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Thursday, November 16, 2017

मनडा में आवै विचार सखी ;


मनडा  में आवै विचार सखी ;
कसा वे  ग्या  व्यवहार सखी !

कसी  बदली गई  या  दुनिया ;
ने बदली ग्या आचार सखी !

पहचान मुखौटा खोई  गई ;  
लगाऊँ किणने गुहार सखी !

दुष्ट आततायी जीती ग्या :
मासूम निरीह शिकार सखी !

सब रा आगे साँच रो परचम ;
रई ग्यो पाछे क्यों हार सखी !

लोई आपणों मुंगो थो; 
रह्यो क्यों नी वफादार सखी !

बुनियाद आपणी काची घणी ;
लो  वई ग्यो बंटाढार सखी !!... ''तनु ''

मन में ज्वलंत विचार सखी ;


मन में ज्वलंत विचार सखी ;
कैसे हुए व्यवहार सखी !

देखो  बदली अपनी दुनिया ;
औ बदल गया आचार सखी !

पहचान मुखौटों में ग़ुम है ;
लगाऊँ किसको गुहार सखी !

दुष्ट आततायी की जय है ;
मासूम निरीह शिकार सखी !

सच सब से आगे चलता था;
कैसे माना  है   हार सखी !

कितना गाढ़ा लहू हमारा ;
क्यों रहा ना वफादार सखी !

बुनियाद हमारी कच्ची थी ;
लो पल में  बंटाढार  सखी !!... ''तनु''

Tuesday, November 14, 2017

तितली




तितली जी ओ  तितली जी ,
उड़ कर आना  तितली जी !!


बड़ा भला लगता आँखों को 
उड़ते रहना तुम्हारा,
इन फूलों से उन फूलों पर
ठुमक ठुमक कर इठलाना !
कौन सँवारे पंख रंगीले 
तुम बतलाना  तितली जी !!

बाग़ बगीचे दौड़ लगाती 
धूप से भी न घबराती,
कभी बहारों से बतियाती 
फूलों से खाना पाती !
अभी कितना काम तुम्हारा ,
कभी न सोना तितली जी !!

खड़े खड़े लेती हो जान ,
सेंसर पाँव के हैं महान !
उड़ न पाओ ठंड़े ख़ून 
नहीं तो जा पहुँचो रंगून !
अंडे तुम पत्तों पर देती,
रंग रंगीली तितली जी !!

रहती कभी ना तुम टेन्स ,
आँख में बहुतेरे लेंस !
बड़ी तितली है बारह इंच 
सबसे छोटी आधा इंच !
छू कर समझ सब जाती ,
नहीं देखती तितली जी !!

तितली जी ओ  तितली जी, 
उड़ कर आना  तितली जी!!... ''तनु'' 


Monday, November 13, 2017

मन क्यों हारे इह संसारे, 
जो मन जीता रहा न रीता.
मन मन का भारी,

मन मन का हल्का. 
गगन का तारा,
गगन की उल्का.
मन क्यों हारे इह संसारे,
जो मन जीता रहा ना रीता ..........Tanuja .'tanu'

Sunday, November 12, 2017

बाब कभी के बंद हुए नामा-ए आमाल के ;



बाब कभी के बंद हुए नामा-ए आमाल के ;
झोली में मेरे कुछ ना रहा नाम कंगाल के !
लहरें होंगी ख़्वाबीदा तो तूफ़ान आएगा , ,,  
या ख़ुदा रहम, ,,अनाम हूँ नाम इक़बाल के !! ... ''तनु ''

Saturday, November 11, 2017

गुल मुरझाया क्यों ख़ारों से पूछा होता,




गुल मुरझाया क्यों ख़ारों  से पूछा होता ;
कल मुस्काया वो बहारों से पूछा होता!

सभी ने आलम देखा ब-अंदाज़-ए-दिगर;
आपने देखा क्या नजारों से पूछा होता!

 कोहसार नदी पवन की सीरत बदली;
आब औ ख़ाक के जर्रों से पूछा होता!

 मुन्कशिफ़ है तबाही का हाल क्या कीजै;
 सबा में आग क्यों अंगारों से पूछा होता!

 गैर की बात नहीं खुद ये दिल कह देगा;
 नहीं डगरआसां दुश्वारियों से पूछा होता!... ''तनु ''

आओ तो मिल बैठेंगे 
जाओ तो दिल रो देंगे 
बताओ क्या होगा फिर 
यादों में दिल डुबो देंगे। ... ''तनु''