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Tuesday, September 8, 2015

शिष्य ति !!!

मूर्ति मन माहि रखजो, लक्ष्य रखजो सुभाय !
छोड़ जगत रा चोंचला, करजो करम निभाय !!
करजो करम निभाय,  फोड़ लालच रो गागर !
मीठो राख सुभाव,    भर जो नेह रो सागर !!
रहे गरु समुझाय,  मिटा कपट तुरत फुरती  ! 
चल एकलव्य राह,   मन माहि रखजो मूर्ति !!…तनुजा ''तनु ''
शिष्य के लिए !!!

मूरती  मन में रखिये, लक्ष्य रखिये निगाह !
छोड़ जगत के चोंचले, करिये कर्म निबाह !!
करिये कर्म निबाह, फोड़ लालच की गगरी !
मीठा रख स्वभाव ,  रहें स्नेह की नगरी !!!
रहे गुरु समझाय, मन में कपट ना रखिये ;                     
चल एकलव्य राह,   मन में मूरती रखिये ! …तनुजा ''तनु ''

Friday, September 4, 2015

प्रार्थना का एक छंद 

भवसागर में कान्हा,   डोल रही है नाव ;

पथ ना सूझे तुम बिना, काँप रहे हैं पाँव !

काँप रहे हैं पाँव,   कैसी प्रीत तुम्हारी ?

ढूँढू कदम्ब छाँव , हर शाम हो बनवारी !! 

आओ बरसें  नैन , खाली प्रीत की गागर , ,,

चलो लगाओ पार,    कान्हा मैं भवसागर ……तनुजा ''तनु ''… 

Thursday, September 3, 2015

बूँद 



कभी बादलों से पराई हुई ;
पवन के खटोलों चढ़ाई हुई !

चमकती गमकती लहराती है ;
हवा के हिंडोले झुलाई हुई !

विटप की जड़ों में सहेजे छुपी ;
घटा से मही की चुराई हुई ! 

बढ़ी बाढ़ के रूप में बह चली ;
जनों को घटाती कसाई हुई ! 

लिपटती रही शाख पत्तों से भी ;
बन तुषार श्वेता जमाई हुई !

रवि किरणें बूँदों में छनती रहीं; 
अनगिन रंगों में नहाईं हुई !

अभी प्यास को चाह इसकी बहुत ;
नववधु सिमटी है लजाई हुई !!!....... तनुजा ''तनु ''

Wednesday, September 2, 2015


केशव कठे नी बिस्बास करी ने देख ;
माधव जठे नी निस्कास करी ने देख !
रास !!!रास आवै इसी रसमय रात दे , ,,,,
सगळा रा साथै उ आभास करी ने देख !! 


Tuesday, September 1, 2015


कहाँ नहीं तू 

केशव कहाँ नहीं है विश्वास देखिये !
माधव जहाँ नहीं है निष्कास देखिये !!

टूटे हुए पतवार हैं माझी भी नहीं ;
कैसे ही होगी पूरी ये आस देखिये !

ढूँढा कहाँ कहाँ न नज़र तू आ रहा ;
कण कण रचा बसा तेरा वास देखिये !

माया रची सजा जहां तेरा उजास ले ;
इक पल उदास इक पल उल्लास देखिये ! 

रास !!! रास आये ऐसी रसमय रात दे ;
सबके साथ ही है वो आभास देखिये !

मेरी तुमरी प्रीति कैसी , ,, क्या जाने हो श्याम ??
नहीं पतंगा, नहीं मीन हूँ , ,, बूझो नहीं लगेगो दाम 
प्रेम की राह बड़ी कठिन है, ,, नहीं उधार को काम 
तुम बन जाओ श्याम घन!!! लूँ मैं कृष्ण कृष्ण को नाम , ,,,,