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Sunday, August 20, 2017






कैसो यो सिणगार है, बोले मिरगा नैण!
थारा बंद होठां से ,   घणा करे तू बैण !!
घणा करे तू बैण , फेर खोय जावे कठे ?
ढूँढूँ मैं दिन  रैन,      रे थने अठे ने वठे ??
आंख्या ली सुजाय, लग्यो धपडको ऐसो,
कठे रे लागि लाय, है सिणगार यो कैसो !!.. ''तनु''

Saturday, August 19, 2017





दरख्त हरे गिरा गयी,   कैसी निर्दय बाढ़ !
नैन का जल जला गयी, डूब गयी है भाड़!!

गीत गा रही बाँसुरी,    ताल पखावज देत,
नृत्य करे मन बावरा, पग पग आहट लेत !

लगाती आग भूख की, बीत गयी जो रात !
उगाता दिन मौत का,  सूरज करता घात !!

सपने दरिया के दूर हैं,  देखी नहीं बहार !
मरीचिका सी जिंदगी, भोजन भी दुश्वार !!

थकन पाँव से बाँध के, नींद गयी है डूब !
दीवाने सपने हुए ,     छुपे नयन महबूब !!

टुकड़ा ढूँढू मेघ का,    जिस पर मेरा नाम !
खुद तरसा है तरस के,  नाहक है बदनाम !!

काम करता कुदाल का ,मजदूरों का स्वेद !
बिस्तर तोड़ें आप तो,     नाहक करते खेद!!

इक किसान लिखवा रहा, फाकों की तफ़्सील ! 
बुरा वक्त नाकामियाँ,        कौन करे तब्दील ??

पराये पोंछे अँखियाँ  प्यार जताते गैर !
अपनों में हम गैर से ,कैसे मनती खैर !!,,...''तनु''




Friday, August 18, 2017







नज़र ढूँढे हामिद को, लटक गयी है खाल !
पडोसी पूछते यही, कह!!...है ?? तेरा लाल !!

नज़र ढूँढे हामिद को,   ईदगाह की राह !
मुरादों के पंख लगे,  ले विदेश की चाह !!

अकेले अकेले रहे,     लिखा यही था भाल !
दो दिन की ये जिंदगी,    बीतती है मलाल !!

एक लड़ाई जिंदगी,      जीवन है जंजाल !
मैं निरीह लड़ती रही, आखिर मे कंकाल  !!

आस गयी दीपक बुझे, पलकें रही निहार !
माँ बेटे के प्यार का,   उजड़ गया संसार !!

तुझको मुझसे आस थी, जब थे नन्हे पाँव !
जब उमर लाचार हुई , छोड़ गया तू गाँव !!

 तेरे रंगी सपन थे,   चाहत रही उड़ान !
 कभी तेरे सपन लिए ,ली मैंने मुस्कान !!

 रहे सरसों से बिखरे ,          छूटे दाने हाथ ! 
 बाँह पकड़ जिनकी चले, छूटा उनका साथ !!... ''तनु''







Wednesday, August 16, 2017






चोर हैं तेरे 
थैली के चट्टे बट्टे 
भिन्न चेहरे


काल का गाल 
अश्रु से नम आँखें 
बीती है बात 

खूब गढ़िये 
पल पल नवीन 
माटी का तन 

मित्र न होता 
दर्पण तन बिन 
दीप  नयन 

मिटे न भाल 
कुअंक विधान के 
अश्रु नयन 

कल काल का 
दुःख भी परस्पर 
होते संग में 

पीड़ा के पार 
सुख की अनुभूति 
जन्म नया 

पली कामना 
नए सृजन कर 
पंख लगाये 






ठौर





सलीब पर सिर्फ तुम ही नहीं और भी हैं ,
हँसी लबों से ग़ुम, ग़मगीं नहीं गौर भी है ! 
मंदिर मस्जिद या कि  हो गुरुद्वारा यहाँ , ,,
कहाँ जाऊँ कौ जाने मेरा कहीं ठौर भी है !!.. ''तनु ''

Tuesday, August 15, 2017




चलनी में अब रह गयी,  कैसी मानव जात ! 
नीचे छानन जा गिरा ,     खाये घूँसे लात !!

प्रीत निभावे छूरियाँ ,      बात करें बंदूक !
दुनिया बदली देखते,  जी में  उठती हूक !!

सारा खेल है कुर्सी ,     बड़ा बुरा ये रोग !

फिर कभी नहीं पायगा  इस जन्म ले भोग 

आप आप में उलझिये,रहे सेंक हम रोट !
यही सियासी पैंतरे ,    खूब बनाते नोट !!

छुपी सभी नाक़ामियाँ ,   परदे पीछे साँच !
चूल्हे ऊपर खिचड़ी, पकती है बिन आँच !! 

शीश ढकते पैर खुले,  आफत में है जान ! 
गरीब के दुःख थेगले,     हैं पैबंद निशान !!

कौन  देखता चेहरा ,  छुपा पीछे नकाब !
लगाते सारे एक से,  बडा सुर काँव काँव !! 

सत्य छुपता नहीं कभी,  उसमें नाही खोट !
राख  रही चिनगारियाँ,  सूरज बादल ओट !!

बंधन बाँधू प्यार के ,          ले भावों के बंध !
जनम जनम शुभकामना, रिश्तों की सुगंध !!

राखी सिर्फ सूत नहीं, 
नहीं नाम परिहास !
निर्मल मन मुक्ता धरे, सागर सा अहसास !!... 'तनु' 



Saturday, August 12, 2017

उत्तर दो

  


पेशे में आने से पहले,  कुछ कसमें खायी जाती हैं ,
कैसे सच की राह चलूँगा,  बातें समझायी जाती है !  
राह सत्य संकल्पित होकर, चार दिन भी न चल पाये तुम, ,,
कैसे वफादार तुम बोलो,  यूँ रसम निभायी जाती है ???... ''तनु''