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Monday, April 26, 2021

सादगी थी जलाल था, क्या था ?


सादगी थी  जलाल था, क्या था ?
नूर का वो  जमाल था, क्या था ? 

आँख से मय, लब मिसरी, उसके, 
थी नज़ाकत, कमाल था, क्या था ?

बेहिसाब इश्क़ के हिसाबों का,  
लम्हा लम्हा गुलाल था, क्या था ? 

ख़ुश्क प्याले शराब थे साहिब ,
एक आलम मिसाल था, क्या था ? 

पुरसुकूं मंजर था निगाहों में ,
ख़ुद ख़ुदा ही इक़बाल था, क्या था ?  

जाने इतने सवाब कब होंगे ,
दाव था  बहरहाल था, क्या था ?

रंग निखरा रहा जवा दिल का, 
के ज़मीर बेमिसाल था, क्या था ? 

क्यों जियादा जिया ज़ियारत में, 
नेक ही तनु  ख़याल था,  क्या था ? .... ''तनु''

 


Monday, April 19, 2021

मौत न दे तू जीवन दे, स्वस्थ बना नव यौवन दे


 मौत न दे तू जीवन दे, स्वस्थ बना नव यौवन दे !
सुगंधित बयार सुखद पल, उम्र पूरी और स्मरण दे !!
बाग खिले कलियाँ महके, राह आसान जल निर्मल,
पावन चिंतन मन भगवन, वन बगिया नव स्फुरण दे !!.... 'तनु'

Monday, April 5, 2021

यूँ तिनका बनना सहा नहीं जाए

 

बनूँ तिनका सहा नहीं जाए !
खास भी तो रहा नहीं जाए !!

गुल चमन में खिला नया-नया सा !
ख़ुशबू इतनी कहा नहीं जाए !!

मधुकरी तितिल या कि हो भँवरे!
चमन छोड़कर, हा!! नहीं जाए !!

छाँव अंबुआ बयार ठंढी सी !
आम बौर इतरा नहीं जाए !!

ज़लज़ले औ क़हर सहे हमने !
बोल साथी कहा नहीं जाए !!

मौज ही मौज में चली मौजें !
हाँ अकेले बहा नहीं जाए !!

ग़म कुर्बान कर''तनु''हँसी ले ले !
जब ख़ुशी से नहा नहीं जाए !!..... ''तनु''

Saturday, March 27, 2021

बुलाता है अभी तुझको सभी का प्यार होली में


बुलाता है अभी तुझको सभी का प्यार होली में ;
नदी रंगों भरी तू है ना अबकी बार होली मे ?

सभी देखें तुझे जी भर तू देखे सब को जी भर के ;
क्यूँ बिखरे नीड के तिनके, रोया संसार होली में !

नहीं परदेस से लौटा, अगरचे ज़िद तेरी ऐसी ;
न जाने और ही क़र्ज़ का पड़ा है हार होली में !

मयस्सर कर खुशी सबको, कि हर इक आँख रोती है ;
दूर ही गाता रहा रसिया, नहीं श्रृंगार होली में !

कपोलों पे ढले आँसू दिखाते पीर इस दिल की ;
निभाता कौन से तू इश्क का किरदार होली में !

कहीं फाग का गायन कहीं कुल्हड़ में ठंडाई;
बिना तेरे हमें लगते हैं सब बेकार होली में !

मंजीरे ढोल भी फीके रंगों की चमक खोई ;
हुए बदरंग सब चेहरे, तड़फ़ इस बार होली में!

अदा तूने किये अब तक सभी फ़र्ज़ मुहब्बत के;
उभरकर आ गया रंगीं तेरा किरदार होली में !

बहुत फीके हैं 'तनु' अब ये ज़मीनो आसमाँ तुझ बिन ;
गुलाबी कब लगेगा बोल ये संसार होली में! ...... ''तनु''







Saturday, February 27, 2021

चमन चाहती हूँ, गुल भी चाहती हूँ


चमन चाहती हूँ, गुल भी चाहती हूँ ;
ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ सदा चाहती हूँ !

जहाँ आसमान हो ज़मीं की पकड में ;
हो ऐसा खुदाया यहाँ चाहती हूँ !

मजबूरी आए न हिस्से किसी के ;
यही चाहती हूँ जी यहाँ चाहती हूँ !

रग़ों में रहे हमेशा ही रवानी ;
जिस्मो को जोशे-रवां चाहती हूँ !

जहां सिर्फ़ मेरा, रहे मेरा जाना ;
अजी चाहती हूँ, 'तनु' हाँ चाहती हूँ !... ''तनु''




Tuesday, January 19, 2021

आशियाना पंछियों का, उजाड़ने लगी ये हवा


आशियाना पंछियों का, उजाड़ने लगी ये हवा ; 
झाड़ देगी पत्तियों को, नहीं मानेगी ये हवा!

तिनका तिनका जोड़ कर एक घरौंदा था बनाया;
कैसी जाहिल, फिर दिखा गई बदमिज़ाजी ये हवा!

खौफ़ खाये फूल भी हर, खो गया कलियों का नूर;  
तोड़ती क्यों आबरू है, तूफ़ान बनके ये हवा!

रिस रहे नासूर हैं, ज़ख़्म गहरे होते ही गये;
बनती रही नादाँ कैसी, ख़ंज़र चुभाती ये हवा!

यूँ जहर लहू मत उतारिये  की मर जाऊँगा मैं;
ये फिज़ा सहमी हुई, दहशतगर्द दिखती ये हवा!

पहरे आवाज़ों पर क्यों,   जलते क्यों बेकसूर ये; 
बढ़ आती बवंडरों सी, है भूलभुलैया ये हवा!

टिमटिमाती हुई लौ की, जिन्दगी भी क्या जिन्दगी;
बेसहारा महरूम को, बुझा डालेगी ये हवा!

रौँद डाले कुचल डाले ,   न पता ठिकाना पूछती;
छीन लेती  निवाला  ''तनु''  भूखी सियासी ये हवा!!......  ''तनु'' 

Tuesday, January 12, 2021

धूप थोड़ी मिली मुझे आज है

धूप थोड़ी मिली मुझे आज है ;
दर्द ही गीत है दर्द ही साज है !

ग़ाफ़िल हुआ हूँ हाल से अपने;
गा रहा दर्द, जाने क्या राज़ है !

परिंदों ने दाना चुगा ही नहीं;
बात क्या है? सहमा डरा बाज है !

सूख आँसू, नयन हुए सहरा; 
हालत बुरी है कोढ़ में खाज है!

नाम दाने दाने लिखा ही नहीं;
बोलते हैं, किसान का राज है!

तोड़ते पटरियाँ करें जुल्म भी;
ये निराला नया ही अंदाज़ है!

मानो ख़ैरात में 
मिली जिंदगी  ;
फूटते बूँद बुलबुले आज है !

काश डरते 
तुम, न बुरा करते;
नाम ईश्वर लेते गिरती गाज है?

देखते देखते हुआ पत्थर ;
दिल ''तनु'' वही जिस पर नाज़ है!..  
''तनु''