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Kaavya
Friday, January 4, 2019
हर बरस की यही ख़ासियत है
जिंदगी तेरी यही अज्जियत है
के सलाम मैं दोनों को करता रहूँ
वल्लाह !! क्या ख़ूब मेरी तबियत है
बीता ऐसे जीवन मेरा कि कहानी लगी,
शूल दुखों के, कभी जिंदगी सुहानी लगी!
छोड़ता जा रहा लमहा मुझे यूँ अकेला, ,,
अब अकेली मुझे मेरी जिंदगानी लगी!!***" तनु"
बहुत सी घातें हैं, इक शक से परे!
बहुत सी बातें हैं, इक हक़ से परे!!
रात अमा की, चाँदनी शायद सो गयी !
और बहुत सी, लतें हैं इकटक से परे!!
शीत की चादर में मुफ़लिसी काँपती !
एक गोशा यहीं है लकदक से परे!!
राह वो पकड़ी कोई होती अगरचे!
तो जीते रिश्तों की झकझक से परे!!
हैं उसी की राहें मंज़िल भी उसी की!
सब कुछ गुज़र जायगा यक-ब-यक से परे !! "तनु"
बहुत सी घातें हैं, इक शक से परे,
बहुत सी बातें हैं,व इक हक़ से परे!
रात अमा की, चाँदनी शायद सो गयी , ,,
और बहुत सी लतें हैं इकटक से परे!!***"तनु"
Wednesday, January 2, 2019
नयन
नयन नयन में डूबते,
नयन चले भव पार !
प्रेम सुधा रस पी रहे,
नयन नयन हो चार !!
नयन नयन में डूबकर
नयन नयन से बात !
प्रेम सुधा रस पी रहे,
नयन नयन में घात !!
प्रेम सुधा रस पी रहे
नयन नयन से रात
नयन नयन में डूब कर
नयन नयन से घात
विगत वर्ष में पा लिया,सुंदरतम उपहार!
विगत वर्ष में पा लिया,सुंदरतम उपहार!
सपन सलोने सज गये,इन नयनों के द्वार!!
इन नयनों के द्वार,आस निधि मन महकाये
तोरण मनहर हार,सृष्टि सुंदर मधुमाये
बजे नगाड़े धूम,चहुँ दिश आगत वर्ष में
मनवा गाये झूम ,जो मिला विगत वर्ष में
मेरा इस शहर में कोई अपना नहीं है!
मेरा इस शहर में कोई अपना नहीं है!
आँखों में मेरे कोई सपना नहीं है !!
सोकर आराम है उठूँगा आराम से!
जिंदगी यूँ मुझे कोई खपना नहीं है!!
देख लो सारे जोगी ये भोगी हुए हैं!
देव अपना मुझे कोई जपना नहीं है!!
तपिश की कसर थोड़ी बाकी रही न रहेगी!
के जला अंगार हूँ कोई तपना नहीं है!!
पलकों से पल पल मैंने काँटे चुने हैं!
"तनु," यूँ ही पलक कोई झपना नहीं है!!
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