तनु ''...........