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Thursday, October 10, 2019

बहुत चले अभी रुको तुम

ओ मेरी आशा और विश्वास के साथी 
ये है मंज़िल तुम्हारी !

बहुत चले अभी रुको तुम ,
ग़म में जले अभी बुझो तुम !
ज़िन्दगी की राह प्यारी अब नहीं संघर्ष भारी !!

हुए गरल के खाली प्याले,
निगले कितने सूखे निवाले ! 
तुम्हारी परख की आ गयी है आज बारी !!

तूफ़ान देखो शांत हो गया,
सबसे बड़ा इंसान हो गया !
पल में जिसने मिटा दी दुखों की सृष्टि सारी !!

मत कभी विश्वास तोड़ो,
बोलता इतिहास पढ़ लो !
मन की कर न पाया हो कोई भी विध्वंसकारी !!... ''तनु''

Tuesday, October 8, 2019

बसंत बीच अटकी साँस ले

बसंत बीच अटकी साँस ले मुरझा रही है ज़िन्दगी !
काया हड्डियों की बन सिकुड़ती जा रही है ज़िन्दगी !!
बिखरे विनाश और दुख के बीच कहाँ ठिकाना पाऊँ , ,,
प्राणों का गीत अधूरा गह गह  गा रही है ज़िन्दगी !!... ''तनु''

जीवन की छोटी छोटी खुशियों से !


जीवन की छोटी छोटी खुशियों से !
कितने स्नेह-समुन्दर लहराए हैं !!

माटी  के इन नन्हे नन्हे दीपों से !
सारे भवन जगमग जगमगाए हैं !!

अंधियारी अमा की रजनी न्यारी !
दीपक झलमल ज्योति झिलमिलाये है !!

मन मरुथल में नव दीपक भावों के !
भाव प्रवण हो सब कुछ कह पाए हैं !! 

जलते कब तक अब ये क्षीण हो चले !
तारक-शशि, दीपक अब बन पाए हैं !!

चरण देख मुग्ध हुई काव्य वाटिका !
कविता के नव प्रसून खिलखिलाये हैं ! ... ''तनु''


ना यह ऊलजलूल कहानी !


सारी श्रमिक की मेहरबानी !
ना यह ऊलजलूल कहानी !!

किसके कारण ये खुशहाली ,
दिन-दिन बढ़ती वैभव-लाली!
हाथों में श्रमिकों के बल है, ,,
देख हथौड़ा, हँसिया, हल है !!

क्या ख़ुदा की महरबानी है,  

ये तो श्रमिक की कहानी है !
ताकत ये इतिहास बनी है, ,, 
सूखी हड्डी ख़ास बनी है !!

धरती के नीचे का सोना,

सागर का कोई भी कोना !
उन्नति पथ के प्रथम चरण को , ,,
सांस्कृतिक सौंदर्य भवन को !!

श्रमिकों के मन से बनता है, 

श्रमिकों के तन से तनता है !
उसने धरा उर्वर बनायी, ,, 
मंजिल मंजिल ईंट चढ़ाई !!

श्रमिकों के मन की क़ीमत है, 
श्रमिकों के तन की क़ीमत है !
धनिक खेलता  सोना चाँदी, ,,
श्रमिक पहनता  सूती खादी!!

अभाव की दुनिया उसकी है, 

रोटी बिन मुनिया उसकी है !
बहुत बड़ी है दुनिया उसकी 
श्रमधारा है मंज़िल उसकी  !!

कोई इनका देश नहीं है,  

काला गोरा भेष नहीं है !
दुर्दम साहस इनमे होता , ,,
कूड़ा-करकट सोना होता !!

श्रमिक का जीवन सबसे अलग , 
भौगोलिक सीमा नहीं विलग !
लहरों से लेकर अम्बर तक, ,,
हरके दैविक-भौतिक संकट !!

ना यह ऊलजलूल कहानी!
सारी श्रमिक की मेहरबानी!!... ''तनु''

Monday, October 7, 2019

अपना लक्ष्य

अभिनव आदर्शों को अपना लो सीख सीख कर, 
जीवन का गीत मधुर गाओ छोड़ कर्कश स्वर !
कल तक बहुत धुँधला-धुँधला था दूर बहुत दूर, ,,
सार्थक होगा अपना लक्ष्य नव आभा से सँवर !!... ''तनु''

समय-बीन पर आस-विश्वास के स्वर बजे,

समय-बीन पर स्वर आस-विश्वास के बजे,
सुनकर सबल स्वर जगत के जीव सगरे जगे !
अनल में तप समेटो मनु प्राण-साहस अमर, ,,
मरण की चिता पर जवानी यों निखरे सजे !!... 'तनु'

Friday, October 4, 2019

तिल ही तो बोये थे !! हुए ये ताड़ कैसे  ??
दिल  तोड़ने के हुए, जाने जुगाड़ कैसे  ??
भाव विहीन चेहरे  कोशिशें है नाकाम ,
इक बुत के लिए कटे, इतने पहाड़ कैसे ??''तनु ''