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Wednesday, September 7, 2016




दिल आसमां का लिए चाँद  निहारता है जमीं को ;
आसमां भी उफ़क चूम कर निखारता है जबीं को! 
कितनी रंगीनियाँ  हैं कायनात में आओ कि देखो , ,,
 कौन है!! खुद को सँवार कर सँवारता है सभी को !!..''तनु ''

Sunday, September 4, 2016





पेला मनाऊ गणपति ने,   थें सकलविघन ति तारणवारा ;
मोदक भोग उमासुत ने महा दुःख कलेस विनाशनवारा ! 
बुद्धि के दाता सिंधुरवदन हो ,  वासरमणि तमहारनवारा , ,,, 
मोक्ष की चाह  पाय लगूँ  मत देर करो वर देवनवारा  !!... ..तनुजा ''तनु ''   

Saturday, September 3, 2016







कहाँ चल पड़ी ये जिंदगी, अहसास दर्द के घट गए ;
कहाँ खो गयी है बंदगी,   शूल दामन से लिपट गए , ,,
इक था फरिश्ता चाँद सा कौन अब राह दिखाएगा ?
खुद की सलीब हम ढो रहे,  कैसे ये पासे पलट गए ??...''तनु ''


माँ



दूत की जब बात चले तब ''रामदूत'' की बात ही क्या ;

बालक सम बन के रहे उस अवधूत की बात ही क्या !


प्यार सब पर लुटाती   बहन, पत्नी, बेटी  बनकर वो , ,,, 

जननी  की जब बात चले ''माँ '' रूप की बात ही क्या !!... ''तनु ''


दूत की जब बात चले तब राम दूत की बात ही क्या ;

बालक सम बन के रहे उस अवधूत की बात ही क्या !

निराहार रहे कंठ सूख रहे निद्रा सुख भी त्याग दिया , 

जननी पालनहार है वो माँ सम रूप की बात ही क्या !!..''तनु ''
                     

Friday, September 2, 2016




प्रथम मनाऊँ मैं गणपति को वो हैं सकल विघ्न के हारे ;     
मोदक भोग उमासुत को महा दुख कलेश विनाशनवारे !   
बुद्धि के दाता सिंधुरवदन को वासरमणि जो तम टारे , ,,,
मोक्ष की चाह पाय लगूँ मत देर करो वर देवनवारे !!...तनुजा ''तनु ''   

Thursday, September 1, 2016



नन्हे बटुक बताओ तुम अवधूत कब बने ? 
दाँत तले जिव्हा दबी बंदआँख कब खुले ?
कुछ कर बैठे हो अब बता भी तो दो जरा ?
धूल धूसरित हो बैठे क्यों शैतानियों तले , ..''तनु ''




बचपन बीतता खुशियों ,     खेले कैसे खेल !
कागज़ से जहाज़ बने, मुँह से छुक-छुक रेल !!
 मुँह से छुक-छुक रेल !! फुलवारी ऐसी सजी   
 झूला डोले  डाल ,         झूले में गुड़िया सजी 
 पेड़ लगाओ सब भूल,   तुम सँवारो पचपन,  
कोमल कोंपल फूल,  हँसाता हँसता बचपन !!... तनुजा ''तनु ''