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Saturday, December 19, 2015

सिहर उठते हैं ठंढ बिन,  देख -- ऐसा जगत व्यवहार ?
जाने कहाँ से आया है, ,, जन - मानुष में ये कदाचार ?
कौन बताए  राह, ,, और कौन पंथ के शूल हटाये ??
जिससे सुखद सलोना जीवन हो  पावन हो आचार, ,, 

Friday, December 18, 2015


चाहत का  सितारा है ''बद्र''


ये मेरी चाहत नहीं सितारा है ''बद्र'' को , ,,
अब तो इश्क ज़ाहिर सबां, गुमाँ है ''अत्र'' को !!......

सीने में वो दर्द का कोहराम मचाकर, ,,
प्यार खो ईमान लुटाकर ढूँढे है कद्र को !!....


दर्द -विरासत पाकर मैं काम चला लूँगा , ,,
लग गया जो रोग बड़ा जिद्दी है उम्र को !! ..

मानिए मैं अपने शोर-ओ-शर से भागता नहीं,,,
ग़म के कुछ कशीदे पढ़ूँ साथ लिए फ़ख़्र को !!

क्यों लौट लौट आते हैं लोग ''और'' जिस्म में , ,,
''तनु ''ख्वाहिशें कई बाकी मेरे जी बेसब्र को !!.... तनुजा ''तनु''

Tuesday, December 15, 2015

वि किताबां लावे ड्राइंग रूम में रखवा वास्ते ;
वि घणों मीठो बोले लोगां ने दिखावा वास्ते !
अबे लो ,,,,कसी लागि या स्टेंडर्ड री बीमारी , ,,,
काम हगरा वे वणाके, सबने दिखावा वास्ते !!!!

Saturday, December 12, 2015

अहं 

नापते ही रहे अहम के फीते से अब्र को  
इक मर्तबा फिर चढ़ाया सूली पे सब्र को 
पानी के बुलबुले की मानिंद है जिन्दगी 
जिस्म दीया दोनों मिटटी,  जी है कब्र को 

Friday, December 11, 2015


सबाब के टूटते दरख़्त 


कहाँ चला आया हूँ, मैं कहाँ तक सोचूँ ;
ख्वाहिशे परवाज़ है, आसमां तक सोचूँ !

दर्द किसे ? किसकी आँख का बहा आँसू ?   

हकीकत भुला दूँ, ,, और गुमाँ तक सोचूँ , ,,

पड़ा हुआ ओंधा, ज़माना गश है खाकर ;
इक मैं ही चैन खोकर, कहाँ तक सोचूँ !!

दरख़्त सबाब के,  टूटते रहे हर पल ;
शजर कभी बदला नहीं,  वहाँ तक सोचूँ !

कहाँ दर्द की फ़ुग़ाँ ,  कौन ये सुनता है ?  
कंगन आइने से देखूँ, निहाँ तक सोचूँ , ,,  

जिसम मर गया है, सदा मगर ज़िंदा है ;
जिंदगी मौत सी,  मैं जहाँ तक सोचूँ , ,,

गुनाह करके वो छूटते, सबाब है क्या ?  
मर गया ज़मीर, कैसे गिरां तक सोचूँ !!!  तनुजा ''तनु ''

Tuesday, December 8, 2015

जुग जुग जीवता रीजो कालजा री कोर ;
दादोसा जी रा आंगणें मोती चुगे मोर !
देवण पोता ने असीस देवी देवता आय , ,,
बलखावै ने  गीत गावै  चोखी पुगे भोर !! 

रंग भवन में सोवे लाल कोई मती जगाजो ; 
दादीसा रा पाछे -पाछे धीमें - धीमें जाजो !
निछावर करजो जी सोना चाँदी रा थाल , ,,
चाचो सा मामो सा थें गोदी माय रमाजो !!...तनुजा ''तनु ''
नज़राना

वुसअतें आफताब की गुलों पर महरबां रहे ;
तनवीर ही तनवीर हो जहां में हम जहाँ रहे ! 

हर फन के ख्वाब की ताबीर हो कायदा रहे ;  
पहलू में जन्नत हो दिल सदा रक्साँ रहे !

ज़र्रा ज़र्रा सुनाता रहे कहानी मिरे इश्क की ;
 मैं तेरा दीवाना रहूँ  और तू सदा जवां रहे !

हर नफ़स हमनफ़स हमकदम हमदम हर दम ;
फस्ल- ए -ग़ुल रहे क़मर हो सदा कहकशां रहे !

इससे पहले भी हम कई बार मिले हैं ''तनु '';
नसीम चमन में, कुर्ब हो, सदा नज़राना रहे !.... तनुजा ''तनु ''