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Tuesday, April 14, 2015

कूजति कोकिल कानन सुन, ----- मगन इक दिल सुनाता है 
कान्ह कान्ह कह कान्ह,  -------- सपन फिर मिल सजाता है !
राधिका भानु सी सजनी , -------- सलोनी साँझ सी सजनी !!!
राधे राधे सुन राधे  , -------------  कमल इक खिल बुलाता है ,.... ''तनु''

Monday, April 13, 2015

तू ही निगहबाँ शान लिए बैठा हूँ ;
तुझसे रब्त   पनाह लिए बैठा हूँ !

दीन की जानिब  रुख कीजिये ;
मैं तस्सवुर को सम्हाल बैठा हूँ !

एहसास तकानों के सलामत रहें ;
मैं तुझी को रफ़ीक मान बैठा हूँ !

साज़ में पर्दे की खनक बाकी रहे ; 
मैं साँसों को निगाह दिए बैठा हूँ !

वक्त सदा ही रहा इम्तहानों का ; 
हर माहौल में अज़ान लिए बैठा हूँ !

Saturday, April 11, 2015



रास रस धारा संग, बह गए कन्हाई हैं ! 
साध रस राधा संग, सध गए कन्हाई हैं !! 
बरसाने की राधा,  बरसा साध आधी है ,
कित है तू और बता, कित गए कन्हाई हैं !!! …'' तनु ''


झंझावातों के थपेड़े,           झुके मन की आशाओं के झाड़ !
नन्हा अंकुर पकड़े ज़मीं,           कोई आतंकी ना दे उखाड !
टूटे ना हिम्मत माने ना हार आँधी और तूफानों से !!!
आ गये किरणों के पाखी,          रुके गम के अंधेरों के लाड ! 
झंझावातों के थपेड़े,           झुके मन की आशाओं के झाड़ !
नन्हा अंकुर पकड़े ज़मीं,           कोई आतंकी ना दे उखाड !
टूटे ना हिम्मत माने ना हार आँधी और तूफानों से !!!
आ गये किरणों के पाखी,  ना होगा गम ना तिमिर के लाड !


Monday, April 6, 2015


              तपस्वी हैं वे जो बिन मुखौटों के जिए जाते हैं , 
              जो संत हैं सदा एक सा जीवन जिए जाते है !
              मुखौटों का नकली जीवन बस एक दो दिन ही का,,,,
              धरम पथ पर गतिमान पावन दीपक जलाते हैं !!!,,,''तनु ''
       

Sunday, April 5, 2015

बूँद बूँद चाँदनी नहीं,....  मृगतृष्णा का घूँट ,
ये किस करवट को बैठ गया , जीवन मरु का ऊँट ?
वाणी है मौन, प्रश्न गौण , एषणाएँ धूसरित !!!............
मलमल सी जिन्दगी में पैबंद लगा रहा जूट,,,,,,,,,,